मार्च से अप्रैल का समय आम के बागों के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। इसी दौरान पेड़ों पर आए बौर धीरे-धीरे छोटे फलों यानी टिकोले में बदलने लगते हैं। यह वह चरण होता है जब किसान अपनी अच्छी पैदावार की उम्मीद लगाते हैं। लेकिन कई बार देखने को मिलता है कि फल बनने के बाद भी टिकोले समय से पहले गिरने लगते हैं या उनका आकार छोटा ही रह जाता है। ऐसी स्थिति में किसानों को काफी चिंता होने लगती है, क्योंकि इसका सीधा असर उत्पादन पर पड़ता है। दरअसल, इस समस्या के पीछे कई छोटे-छोटे कारण हो सकते हैं, जैसे पौधों की सही देखभाल न होना, कीटों का प्रकोप या जरूरी पोषण की कमी।
