Budget 2025: हर व्यक्ति के पास होगी लाइफ और हेल्थ पॉलिसी, हॉस्पिटल का बिल चुकाने में नहीं आएगी दिक्कत

सेक्शन 80सी न सिर्फ टैक्सपेयर्स के टैक्स को बोझ को कम करने में मददगार है बल्कि यह लोगों को लंबी अवधि की सेविंग्स और इनवेस्टमेंट के लिए भी प्रोत्साहित करता है। सेक्शन 80सी के तहत कई ऐसे इनवेस्टमेंट और सेविंग्स ऑप्शन आते हैं, जिनमें नियमित रूप से निवेश करने पर लंबी अवधि में बड़ा फंड तैयार हो जाता है

अपडेटेड Jan 08, 2025 पर 2:30 PM
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इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 80सी की लिमिट 1.5 लाख रुपये है। यह लिमिट करीब 10 साल से बढ़ी नहीं है।

हर व्यक्ति के पास लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी और हेल्थ पॉलिसी होगी। सरकार ने इसके लिए ठोस प्लान बनाया है। इसका ऐलान यूनियन बजट 2025 में हो सकता है। दरअसल, सरकार ने 2047 तक यूनिवर्सल इंश्योरेंस कवरेज का टारगेट तय किया है। इसका मतलब है कि सरकार की कोशिश हर व्यक्ति को हेल्थ पॉलिसी और लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी उपलब्ध कराना है। सरकार ने इसके लिए 20247 का टारगेट तय किया है। इंश्योरेंस इंडस्ट्री के एक्सपर्ट्स का कहना है कि इस टारगेट को हासिल करने के लिए बड़े रिफॉर्म्स करने होंगे।

सेक्शन 80सी की लिमिट बढ़ाएगी सरकार

PB Fintech के प्रेसिडेंट राजीव गुप्ता ने कहा कि 1 फरवरी, 2025 को यूनियन बजट में वित्तमंत्री बड़े रिफॉर्म्स का ऐलान कर सकती हैं। उन्होंने कहा, "यह यूनियन बजट फाइनेंशियली सेक्योर्ड और इंश्योर्ड इंडिया बनाने के लिहाज से काफी अहम हो सकता है।" उन्होंने कहा कि इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 80सी की लिमिट 1.5 लाख रुपये है। यह लिमिट करीब 10 साल से बढ़ी नहीं है। बदलते समय के हिसाब से यह लिमिट काफी कम पड़ रही है। इसे तुरंत बढ़ाने की जरूरत है।


सेक्शन 80सी के ये हैं फायदें

टैक्स एक्सपर्ट्स का कहना है कि सेक्शन 80सी न सिर्फ टैक्सपेयर्स के टैक्स को बोझ को कम करने में मददगार है बल्कि यह लोगों को लंबी अवधि की सेविंग्स और इनवेस्टमेंट के लिए भी प्रोत्साहित करता है। सेक्शन 80सी के तहत कई ऐसे इनवेस्टमेंट और सेविंग्स ऑप्शन आते हैं, जिनमें नियमित रूप से निवेश करने पर लंबी अवधि में बड़ा फंड तैयार हो जाता है। PPF और ELSS इसके उदाहरण हैं। दोनों इनवेस्टमेंट के बेस्ट ऑप्शंस में शामिल हैं।

लाइफ पॉलिसी पर डिडक्शन की अलग कैटेगरी

गुप्ता ने बताया कि सरकार टर्म इंश्योरेंस के लिए एक अलग टैक्स एग्जेम्प्शन कैटेगरी का ऐलान कर सकती है। इससे लोगों की दिलचस्पी लाइफ इंश्योरेंस खरीदने में बढ़ेगी। इससे परिवार की आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी। हालांकि, सरकार को रेवेन्यू में थोड़ा नुकसान होगा। लेकिन, इससे परिवारों की इकोनॉमिक सिक्योरिटी बढ़ेगी। इससे वेल्फेयर स्कीम पर लोगों की निर्भरता घटेगी। इससे लंबी अवधि में सरकार को अपना फिस्कल डेफिसिट कम करने में मदद मिलेगी।

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हेल्थ पॉलिसी पर टैक्स छूट बढ़ाने की जरूरत

उन्होंने हेल्थ इंश्योरेंस के प्रीमियम पर डिडक्शन की लिमिट बढ़ाने की सलाह सरकार को दी है। अभी इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 80डी के तहत 60 साल से कम उम्र के लोगों को प्रीमियम में 25,000 रुपये तक का डिडक्शन मिलता है। 60 साल से ज्यादा उम्र के लोगों को 50,000 रुपये का डिडक्शन मिलता है। गुप्ता का कहना है कि सरकार को इस लिमिट को बढ़ाना चाहिए। 60 साल से कम उम्र के लोगों के लिए डिडक्शन की लिमिट 50,000 रुपये होनी चाहिए। 60 साल से ज्यादा उम्र के लोगों के लिए डिडक्शन की लिमिट 1 लाख रुपये होनी चाहिए।

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