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Agriculture tips: बारिश नहीं हुई तो घबराएं नहीं! इस स्मार्ट सिंचाई से बचाएं चना-मटर की फसल

Agriculture tips: दिसंबर–जनवरी में बारिश न होने से दलहनी फसलों की चिंता बढ़ गई है। आमतौर पर इस मौसम की हल्की वर्षा चना, मसूर और मटर के लिए वरदान मानी जाती है। नमी की कमी से फसल प्रभावित हो सकती है, लेकिन सही सिंचाई तकनीक अपनाकर किसान नुकसान से बच सकते हैं

MoneyControl Newsअपडेटेड Jan 17, 2026 पर 1:43 PM
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इस साल मौसम की बेरुखी ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। दिसंबर और जनवरी जैसे अहम महीनों में बारिश न होने से दलहनी फसलों पर सीधा असर पड़ता दिख रहा है। चना, मसूर और मटर जैसी फसलें आमतौर पर हल्की शीतकालीन वर्षा से नई ऊर्जा पाती हैं, जिससे उनकी बढ़वार और उत्पादन बेहतर होता है। लेकिन इस बार खेतों में नमी की कमी साफ नजर आने लगी है। ऐसे हालात में किसानों के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि बिना बारिश फसलों को कैसे बचाया जाए और नुकसान को कैसे रोका जाए। बदलते मौसम के साथ खेती के तौर-तरीकों में भी समझदारी से बदलाव करना जरूरी हो गया है।

अच्छी बात यह है कि कम पानी और कम लागत में भी दलहनी फसलों को सुरक्षित रखने के व्यावहारिक उपाय मौजूद हैं। सही तकनीक और समय पर किए गए प्रयास किसानों को इस मुश्किल दौर से निकाल सकते हैं और फसलों को सूखे की मार से बचाने में मददगार साबित हो सकते हैं।

दलहनी फसलों की नाजुक जरूरत: ज्यादा पानी नहीं, बस नमी

प्रगतिशील युवा किसान रनजोद सिंह बताते हैं कि दलहनी फसलें भारी सिंचाई की मांग नहीं करतीं। इन्हें केवल हल्की और नियंत्रित नमी चाहिए। अधिक पानी देने से जड़ें कमजोर हो सकती हैं और पौधों की सेहत पर उल्टा असर पड़ता है। ऐसे में सही तकनीक से दी गई हल्की फुहारें ही फसलों के लिए सबसे फायदेमंद साबित होती हैं।

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