बागेश्वर के पर्यावरणविद किशन मलड़ा के अनुसार, आम के पेड़ों में बौर आने का समय बेहद नाजुक और अहम माना जाता है। इसी चरण पर तय होता है कि पेड़ पर फल कितनी मात्रा में लगेंगे। इस दौरान मौसम का जरा सा भी बदलाव, जैसे तेज हवा चलना, अचानक बारिश होना या तापमान का ऊपर-नीचे होना, सीधे बौर को प्रभावित कर सकता है। कई बार फूल कमजोर होकर झड़ जाते हैं, जिससे फल बनने की संभावना काफी कम हो जाती है।
