मध्य प्रदेश के विंध्य क्षेत्र में आज भी कई ऐसे इलाके हैं, जहां पारंपरिक फसलें उगाना कठिन साबित होता है। खासकर वो भूमि, जिसकी जल धारण क्षमता कम है, किसानों के लिए हमेशा चुनौती बनी रहती है। ऐसी बंजर जमीन पर खेती करना मुश्किल होता है और आम फसलों से पर्याप्त मुनाफा भी नहीं मिलता। लेकिन अब बांस की खेती इस चुनौती को अवसर में बदल सकती है। बांस की फसल न केवल कम पानी में उगती है, बल्कि इसका बाजार भी सुनिश्चित है। सीधी जिले के पास शहडोल जिले में बड़ी पेपर मिल मौजूद है, जो बांस की बड़ी मात्रा खरीदती है।
इसका मतलब है कि किसानों को बांस की बिक्री में किसी तरह की परेशानी नहीं होती। इससे न केवल बंजर भूमि का उपयोग बढ़ेगा, बल्कि किसानों को स्थायी और लाभकारी आय का स्रोत भी मिलेगा। बांस की खेती लंबे समय तक कमाई देने वाली फसल बनकर उभर रही है।
बांस की खेती का सही समय और तरीका
कृषि विशेषज्ञ राजेश सिंह लोकल 18 से बात करते हुए बताते हैं कि, बांस की खेती के लिए जुलाई-अगस्त का समय सबसे उपयुक्त माना जाता है। इस दौरान पौधों को पर्याप्त नमी और पोषण मिलता है, जिससे उनकी बढ़त तेज होती है। खेती के लिए ऐसी मिट्टी सबसे बेहतर रहती है जिसमें रेत, कंकड़ या पत्थर मौजूद हों और जल निकासी अच्छी हो।
खेत की तैयारी और पौधरोपण की विधि
जून महीने में खेत की तैयारी करनी चाहिए। इसके लिए गड्ढे खोदकर उन्हें धूप में छोड़ना चाहिए ताकि रोगाणु नष्ट हो जाएं। पौधरोपण करते समय गड्ढों में गोबर खाद और मिट्टी मिलाकर भरना चाहिए। एक एकड़ में 800 से 1000 बांस के पौधे लगाने की जरूरत होती है। 100 ग्राम बीज से लगभग 500 पौधे तैयार किए जा सकते हैं। पौधों के बीच 3×4 मीटर की दूरी रखनी चाहिए, ताकि बढ़ने पर उन्हें पर्याप्त जगह मिल सके।
बांस की फसल से लंबे समय तक कमाई
बांस की फसल सबसे खास इसलिए है क्योंकि ये सिर्फ एक बार मेहनत मांगती है, लेकिन सालों तक कमाई देती रहती है। लगभग 5 साल बाद पहली कटाई होती है। प्रति एकड़ 50 से 60 टन उत्पादन मिलता है, जिससे किसान हर साल करीब एक लाख रुपये तक कमा सकते हैं।
सरकारी अनुदान से किसानों को बड़ी मदद
राजेश सिंह बताते हैं कि प्रदेश सरकार के राष्ट्रीय बांस मिशन योजना के तहत किसानों को कुल लागत का 50% अनुदान मिलता है। ये अनुदान तीन साल की किस्तों में प्रदान किया जाता है, जिससे किसानों की आर्थिक जोखिम कम होती है और बांस की खेती करना और भी लाभकारी बन जाता है।