Venezuela Crisis: वेनेजुएला पर अमेरिकी एक्शन से दुनिया में टेंशन, क्या ये है ट्रंप की नई विदेश नीति की शुरुआत?

Venezuela Crisis: निकोलस मादुरो के बाद कार्यवाहक राष्ट्रपति बनीं डेल्सी रोड्रिगेज ने एक तरह से अमेरिका के सामने सरेंडर कर दिया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर एक नरम और मेलजोल भरा बयान जारी करते हुए अमेरिका को सहयोग का न्योता दिया है। उन्होंने साफ कहा कि वेनेज़ुएला 'बाहरी खतरों के बिना जीना चाहता है' और अमेरिका के साथ "संतुलित और इज़्ज़तदार रिश्तों" की ओर बढ़ना चाहता है

अपडेटेड Jan 05, 2026 पर 5:24 PM
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Venezuelan crisis:भारत ने वेनेजुएला में हो रहे घटनाक्रम पर गहरी चिंता जताई है। विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में कहा है कि भारत सरकार हालात पर करीबी नजर रखे हुए है।

Venezuela Crisis : एकतरफा कार्रवाई में रातोंरात वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को पकड़कर अमेरिका ले जाकर ट्रंप ने पूरी दुनिया में टेंशन बढ़ा दी है। मादुरो को अमेरिकी फोर्स उनके बेडरूम से घसीटकर अमेरिका ले गई। मादुरो के साथ उनकी पत्नी को भी ले जाया गया। अब अमेरिकी कोर्ट में मादुरो की पेशी होनी है। अमेरिका ने मादुरो पर नारको आतंकवाद समेत कई आरोप लगाए हैं। हालांकि, अमेरिका ने ये साफ कर दिया है कि वो वेनेजुएला की सरकार नहीं चलाएगा लेकिन सीधी धमकी भी दी है कि अगर केयरटेकर सरकार उनके साथ सहयोग नहीं करती है तो वो उनका मादुरो से भी बुरा हाल करेंगे। इधर, अमेरिका के इस एक्शन के बाद पूरी दुनिया में टेंशन बढ़ी हुई है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की इमरजेंसी बैठक बुलाई गई है। चीन, रूस, उत्तर कोरिया ने वेनेजुएला में अमेरिका के एक्शन की निंदा की है।

कार्यवाहक राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज ने भी अमेरिका के सामने किया सरेंडर

इस बीच निकोलस मादुरो के बाद कार्यवाहक राष्ट्रपति बनीं डेल्सी रोड्रिगेज ने एक तरह से अमेरिका के सामने सरेंडर कर दिया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर एक नरम और मेलजोल भरा बयान जारी करते हुए अमेरिका को सहयोग का न्योता दिया है। उन्होंने साफ कहा कि वेनेज़ुएला 'बाहरी खतरों के बिना जीना चाहता है' और अमेरिका के साथ "संतुलित और इज़्ज़तदार रिश्तों" की ओर बढ़ना चाहता है। ये बयान वैश्विक राजनीति में वेनेज़ुएला के रुख में संभावित बदलाव का संकेत है। इधर वेनेजुएला के बाद ट्रंप ने कोलंबिया, क्यूबा और मैक्सिको की सरकारों को सैन्य कार्रवाई की चेतावनी दी है। ट्रंप ने कहा है कि उन्हें वेनेजुएला जैसा मिलिट्री ऑपरेशन अच्छा लगता है। ट्रंप ने कहा कि कोलंबियाई सरकार एक बीमार आदमी चला रहा है। वहीं क्यूबा को धमकाते हुए ट्रंप ने कहा कि क्यूबा खुद पतन के करीब है। वहीं ट्रंप ने मैक्सिको पर कहा कि अमेरिका को मैक्सिको के साथ कुछ करना होगा।


वेनेज़ुएला के बाद ट्रंप के निशाने पर कई और देश

वेनेज़ुएला में अमेरिकी सैन्य कार्रवाई और राष्ट्रपति निकोलेस मादुरो की गिरफ्तारी के बाद अब एक बड़ा सवाल खड़ा हो गया है कि क्या ये सिर्फ एक देश तक सीमित कार्रवाई थी,या फिर ये ट्रंप की नई विदेश नीति की शुरुआत है? राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप के हालिया बयान साफ संकेत देते हैं कि अमेरिका अब खुलकर उन देशों में दखल देना चाहता है,जहां या तो अमेरिकी हितों को चुनौती मिल रही है या फिर चीन और रूस का प्रभाव बढ़ रहा है।

लैटिन अमेरिकी देशों पर ट्रंप की टेढ़ी नज़र, वेनेज़ुएला के बाद कोलंबिया की बारी?

