समस्तीपुर, बिहार के कृषि अनुसंधान संस्थान द्वारा विकसित यह खास किस्म का पपीता इन दिनों किसानों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। इसका आकार और वजन सामान्य पपीते की तुलना में काफी बड़ा होता है, जिससे बाजार में इसकी अलग पहचान बनती है। बड़े साइज और बेहतर गुणवत्ता के कारण इसकी मांग भी ज्यादा रहती है और कीमत भी आम पपीते से अधिक मिलती है। यही वजह है कि किसान इसे अपनी आय बढ़ाने के बेहतर विकल्प के रूप में देख रहे हैं।
