Get App

दोगुना वजन, चार गुना फायदा! ये पपीता बदल देगा खेती का खेल

दिल्ली स्थित भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान में चल रहे पूसा कृषि विज्ञान मेले में इस बार समस्तीपुर, बिहार का खास पपीता आकर्षण का केंद्र बना। अपने अनोखे आकार और रंग के कारण यह सबसे ज्यादा चर्चा में रहा। यह खास किस्म किसानों की आमदनी बढ़ाने में मददगार मानी जा रही है

Edited By: Anchal Jhaअपडेटेड Mar 21, 2026 पर 12:02 PM
दोगुना वजन, चार गुना फायदा! ये पपीता बदल देगा खेती का खेल
इस पपीते की मांग पूरे साल बनी रहती है

समस्तीपुर, बिहार के कृषि अनुसंधान संस्थान द्वारा विकसित यह खास किस्म का पपीता इन दिनों किसानों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। इसका आकार और वजन सामान्य पपीते की तुलना में काफी बड़ा होता है, जिससे बाजार में इसकी अलग पहचान बनती है। बड़े साइज और बेहतर गुणवत्ता के कारण इसकी मांग भी ज्यादा रहती है और कीमत भी आम पपीते से अधिक मिलती है। यही वजह है कि किसान इसे अपनी आय बढ़ाने के बेहतर विकल्प के रूप में देख रहे हैं।

ये नई किस्म न सिर्फ उत्पादन के लिहाज से फायदेमंद है, बल्कि कम समय में ज्यादा मुनाफा देने की क्षमता भी रखती है। अगर सही तरीके से इसकी खेती की जाए, तो यह किसानों के लिए कम लागत में बेहतर कमाई का जरिया बन सकती है

दोगुना वजन, ज्यादा कमाई

यह पपीता सामान्य पपीते के मुकाबले लगभग दोगुना भारी होता है। एक फल का वजन करीब 2.5 से 3 किलो तक होता है। जहां आम पपीता 30–50 रुपये में बिकता है, वहीं इसका एक फल करीब 100 रुपये तक बिक सकता है।

सब समाचार

+ और भी पढ़ें