कई बार हम झगड़े, रिजेक्शन या लोगों की बातों के डर से उन कामों के लिए भी ‘हां’ कह देते हैं, जिन्हें हम करना नहीं चाहते। बाहर से हम खुश दिखते हैं, लेकिन अंदर ही अंदर थकान और स्ट्रेस महसूस करते हैं। गीता की सीख कहती है कि कोई भी फैसला डर की वजह से नहीं, बल्कि सोच-समझकर लेना चाहिए। दूसरों की मदद करना अच्छी बात है, लेकिन हर किसी की हर बात मानना जरूरी नहीं है। अपनी खुशी और मन की शांति के लिए जरूरत पड़ने पर सही जगह ‘ना’ कहना भी सीखना चाहिए।
अपडेटेड Sep 01, 2026 पर 12:13 PM