इस साल मौसम की बेरुखी ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। दिसंबर और जनवरी जैसे अहम महीनों में बारिश न होने से दलहनी फसलों पर सीधा असर पड़ता दिख रहा है। चना, मसूर और मटर जैसी फसलें आमतौर पर हल्की शीतकालीन वर्षा से नई ऊर्जा पाती हैं, जिससे उनकी बढ़वार और उत्पादन बेहतर होता है। लेकिन इस बार खेतों में नमी की कमी साफ नजर आने लगी है। ऐसे हालात में किसानों के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि बिना बारिश फसलों को कैसे बचाया जाए और नुकसान को कैसे रोका जाए। बदलते मौसम के साथ खेती के तौर-तरीकों में भी समझदारी से बदलाव करना जरूरी हो गया है।
