Attack On Iran Girls School: ईरान में जारी भीषण युद्ध के बीच एक फोटो सोशल मीडिया पर खूब शेयर की गई। उस फोटो में एक साथ सैकड़ों कब्र दिखाई देते है। ये कब्र उन बच्चियों के लिए खोदे गए थे जिन्होंने स्कूल पर हुए मिसाइल हमले में अपनी जान गवां दी। इस हमले को लेकर अब एक बड़ा खुलासा हुआ है। 'न्यूयॉर्क टाइम्स' की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी सेना की शुरुआती जांच में यह स्वीकार किया गया है कि 28 फरवरी को ईरान के मिनाब में एक लड़कियों के प्राइमरी स्कूल पर हुआ मिसाइल हमला अमेरिकी सेना की एक 'बड़ी चूक' का नतीजा था। इस हमले में 165 मासूम बच्चियों की मौत हो गई थी।
जांच में सामने आया है कि यह हमला जानबूझकर नहीं, बल्कि गलत टार्गेट चुनने की वजह से हुआ। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अधिकारियों ने हमले के लिए जिन 'कोऑर्डिनेट्स' का इस्तेमाल किया, वे डिफेंस इंटेलिजेंस एजेंसी (DIA) द्वारा दिए गए पुराने डेटा पर आधारित थे। जिस 'शजराह तय्येबा' (Shajarah Tayyebeh) स्कूल पर मिसाइल गिरी, वह इमारत पहले पास के ही एक ईरानी नौसैनिक बेस का हिस्सा थी। सालों पहले इसे बेस से अलग कर स्कूल बना दिया गया था, लेकिन अमेरिकी रिकॉर्ड में इसे अभी भी सैन्य ठिकाना ही दिखाया गया था।
जांचकर्ता अब इस बात की पड़ताल कर रहे हैं कि हमला करने से पहले इस जानकारी को दोबारा 'डबल-चेक' क्यों नहीं किया गया, जबकि सैटेलाइट तस्वीरों में स्कूल की दीवारों पर रंग-बिरंगी पेंटिंग और खेल के मैदान साफ नजर आ रहे थे।
भयावह हमले में हुई थी 175 लोगों की मौत
यह हमला 28 फरवरी को उस समय हुआ जब स्कूल में क्लास चल रही थी। वीडियो फुटेज और मलबे के विश्लेषण से पुष्टि हुई है कि हमले में अमेरिकी टोमहॉक क्रूज मिसाइल का इस्तेमाल किया गया था। इस हमले में कुल 175 लोग मारे गए, जिनमें 165 स्कूली छात्राएं शामिल थीं। मिसाइल गिरते ही स्कूल की पूरी इमारत बच्चों और शिक्षकों पर ढह गई। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में स्कूल के मलबे से धुंआ उठता हुआ और बिलखते माता-पिता देखे जा सकते हैं।
ट्रंप ने नहीं मानी अपनी गलती!
हमले के तुरंत बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जिम्मेदारी लेने से साफ इनकार कर दिया था। ट्रंप ने पहले कहा था कि हो सकता है यह हमला खुद ईरान ने ही किया हो, क्योंकि उनकी मिसाइलें 'सटीक नहीं' हैं। उन्होंने यह भी तर्क दिया था कि टोमहॉक मिसाइलें कई देश इस्तेमाल करते हैं। हालांकि, अब सबूतों और सैन्य जांच के दबाव के बीच ट्रंप ने कहा है कि वह इस मामले की जांच होने देंगे और रिपोर्ट में जो भी सामने आएगा, उसे स्वीकार करेंगे।
ईरानी विदेश मंत्रालय ने इस घटना को 'अक्षम्य युद्ध अपराध' करार दिया है। अंतरराष्ट्रीय कानूनों (IHL) के तहत शिक्षण संस्थानों और अस्पतालों को निशाना बनाना प्रतिबंधित है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह हाल के दशकों में अमेरिकी सेना की सबसे घातक मानवीय गलतियों में से एक साबित हो सकती है।