Black Sea Deal: क्या है ब्लैक सी डील, जिसे करा कर बहुत खुश है अमेरिका, यूक्रेन भी राजी, लेकिन रूस फंसा रहा पेंच!

Russia Ukraine War: काला सागर समझौता (Black Sea Deal) अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के युद्ध को खत्म करने की कोशिशों में अगला कदम है। हालांकि, कुछ लोगों का मानना ​​है कि ट्रंप की टीम ने क्रेमलिन को नौसैनिक युद्ध विराम स्वीकार करने के लिए राजी करने की कोशिश में और ज्यादा रियायतें देने की पेशकश की

अपडेटेड Mar 26, 2025 पर 2:41 PM
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Black Sea Deal: क्या है ब्लैक सी डील, जिसे करा कर बहुत खुश है अमेरिका, यूक्रेन तो है राजी, लेकिन रूस फंसा रहा पेंच!

1,126 दिनों के बाद रूस-यूक्रेन युद्ध में बड़ा पॉजिटिव बदलाव देखने को मिला है। मंगलवार (26 मार्च) को व्हाइट हाउस ने कहा कि सऊदी अरब में तीन दिनों की बातचीत के बाद रूस और यूक्रेन ने काला सागर (Black Sea) में नौसैनिक युद्ध विराम पर सहमति जताई है। आधिकारिक बयान में, व्हाइट हाउस ने कहा कि कीव और मॉस्को ने “सेफ नेविगेशन करने, बल के प्रयोग न करने और ब्लैक सी में सैन्य मकसदों के लिए कमर्शियल जहाजों के इस्तेमाल को रोकने” पर सहमति जताई है। अमेरिका ने कहा कि वह दोनों देशों में एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमले पर रोक लगाने के तरीकों पर भी विचार करेगा।

काला सागर समझौता (Black Sea Deal) अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के युद्ध को खत्म करने की कोशिशों में अगला कदम है। हालांकि, कुछ लोगों का मानना ​​है कि ट्रंप की टीम ने क्रेमलिन को नौसैनिक युद्ध विराम स्वीकार करने के लिए राजी करने की कोशिश में और ज्यादा रियायतें देने की पेशकश की।

क्या है ब्लैक सी डील?


रूस और यूक्रेन के साथ अमेरिका के साइन किए गए अलग-अलग समझौतों के अनुसार, इसमें शामिल पक्ष ब्लैक सी में सुरक्षित नेविगेशन पर सहमत हुए हैं, जो इस हफ्ते बातचीत का मेन फोकस रहा।

इस पर बोलते हुए, यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की ने मीडिया से कहा, "हम पहले इस बात पर सहमत हुए थे कि समुद्र में शांति और फ्री नेविगेशन हो सकता है। दूसरा प्वाइंट एनर्जी सिस्टम पर हमलों को रोकना है।"

Financial Times के मुताबिक, एक अधिकारी ने कहा कि इस समझौते के तहत कीव रूसी ठिकानों पर "घातक हमले" तुरंत रोक देगा। उन्होंने साफ किया कि समय पर सहमति नहीं बनी है। उन्होंने कहा कि समुद्री युद्ध विराम में “न केवल जहाज” बल्कि यूक्रेन के पोर्ट भी शामिल हैं। हाल के दिनों में ओडेसा और दूसरे ब्लैक सी पोर्ट पर रूसी मिसाइलों और ड्रोन के हमले जारी रहे हैं।

यूक्रेन के रक्षा मंत्री रुस्तम उमरोव ने कहा कि कीव का मानना ​​है कि रूसी सैन्य जहाजों की ब्लैक सी के पूर्वी हिस्से के बाहर किसी भी तरह की गतिविधि इस समझौते की भावना का उल्लंघन होगी। उन्होंने कहा, "इस मामले में, यूक्रेन को आत्मरक्षा के अधिकार का इस्तेमाल करने का पूरा हक होगा।"

नए समझौते के अनुसार, व्हाइट हाउस ने कहा कि यह रूस के एग्रीकल्चर और फर्टिलाइजर एक्सपोर्ट के लिए “वर्ल्ड मार्कट तक पहुंच बहाल करने में मदद करेगा”। यह ध्यान रखना जरूरी है कि वाशिंगटन ने रूस के एग्रीकल्चर प्रोडक्ट पर रोक तो नहीं लगाई, लेकिन उसने मेन इंटरनेशनल पेमेंट गेटवे, SWIFT का एक्सेस काट दिया है।

हालांकि, जेलेंस्की ने इसे "स्थितियों का कमजोर होना" बताया। द गार्जियन ने बताया कि ऐसा इसलिए है, क्योंकि ऐसा लगता है कि वाशिंगटन रूस की आर्थिक स्थिति सुधारने में मदद करेगा, जबकि जमीन और हवाई युद्ध चलता ही रहेगा।

ब्लैक सी डील का एक और पहलू यह है कि अमेरिका जबरन ट्रांसफर किए गए यूक्रेनी बच्चों को वापस भेजने के लिए प्रतिबद्ध रहेगा।

यह डील 2022 में साइन हुई पिछली ब्लैक सी डील की वापसी है, जबकि कमर्शियल जहाजों के सेफ रूट की अनुमति दी गई थी। रूस ने अगले साल इस समझौते से खुद को ये शिकायत करते हुए अलग कर लिया कि उसके अपने फूड और फर्टिलाइजर एक्सपोर्ट में गंभीर रुकावट आ रही हैं।

ब्लैक सी डील कब लागू होगी?

