भारत एक कृषि प्रधान देश है, जहां ज्यादातर आबादी की आजीविका खेती-किसानी पर निर्भर करती है। हालांकि कई लोग अब खेती नहीं करना चाहते, लेकिन उनके पास सीमित विकल्प होने के कारण ये ही मुख्य रोजगार बनकर रह जाता है। पहले के मुकाबले आज मशीनी युग में खेती काफी आसान हो गई है। नए यंत्र और आधुनिक उपकरण किसानों का समय बचाते हैं, मेहनत कम लगती है और उत्पादन में भी बढ़ोतरी होती है। युवा अब नौकरी या कृषि शिक्षा के अनुभव के बाद आधुनिक तरीकों से खेती में उतर रहे हैं। बिहार में भी पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश की तरह नई तकनीकों के जरिए खेती शुरू हो गई है।
राज्य में कई तरह की मशीनें किसानों की मदद कर रही हैं और सरकार भी मशीन खरीदने पर सब्सिडी दे रही है। इससे किसान कम लागत में उपकरण खरीदकर खेती कर अपनी आय बढ़ा सकते हैं। इस बदलाव से खेती न केवल आसान बल्कि अधिक लाभकारी बन गई है।
प्रदेश में कई ऐसी मशीनें उपलब्ध हैं जो किसानों की मेहनत को कम कर रही हैं। सरकार भी किसानों को मशीनें खरीदने में मदद कर रही है। किसानों को मशीनें खरीदने पर सब्सिडी दी जाती है, जिससे उनकी लागत कम हो जाती है और वे आसानी से खेती कर अपनी आय बढ़ा सकते हैं।
हैप्पी सीडर मशीन का महत्व
हैप्पी सीडर मशीन किसानों के लिए विशेष रूप से फायदेमंद है। कृषि विज्ञान केंद्र, गंधार (जहानाबाद) के कृषि यंत्र एक्सपर्ट इंजीनियर जितेंद्र कुमार के अनुसार, आधुनिक यंत्रों की वजह से खेती अब काफी आसान हो गई है। सरकार किसानों को 40% से 80% तक अनुदान के रूप में सब्सिडी भी देती है।
हैप्पी सीडर मशीन से क्या संभव
हैप्पी सीडर मशीन की मदद से गेहूं, मसूर, सरसों सहित कई अन्य फसलों की बुवाई की जा सकती है। यह मशीन किसानों का समय बचाती है, मेहनत कम करती है और खेती के काम को बहुत सरल बनाती है।