डॉनल्ड ट्रंप ने वेनेज़ुएला में सैन्य कार्यवाही के बाद अपने बयानों में बार-बार वेनेज़ुएला के तेल का ज़िक्र किया। इससे ये साफ़ हो गया कि ये कार्रवाई सिर्फ “तानाशाही खत्म करने” की नहीं थी, बल्कि ऊर्जा संसाधनों और अमेरिकी कंपनियों के हितों से भी जुड़ी थी। अब ट्रंप की नज़र कोलंबिया पर है। कोलंबिया के राष्ट्रपति गुस्तावो पेट्रो अमेरिका की ड्रग नीति और लैटिन अमेरिका में उसके दखल के खिलाफ़ रहे हैं। ट्रंप का आरोप है कि कोलंबिया में ड्रग्स का प्रोडक्शन बढ़ रहा है और सरकार आंखें मूंदे बैठी है। असल वजह ये भी है कि पेट्रो की वामपंथी सरकार अमेरिका की बजाय अपने पड़ोसियों देशों के साथ मिलकर क्षेत्र की राजनीति, अर्थव्यवस्था और सुरक्षा से जुड़े फैसले खुद करना पसंद करती है और सामाजिक सुधारों पर ज़ोर देती है, जो ट्रंप की “अमेरिका फर्स्ट” नीति से टकराता है।

क्यूबा में समाजवादी मॉडल को खत्म करने की कोशिश

क्यूबा लंबे समय से अमेरिकी निशाने पर रहा है। ट्रंप क्यूबा को “फेलिंग नेशन” बताते हैं। वेनेज़ुएला से सस्ती ऊर्जा मिलने के चलते क्यूबा कई सालों तक टिका रहा, लेकिन अब ट्रंप प्रशासन मानता है कि दबाव बढ़ाकर समाजवादी शासन को कमजोर किया जा सकता है। यहां मकसद सिर्फ क्यूबा नहीं, बल्कि पूरे लैटिन अमेरिका को यह संदेश देना है कि समाजवादी सरकारों को कीमत चुकानी पड़ेगी।

मैक्सिको के ड्रग कार्टेल्स और अमेरिका की घरेलू राजनीति

मैक्सिको को लेकर ट्रंप का रुख दोहरा है। एक तरफ वे ड्रग कार्टेल्स को अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बताते हैं,दूसरी तरफ यह मुद्दा उनके घरेलू वोट बैंक से भी जुड़ा है। ट्रंप जानते हैं कि मैक्सिको सीमा,ड्रग्स और अवैध प्रवासी जैसे मुद्दे अमेरिकी चुनावों में बड़ा असर डालते हैं। सैन्य कार्रवाई की धमकी देकर वो मैक्सिको पर दबाव भी बनाते हैं और अपने समर्थकों को सख्त छवि भी दिखाते हैं।

