मिडिल ईस्ट की जंग में रूस की 'सीक्रेट' एंट्री! अमेरिका के जंगी जहाजों की लोकेशन ईरान को बता रहा मास्को, क्या अब शुरू होगा महायुद्ध?

Middle East War: पिछले कुछ दिनों में ईरान ने अमेरिका के ठिकानों पर हजारों ड्रोन और सैकड़ों मिसाइलें दागी हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि रूस सीधे तौर पर इस जंग में शामिल नहीं होगा। रूस का पूरा ध्यान अभी भी यूक्रेन पर है। वो सिर्फ ईरान को जानकारी देकर अमेरिका को नुकसान पहुंचाना चाहता है, ताकि अमेरिकी सेना मिडिल ईस्ट में उलझी रहे

अपडेटेड Mar 06, 2026 पर 8:10 PM
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मिडिल ईस्ट की जंग में रूस की 'सीक्रेट' एंट्री! अमेरिका के जंगी जहाजों की लोकेशन ईरान को बता रहा मास्को

मिडिल ईस्ट में अमेरिका और ईरान के बीच चल रही जंग अब एक 'ग्लोबल वॉर' का रूप लेती दिख रही है। एक चौंकाने वाली रिपोर्ट के मुताबिक, रूस इस लड़ाई में पर्दे के पीछे से ईरान की बड़ी मदद कर रहा है। रूस कथित तौर पर अमेरिका के जंगी जहाजों और लड़ाकू विमानों की पल-पल की लोकेशन (रियल-टाइम इंटेलिजेंस) ईरान को दे रहा है, ताकि ईरान सटीक हमले कर सके।

वॉशिंगटन पोस्ट की एक रिपोर्ट ने पूरी दुनिया में सनसनी फैला दी है। तीन बड़े अधिकारियों के हवाले से दावा किया गया है कि जब से पिछले शनिवार को जंग शुरू हुई है, रूस लगातार ईरान को अमेरिकी सेना की लोकेशन साझा कर रहा है। यह पहली बार है, जब अमेरिका का कोई इतना बड़ा दुश्मन इस युद्ध में सीधे तौर पर (परोक्ष रूप से) शामिल होता दिख रहा है।

रूस क्यों कर रहा है ईरान की मदद?


विशेषज्ञों का मानना है कि रूस यह सब 'बदला' लेने के लिए कर रहा है।

यूक्रेन युद्ध में अमेरिका ने यूक्रेन को रूस के खिलाफ खुफिया जानकारी और हथियार दिए थे। अब रूस वही काम ईरान के साथ मिलकर अमेरिका के खिलाफ कर रहा है।

दूसरी तरफ ईरान ने यूक्रेन युद्ध में रूस को सस्ते 'सुसाइड ड्रोन' दिए थे। अब रूस उस कर्ज को चुका रहा है।

ईरान के हमलों में अचानक आई 'सटीकता'

पिछले कुछ दिनों में ईरान ने अमेरिका के ठिकानों पर हजारों ड्रोन और सैकड़ों मिसाइलें दागी हैं।

रविवार को कुवैत में एक अमेरिकी ठिकाने पर हुए ड्रोन हमले में 6 अमेरिकी सैनिक मारे गए।

एक्सपर्ट दारा मासीकोट के अनुसार, ईरान अब अमेरिका के 'अर्ली वार्निंग रडार' और कमांड सेंटर को निशाना बना रहा है। बिना सटीक लोकेशन के ऐसे हमले करना मुमकिन नहीं था।

सऊदी अरब की राजधानी रियाद में मौजूद अमेरिकी दूतावास के पास स्थित CIA स्टेशन पर भी हमला हुआ है।

रूस की सैटेलाइट तकनीक का खेल

ईरान के पास खुद के बहुत कम मिलिट्री सैटेलाइट हैं, जिससे वह दूर बैठे अमेरिकी जहाजों को ट्रैक नहीं कर सकता।

हालांकि, रूस के पास आधुनिक सैटेलाइट नेटवर्क है। वह आसमान से अमेरिकी नेवी की हर हलचल देख सकता है और वही जानकारी तुरंत ईरान को भेज रहा है।

इसी जानकारी की मदद से ईरान की मिसाइलें अमेरिकी एयर डिफेंस सिस्टम को चकमा देकर सटीक वार कर रही हैं।

अमेरिका और चीन का क्या रुख है?

व्हाइट हाउस की प्रवक्ता अन्ना केली ने कहा कि ईरान की सेना बुरी तरह कुचली जा रही है और उसकी ताकत हर दिन कम हो रही है। पेंटागन ने रूसी मदद की खबर पर फिलहाल कोई सीधा कमेंट नहीं किया है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन इस सैन्य कार्रवाई में ईरान की कोई मदद नहीं कर रहा है। चीन फिलहाल खुद को इस विवाद से दूर रखे हुए है।

क्या रूस सीधे युद्ध में उतरेगा?

विशेषज्ञों का कहना है कि रूस सीधे तौर पर इस जंग में शामिल नहीं होगा। रूस का पूरा ध्यान अभी भी यूक्रेन पर है। वो सिर्फ ईरान को जानकारी देकर अमेरिका को नुकसान पहुंचाना चाहता है, ताकि अमेरिकी सेना मिडिल ईस्ट में उलझी रहे।

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