यहीं से असली समस्याएं पैदा होती हैं। कीव ने कहा है कि वह समझौते का तुरंत पालन करेगा, जेलेंस्की ने कहा कि उनका देश समझौते का पालन करेगा, लेकिन रूस के इरादों पर शक जताया है।

उन्होंने कहा, "रूसियों पर कोई भरोसा नहीं है, लेकिन मेरा मानना ​​है कि हम रचनात्मक तरीके से काम करेंगे और अमेरिका-यूक्रेन बैठक के नतीजों को लागू करने में अपनी भूमिका निभाएंगे।"

हालांकि, व्लादिमीर पुतिन ने कहा कि नया युद्धविराम समझौता तभी लागू होगा, जब रूस पर लगे अंतर्राष्ट्रीय प्रतिबंध हटा लिए जाएंगे। क्रेमलिन ने रूसी कृषि बैंक और दूसरे "फूड प्रोडक्ट के इंटरनेशनल ट्रेड में शामिल वित्तीय संस्थानों" पर बैन को हटाने की मांग की और यह तभी हो पाएगा, जब उन्हें SWIFT इंटरनेशनल पेमेंट सिस्टम से दोबारा जोड़ा जाएगा।

मास्को ने आगे कहा कि तुर्की, जिसने दोनों पक्षों के साथ संबंध बनाए रखे हैं, ब्लैक सी की स्थिति पर नजर रख सकता है और एक पश्चिम एशियाई देश एनर्जी डील पर विचार कर सकता है।

इस मौके पर बोलते हुए रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने पश्चिमी देशों पर “नेपोलियन और हिटलर” की तरह रूस को “रोकने” की कोशिश करने का आरोप लगाया।

ब्लैक सी डील का क्या महत्व है?

एक्सपर्ट इस बात से पूरी तरह आश्वस्त नहीं हैं कि यह डील चल रहे युद्ध में बदलाव लाएगी। Sky News के डिफेंस एक्सपर्ट माइकल क्लार्क ने कहा कि यह डील युद्ध को खत्म करने में कोई खास मदद नहीं करेगी। उन्होंने कहा कि यह ऐसा समझौता है जिस पर अमेरिका गर्व कर सकता है, लेकिन इससे यूक्रेन के लिए जमीनी स्तर पर कोई बदलाव नहीं होगा।

उन्होंने बताया, "रूस इस बात से बहुत खुश होगा, क्योंकि वे और ज्यादा जाल में फंसते जाएंगे और अमेरिका को इससे कोई खास फायदा नहीं होगा।"

कुछ और लोगों ने यह भी कहा कि ब्लैक सी डील रूस के लिए फायदेमंद थी, क्योंकि उसे बदले में ज्यादा कुछ नहीं देना पड़ा। जैसा कि सेंटर फॉर यूरोपियन पॉलिसी एनालिसिस थिंक टैंक के निको लैंग ने द टेलीग्राफ को बताया, "रूस पहले ही पश्चिमी काला सागर में हार चुका था और यूक्रेन ने ओडेसा से ट्रेड रूट खोलने के लिए सफलतापूर्वक लड़ाई लड़ी थी। आज के समझौते के साथ, रूस को लगभग कुछ भी नहीं मिलेगा, लेकिन उसे कुछ प्रतिबंधों से राहत मिलेगी और अपनी वॉर मशीन के लिए नई कमाई मिलेगी।"

कुछ ने ब्लैक सी डील पर सवाल उठाते हुए कहा कि इससे रूस को बहुत ज्यादा फायदा मिला है, जो उनके विचार में आक्रामक है। विशेषज्ञों ने आगे कहा कि यह समझौता प्रभावी नहीं हो सकता है, क्योंकि रूस पर प्रतिबंधों में कोई भी राहत यूरोप की ओर से इसी तरह के कदम उठाए जाने पर निर्भर करेगी, जो फिलहाल असंभव लगता है।

अटलांटिक काउंसिल के जियोइकॉनॉमिक्स सेंटर में इकोनॉमिक स्टेटक्राफ्ट इनिशिएटिव की डायरेक्टर किम्बर्ली डोनोवन ने अटलांटिक काउंसिल को बताया, "अगर जिन शर्तों पर सहमति बनी थी, वे प्रतिबंधों को हटाने पर निर्भर हैं, तो अमेरिका को अपने G7 गठबंधन साथियों के साथ समन्वय करने और सामूहिक रूप से आगे बढ़ने के लिए उनकी सहमति लेनी पड़ेगी।"

यह देखना बाकी है कि क्या ब्लैक सी डील लागू होती है और अगर होती है, तो यह कितनी कारगर होती है। जैसा कि यूक्रेन के जेलेंस्की ने कहा, "यह कहना अभी जल्दबाजी होगी कि यह कारगर होगी, लेकिन ये सही मीटिंग, सही निर्णय, सही कदम थे।"

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