दुबई में अमेरिका का मिलिट्री बेस नहीं... फिर वहां ईरान ने क्यों किया हमला? समझिए असली वजह

Iran Israel War: ईरान ने पहले ही साफ कर दिया था कि अगर अमेरिका उस पर हमला करता है, तो मिडिल ईस्ट में मौजूद अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया जाएगा। लेकिनदुबई में औपचारिक अमेरिकी सैन्य बेस नहीं है, फिर भी ईरान ने उसे निशाना बनाया। समझिए हमले के पीछे की असली वजह।

अपडेटेड Mar 01, 2026 पर 6:01 PM
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UAE में बेशक आधिकारिक अमेरिकी सैन्य अड्डा नहीं है, लेकिन वह क्षेत्र में अमेरिकी अभियानों को अहम सुविधाएं देता है।

इजरायल और अमेरिका के संयुक्त हमले से कुछ दिन पहले ही ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने साफ कहा था कि अगर अमेरिका उस पर हमला करता है, तो मिडिल ईस्ट में मौजूद अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया जाएगा।

शनिवार को जब संयुक्त सैन्य कार्रवाई हुई, तो ईरान ने जवाबी हमले शुरू कर दिए। कतर, बहरीन, जॉर्डन और कुवैत में हमले किए गए। इन सभी देशों में अमेरिकी सैन्य ठिकाने मौजूद हैं। लेकिन, दुबई पर हमले ने सबको चौंका दिया, क्योंकि वहां कोई अमेरिकी सैन्य ठिकाना नहीं है।

दुबई पर भी हमला क्यों?


ईरान ने संयुक्त अरब अमीरात यानी UAE को भी निशाना बनाया, जबकि वहां औपचारिक रूप से कोई घोषित अमेरिकी सैन्य बेस नहीं है। मिसाइल और ड्रोन हमलों में दुबई के कई प्रमुख स्थान प्रभावित हुए। इनमें जेबेल अली पोर्ट, जुमेराह इलाके का पाल के आकार वाला बुर्ज अल अरब होटल, दुबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट और पाम जुमेराह शामिल हैं।

UAE में बेशक आधिकारिक अमेरिकी सैन्य अड्डा नहीं है, लेकिन वह क्षेत्र में अमेरिकी अभियानों को अहम सुविधाएं देता है।

अल धाफरा एयर बेस की भूमिका

अबू धाबी के दक्षिण में स्थित अल धाफरा एयर बेस अमेरिकी वायु सेना का महत्वपूर्ण केंद्र है। यह बेस UAE एयर फोर्स के साथ साझा किया जाता है। अमेरिकी एयर फोर्स सेंट्रल कमांड के मुताबिक, यहां से इस्लामिक स्टेट के खिलाफ अभियान चलाए गए हैं और पूरे क्षेत्र में निगरानी मिशन संचालित किए जाते हैं।

जेबेल अली पोर्ट क्यों अहम है

दुबई का जेबेल अली पोर्ट भले ही आधिकारिक सैन्य बेस नहीं है, लेकिन यह मिडिल ईस्ट में अमेरिकी नौसेना का सबसे बड़ा पोर्ट ऑफ कॉल है। यहां अक्सर अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर और अन्य नौसैनिक जहाज आते-जाते रहते हैं। यही वजह है कि इसे रणनीतिक रूप से अहम माना जाता है।

मिडिल ईस्ट में कहां-कहां हैं अमेरिकी ठिकाने

अमेरिका बहरीन, कतर, कुवैत, सऊदी अरब, जॉर्डन और इराक में सैन्य ठिकाने ऑपरेट करता है। बहरीन में अमेरिकी नौसेना के फिफ्थ फ्लीट का मुख्यालय है। यह खाड़ी, लाल सागर, अरब सागर और हिंद महासागर के कुछ हिस्सों में सैन्य संचालन की निगरानी करता है।

कतर में दोहा के बाहर स्थित 24 हेक्टेयर में फैला अल उदैद एयर बेस अमेरिकी सेंट्रल कमांड का अग्रिम मुख्यालय है। यहां से मिस्र से लेकर कजाकिस्तान तक अभियानों का संचालन होता है। इस बेस पर करीब 10,000 सैनिक तैनात हैं और यह मिडिल ईस्ट में अमेरिका का सबसे बड़ा सैन्य ठिकाना है।

कुवैत में कैंप अरीफजान अमेरिकी आर्मी सेंट्रल का अग्रिम मुख्यालय है। अली अल सलेम एयर बेस, जो इराक सीमा से करीब 40 किलोमीटर दूर है, भी अहम ठिकाना है। 2003 के इराक युद्ध के दौरान स्थापित कैंप ब्यूहरिंग, इराक और सीरिया में तैनाती से पहले अमेरिकी सैनिकों के लिए स्टेजिंग पॉइंट का काम करता है।

इराक और कुर्दिस्तान में अमेरिकी मौजूदगी

इराक के अनबार प्रांत में ऐन अल असद एयर बेस अमेरिकी उपस्थिति का बड़ा केंद्र है। यह इराकी सुरक्षा बलों को समर्थन देता है और NATO मिशन में योगदान करता है। 2020 में अमेरिकी हमले में ईरानी जनरल कासिम सुलेमानी की मौत के बाद ईरान ने इसी बेस पर मिसाइल हमला किया था।

उत्तरी इराक के कुर्दिस्तान क्षेत्र में एरबिल एयर बेस अमेरिकी और सहयोगी बलों के लिए प्रशिक्षण, खुफिया साझेदारी और लॉजिस्टिक का केंद्र है।

सऊदी अरब और जॉर्डन में तैनाती

सऊदी अरब में भी अमेरिकी सैनिक तैनात हैं। 2024 में व्हाइट हाउस द्वारा जारी जानकारी के अनुसार वहां 2,321 अमेरिकी सैनिक मौजूद हैं। इनमें से कुछ रियाद से लगभग 60 किलोमीटर दक्षिण में स्थित प्रिंस सुल्तान एयर बेस पर तैनात हैं। यह बेस पैट्रियट मिसाइल सिस्टम, टर्मिनल हाई एल्टीट्यूड एरिया डिफेंस सिस्टम और अमेरिकी सैन्य विमानों के संचालन को समर्थन देता है।

जॉर्डन में अम्मान से लगभग 100 किलोमीटर उत्तर-पूर्व में स्थित मुवाफ्फाक अल सल्ती एयर बेस अमेरिकी एयर फोर्स सेंट्रल की 332वीं एयर एक्सपेडिशनरी विंग का ठिकाना है। यहां से लेवांत क्षेत्र में मिशन संचालित किए जाते हैं।

कुल मिलाकर, ईरान का जवाबी हमला केवल प्रतिशोध नहीं था। उसने उन सभी ठिकानों और सुविधाओं को निशाना बनाया जिन्हें वह अमेरिकी सैन्य ढांचे का हिस्सा मानता है, भले ही वे औपचारिक सैन्य अड्डे न हों।

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