युद्ध के बीच जब USS अब्राहम लिंकन और नन्हे विमान में छिड़ गई 'जुबानी जंग', जानिए सैम रदरफोर्ड की 'सीधे मौत' से हुए सामने की पूरी कहानी

Middle East War-Piper PA-28: सैम के सामने सबसे बड़ी मुसीबत तब आई जब अमेरिकी नेवी ने सैम से संपर्क करना चाहा, लेकिन रेडियो में तकनीकी खराबी के कारण उन्हें सैम की आवाज सुनाई ही नहीं दे रही थी। सैम के विमान के नीचे समुद्र में USS अब्राहम लिंकन तैनात था, जिस पर 5,000 सैनिक और 75 लड़ाकू विमान मौजूद थे

अपडेटेड Apr 13, 2026 पर 1:22 PM
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जब सैम UAE के ऊपर उड़ान भर रहे थे, तभी अमेरिका और इजरायल का ईरान के साथ युद्ध शुरू हो गया

Middle East War: कल्पना कीजिए कि आप 10,000 फीट की ऊंचाई पर अपने छोटे से सिंगल-इंजन प्लेन में मजे से उड़ रहे हैं, स्पीकर पर हल्के-फुल्के गाने बज रहे हैं और तभी अचानक रेडियो पर एक ऐसी आवाज आती है जिससे आपके होश उड़ जाते हैं। ऐसा ही एक वाकया हुआ ब्रिटिश पायलट सैम रदरफोर्ड के साथ। जब वो अरब सागर में उड़ान भर रहे थे तभी उन्हे रेडियो पर मैसेज मिला, 'आप एक वॉरशिप की ओर बढ़ रहे हैं, तुरंत अपनी पहचान बताएं!' सैम के लिए यह कोई सपना नहीं, बल्कि एक ऐसी हकीकत थी जिसने उनकी सांसें थाम दीं।

सैम रदरफोर्ड फ्लोरिडा से एक छोटा पाइपर PA-28 (Piper PA-28) प्लेन लेकर भारत जा रहे थे। यह प्लेन अहमदाबाद के एक फ्लाइट स्कूल को डिलीवर किया जाना था। जब वे UAE के ऊपर थे, तभी अमेरिका और इजरायल का ईरान के साथ युद्ध शुरू हो गया। यह एक ऐसी रोमांचक और डरावनी घटना की शुरुआत थी, जिसने एक नन्हे विमान को दुनिया के सबसे शक्तिशाली परमाणु संचालित विमानवाहक पोत USS अब्राहम लिंकन के सामने खड़ा कर दिया। आइए आपको बताते हैं इस दिलचस्प घटना की पूरी कहानी।

USS अब्राहम लिंकन USS अब्राहम लिंकन


गानों का शोर के बीच फाइटर जेट की एंट्री

सैम और उनके साथी शैनन वोंग मजे से अरब सागर के ऊपर से गुजर रहे थे। तभी अचानक उनके कॉकपिट की खिड़की के बाहर कुछ ऐसा दिखा जिसे देखकर किसी के भी पसीने छूट जाएं। दुनिया का सबसे आधुनिक लड़ाकू विमान F/A-18 हॉर्नेट उनके नन्हे 'पाइपर' विमान के पंखों के पास मंडरा रहा था। यह ऐसा था जैसे किसी चींटी के बगल में एक बाज शिकार के लिए तैयार खड़ा हो।

रेडियो ने दिया धोखा जिससे बढ़ी मुश्किलें

सबसे बड़ी मुसीबत तब आई जब अमेरिकी नेवी ने सैम से संपर्क करना चाहा, लेकिन रेडियो में तकनीकी खराबी के कारण उन्हें सैम की आवाज सुनाई ही नहीं दे रही थी। सैम के विमान के नीचे समुद्र में USS अब्राहम लिंकन तैनात था, जिस पर 5,000 सैनिक और 75 लड़ाकू विमान मौजूद थे। यह ऐसा मौका था जब एक छोटी सी गलतफहमी से सैम का विमान पल भर में धुएं का गुबार बन सकता था।

'गेट द हेल आउट ऑफ डॉज'

जब आखिरकार रेडियो ठीक हुआ, तो अमेरिकी पायलट ने सख्त लहजे में आदेश दिया, 'अपना रास्ता 15 डिग्री बदलो!' इस दौरान सैम के सामने आगे कुआं और पीछे खाई वाली स्थित थी। क्योंकि अगर वो साउथ में मुड़ते, तो बीच समंदर उनका ईंधन खत्म हो जाता और अगर उत्तर मुड़ते, तो ईरान या पाकिस्तान की मिसाइलें उन्हें उड़ा देतीं। सैम एक अनुभवी पायलट थे, इस मुश्किल परिस्थित में उन्होंने ठंडे दिमाग से काम लिया।

सैम ने इस बातचीत को याद करते हुए कहा, 'यह बिल्कुल वैसा ही था जैसे मोरक्को के बाजार में किसी कालीन की कीमत को लेकर मोलभाव किया जाता है।' उन्होंने अमेरिकी पायलट को समझाते हुए कहा, 'दोस्त, अगर तुम्हारी बात मानी तो मैं सीधा समंदर में गिरूंगा।'

मौत के साये के बीच 30 मिनट का 'डेडली' डांस

दो अमेरिकी फाइटर जेट्स ने अगले 30 मिनट तक सैम के प्लेन के चारों तरफ चक्कर काटे। यह आसमान में हो रहा एक 'खतरनाक डांस' था, क्योंकि फाइटर जेट्स को सैम के प्लेन की धीमी रफ्तार के साथ चलने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ रही थी। अमेरिकी नेवी कोई चांस नहीं लेना चाहती थी। वे यह सुनिश्चित करना चाहते थे कि यह छोटा प्लेन अचानक नीचे झुककर उनके एयरक्राफ्ट कैरियर पर कोई 'आक्रामक हमला' न कर दे। जब सैम का विमान USS अब्राहम लिंकन से सुरक्षित दूरी पर पहुंच गया, तब अमेरिकी पायलटों ने 'शुक्रिया' कहा और वहां से चले गए।

इस खतरनाक वाकये के बीच सैम का ओमान से तुरंत निकलने का फैसला सही साबित हुआ। उनके निकलने के महज 3 घंटे बाद ईरान ने ओमान पर हमला कर दिया। सैम ने न सिर्फ अपनी जान बचाई बल्कि उस 'नन्हे परिंदे' को भी सही-सलामत अहमदाबाद के फ्लाइट स्कूल तक पहुंचाया।

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