मध्य पूर्व में हालात बेहद गंभीर हो गए हैं। अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर बड़ा संयुक्त हमला किया है। इजरायली सेना ने कहा कि यह कार्रवाई “कई महीनों की करीबी और संयुक्त योजना” का नतीजा है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक हमलों में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई, राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान और सेना प्रमुख को निशाना बनाया गया।
इसके जवाब में ईरान ने भी इजरायल और मध्य पूर्व में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमले शुरू कर दिए। रिपोर्ट्स के अनुसार इजरायल, बहरीन, अबू धाबी, दुबई, कुवैत, रियाद और कतर के कई इलाकों में धमाकों की आवाजें सुनी गईं।
बढ़ते तनाव के बीच ईरान खुद को क्षेत्र में काफी हद तक अलग-थलग पाता दिख रहा है। उसका तथाकथित “Axis of Resistance” यानी सहयोगी गुट पिछले कुछ सालों में इजरायल के हमलों से कमजोर हुआ है।
इस गुट में लेबनान का हिजबुल्लाह, इराक की पॉपुलर मोबिलाइजेशन फोर्स (PMF), यमन के हूती विद्रोही और गाजा का हमास शामिल हैं।
ईरान का इराक और यमन में जमीनी प्रभाव भी माना जाता है। हाल के दिनों में ईरान, रूस और चीन के बीच सैन्य सहयोग बढ़ने की खबरें भी सामने आई हैं।
रूस के पूर्व राष्ट्रपति दिमित्री मेदवेदेव ने अमेरिकी हमलों की आलोचना की। उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर तंज कसते हुए कहा कि “शांति दूत ने फिर अपना चेहरा दिखा दिया।”
पाकिस्तान, जो एकमात्र परमाणु हथियार रखने वाला इस्लामिक देश है, ईरान से करीबी रिश्ते रखता रहा है। हालांकि, 2025 में इजरायल-ईरान संघर्ष के दौरान इस्लामाबाद ने खुद को तेहरान से दूर कर लिया था।
ईरान के जवाबी हमलों के बाद संयुक्त अरब अमीरात (UAE), कतर और कुवैत जैसे खाड़ी देशों ने इसे “खतरनाक उकसावा” बताया और जवाब देने का अधिकार सुरक्षित रखा।
UAE ने कहा कि उसके एयर डिफेंस सिस्टम ने ईरानी बैलिस्टिक मिसाइलों को सफलतापूर्वक रोक दिया। अबू धाबी ने इसे गंभीर स्थिति बताया।
कतर ने भी अपने क्षेत्र में मिसाइल हमले की निंदा की और इसे संप्रभुता का उल्लंघन बताया। कुवैत ने कहा कि उसके एयर डिफेंस सिस्टम ने एयर स्पेस में घुसी मिसाइलों को निशाना बनाया।
सऊदी अरब ने UAE, बहरीन, कतर, कुवैत और जॉर्डन में अमेरिकी ठिकानों पर हुए हमलों की कड़ी निंदा की और इन देशों के साथ एकजुटता जताई।
अमेरिका के पश्चिमी सहयोगी देशों- जैसे जर्मनी और फ्रांस- ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम और हालिया दमन की आलोचना की है। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि उन्हें हमलों की पहले से जानकारी थी या नहीं।
इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने कहा कि इटली क्षेत्रीय नेताओं से संपर्क करेगा और तनाव कम करने की हर पहल का समर्थन करेगा।
मध्य पूर्व में इस बढ़ते टकराव ने कई देशों को सीधे या परोक्ष रूप से इसमें खींच लिया है। आने वाले दिनों में हालात किस दिशा में जाएंगे, इस पर पूरी दुनिया की नजर बनी हुई है।