ग्रीनलैंड पर भी है ट्रंप की नजर

ट्रंप की दखअंदाज़ी सिर्फ लैटिन अमेरिकी देशों तक ही सीमित नहीं है बल्कि ऐसे कई देशों में भी है,जहां उसका निजी हित सबसे ऊपर है। अमेरिका की नजर उसके पड़ोसी देश ग्रीनलैंड पर भी है। प ने ग्रीनलैंड पर कब्जे को अमेरिका की सुरक्षा के लिए बेहद जरूरी बताया है। ग्रीनलैंड आर्कटिक क्षेत्र में मौजूद है, जहां ट्रंप के मुताबिक चीन और रूस अपनी मौजूदगी बढ़ा रहे हैं। ट्रंप मानते हैं कि अगर अमेरिका यहां प्रभाव नहीं बढ़ाता तो भविष्य में सामरिक संतुलन बिगड़ सकता है। खनिज संसाधन और सैन्य ठिकानों की संभावना भी इसकी बड़ी वजह है। फिलहाल ग्रीनलैंड पर डेनमार्क का नियंत्रण है,जो NATO का भी सदस्य है,लेकिन ट्रंप इससे बेफिक्र होकर लगातार ग्रीनलैंड पर कब्ज़े को लेकर बयानबाज़ी कर रहे हैं। ग्रीनलैंड की करीब 57 हजार आबादी में से ज्यादातर लोग डेनमार्क से आजादी चाहते हैं, लेकिन अमेरिका का हिस्सा बनना नहीं चाहते।

ईरान पर अमेरिका बना रहा है दबाव

ईरान को लेकर ट्रंप की नीति पुरानी है—ज़्यादा से ज़्यादा दबाव बनाना। ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शनों के बीच ट्रंप ने खुली चेतावनी देकर ये संकेत दिया कि अमेरिका शासन परिवर्तन की संभावना से इंकार नहीं करता, इसके अलावा ट्रंप प्रदर्शकारियों का साथ देते हुए भी दिखाई दे रहे हैं। इसका मकसद पश्चिम एशिया में अमेरिकी ठसक बनाए रखना और तेल आपूर्ति मार्गों पर नियंत्रण रखना है। वेनेज़ुएला के बाद ट्रंप के बयानों ने यह साफ कर दिया है कि अमेरिका अब कूटनीति से ज़्यादा दबाव और ताकत की भाषा बोल रहा है। दरअसल ट्रंप की ये रणनीति तीन आधारों पर टिकी है—पहला, अमेरिकी आर्थिक हित, खासकर तेल और संसाधन, दूसरा, चीन और रूस के प्रभाव को रोकना और तीसरा, घरेलू राजनीति, जहां सख्त विदेश नीति उन्हें मजबूत नेता के तौर पर पेश करती है।

क्या है भारत का रुख

भारत ने वेनेजुएला में हो रहे घटनाक्रम पर गहरी चिंता जताई है। विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में कहा है कि भारत सरकार हालात पर करीबी नजर रखे हुए है। भारत ने सभी संबंधित पक्षों से बातचीत और कूटनीति का रास्ता अपनाने की अपील की है। बयान में कहा गया है कि भारत वेनेजुएला के लोगों के कल्याण और सुरक्षा के प्रति अपना समर्थन दोहराता है। हम सभी संबंधित पक्षों से अपील करते हैं कि वो शांति और स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए बातचीत के जरिए मुद्दों का शांतिपूर्ण समाधान करें। इसके अलावा वेनेजुएला में रहने वाले भारतीयों को सरकार ने एडवायजरी भी जारी की है। भारत सरकार ने वेनेजुएला में भारतीय नागरिकों को सख्त सलाह दी है कि वो वेनेजुएला की सभी गैर-जरूरी यात्राओं से बचें। आपातकालीन स्थिति में हेल्पलाइन पर संपर्क करें।

वेनेजुएला क्यों है खास?

वेनेजुएला में अमेरिका का एक्शन से दुनियाभर में टेंशन बढ़ गई है। आखिर वेनेजुएला क्यों है खास और इसका क्या है महत्व? इस पर नजर डालें तो वेनेजुएला के पास तेल का सबसे बड़ा भंडार है। वेनेजुएला के पास 303 बिलियन बैरल तेल का भंडार है। वेनेजुएला के रिजर्व का मौजूदा भाव $17 ट्रिलियन है। प्रतिबंधों से मौजूदा ग्लोबल उत्पादन में 1% हिस्सेदारी है। यहां गोल्ड, रेयर अर्थ मिनिरल के महत्वपूर्ण भंडार मौजूद हैं। वेनेजुएला में 200 ट्रिलियन क्यूबिक फीट नैचुरल गैस के भंडार हैं। नैचुरल गैस के भंडार का बाजार भाव $800 बिलियन है।

 

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