Mark-48 Torpedo: अमेरिका ने हिंद महासागर में ईरानी युद्धपोत IRIS Dena को डुबोने का एक इन्फ्रारेड वीडियो जारी किया है। इस वीडियो में अमेरिकी पनडुब्बी से छोड़े गए मार्क-48 हेवीवेट टॉरपीडो की ताकत को दिखाया गया है। अमेरिकी रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने इसे 'शांत मौत' करार दिया है, क्योंकि दूसरे विश्व युद्ध के बाद यह पहला मौका है जब किसी अमेरिकी टॉरपीडो ने दुश्मन के युद्धपोत को डुबोया है।
क्या है मार्क-48 टॉरपीडो?
मार्क-48 अमेरिकी नौसेना का सबसे प्रमुख और शक्तिशाली 'अंडरवॉटर' हथियार है। यह एक हेवीवेट टॉरपीडो है जिसे खास तौर पर दुश्मन के बड़े जहाजों और पनडुब्बियों को नष्ट करने के लिए बनाया गया है। इसे पहली बार 1972 में पेश किया गया था, लेकिन समय के साथ इसे आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक्स और गाइडेंस सिस्टम (Mk-48 ADCAP) से लैस किया गया है। इसका वजन लगभग 1,700 किलोग्राम है और इसमें भारी मात्रा में विस्फोटक लगा होता है।
कैसे काम करता है यह 'जहाज तोड़ने वाला' हथियार?
मार्क-48 की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह जहाज से टकराता नहीं है, बल्कि उसके नीचे फटता है।यह टॉरपीडो जहाज के सबसे निचले हिस्से के नीचे जाकर धमाका करता है। इससे पानी के नीचे एक विशाल गैस का बुलबुला बनता है जो जहाज की मुख्य संरचना को बीच से तोड़ देता है। जहाज के दो टुकड़े होते ही वह कुछ ही मिनटों में समुद्र की गहराई में समा जाता है।
टारगेट को ढूंढने की सटीक तकनीक
मार्क-48 से बचना लगभग नामुमकिन है क्योंकि यह एक्टिव और पैसिव सोनार का उपयोग करके टारगेट का पीछा करता है। अगर दुश्मन का जहाज रास्ता बदलता है या बचने की कोशिश करता है, तो यह टॉरपीडो खुद को उसके हिसाब से एडजस्ट कर लेता है। यह 100 किमी/घंटा से ज्यादा की रफ्तार से चल सकता है और कई किलोमीटर दूर खड़े दुश्मन पर हमला कर सकता है।
मार्क-48 अमेरिकी नौसेना की लगभग सभी आधुनिक अटैक सबमरीन जैसे- वर्जीनिया और लॉस एंजिल्स क्लास का मुख्य हथियार है। इसकी मारक क्षमता इतनी अधिक है कि यह एक ही झटके में आधुनिक युद्धपोतों को कबाड़ में बदल सकता है।