ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने युद्ध को लेकर अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता की कोशिशों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि अगर कोई देश सीजफायर कराने की कोशिश कर रहा है, तो उसे ईरान पर नहीं, बल्कि युद्ध शुरू करने वालों पर दबाव डालना चाहिए। राष्ट्रपति पेजेशकियन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए कहा कि कई देश इस समय मध्यस्थता की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन ईरान का रुख बिल्कुल साफ है।
उन्होंने लिखा, “हम क्षेत्र में स्थायी शांति के लिए प्रतिबद्ध हैं, लेकिन अपने देश की गरिमा और अधिकारों की रक्षा करने में हमें कोई हिचक नहीं है। मध्यस्थता का निशाना उन लोगों को बनाना चाहिए, जिन्होंने ईरानी जनता को कम आंककर इस आग को शुरू किया।”
अमेरिका और इजरायल पर इशारा
हालांकि, पेजेश्कियन ने यह नहीं बताया कि किन देशों ने ईरान से संपर्क किया है, लेकिन उनके बयान को अमेरिका और इजरायल पर सीधा इशारा माना जा रहा है।
दरअसल मौजूदा संघर्ष की शुरुआत 28 फरवरी 2026 को हुई थी, जब अमेरिका और इजरायल ने मिलकर ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़े ठिकानों पर हमले किए। इन हमलों में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत हो गई थी।
इन हमलों के बाद ईरान ने पूरे क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन से लगातार हमले शुरू कर दिए, जिससे हालात तेजी से बिगड़ गए और पूरे पश्चिम एशिया में सुरक्षा संकट पैदा हो गया।
इस संघर्ष का असर अब वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी पड़ने लगा है। खाड़ी देशों से होने वाले ऊर्जा निर्यात पर खतरा बढ़ गया है और विशेषज्ञों का कहना है कि तेल की कीमतें 150 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती हैं।
सबसे बड़ा खतरा होर्मुज स्ट्रेट को लेकर माना जा रहा है, जहां से दुनिया के बड़े हिस्से का तेल गुजरता है। अगर यहां स्थिति और बिगड़ती है, तो वैश्विक ऊर्जा सप्लाई पर गंभीर असर पड़ सकता है।
इसी वजह से दुनिया के कई देश अब जल्दी से जल्दी युद्ध रोकने के लिए कूटनीतिक कोशिशें तेज करने की बात कर रहे हैं।