ज्यादातार मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि यूनियन बजट 2025 में सरकार की टॉप प्रायरिटी में फिस्कल कंसॉलिडेशन शामिल होगा। इसके लिए सरकार अगले वित्त वर्ष के लिए फिस्कल डेफिसिट का 4.5 फीसदी टारगेट तय कर सकती है। बजट से पहले मनीकंट्रोल के पोल से यह जानकारी मिली है। इस पोल में ब्रोकिंग फर्म, म्यूचुअल फंड्स, एआईएफ, पीएमएस के प्रतिनिधियों के अलावा इंडिपेंडेंट एक्सपर्ट्स ने हिस्सा लिए। पोल में शामिल लोगों का मानना है कि सरकार का फोकस कैपिटल एक्सपेंडिचर पर भी होगा। प्रायरिटी में यह दूसरे पायदान पर होगा।
पूंजीगत खर्च का टारगेट 10 फीसदी बढ़ सकता है
एक्सपर्ट्स का कहना है कि सरकार पूंजीगत खर्च (Capital Expenditure) के टारगेट को 10 फीसदी बढ़ा सकती है। पोल में शामिल दो लोगों का मानना है कि सरकार रिफॉर्म के नए आइडिया पर बजट में फोकस कर सकती है। सरकार कंजम्प्शन बढ़ाने के लिए इनकम टैक्स में छूट बढ़ा सकती है। प्राइवेट इनवेस्टमेंट बढ़ाने के लिए नई स्कीम का ऐलान भी हो सकता है। इस पोल में करीब 45 एक्सपर्ट्स ने हिस्सा लिया। कई ब्रोकरेज फर्मों के प्रतिनिधियों का मानना था कि पब्लिक डेट और जीडीपी का रेशियो हाई होने से फिस्कल कंसॉलिडेशन की सरकार की कोशिश पर खराब असर नहीं पड़ेगा।
फिस्कल डेफिसिट घटाने पर होगा फोकस
पोल में शामिल एक्सपर्ट्स का कहना है कि सरकार FY26 में फिस्कल डेफिसिट का 4.4-4.6 फीसदी टारगेट तय कर सकती है। यह FY25 में फिस्कल डेफिसिट के 4.9 फीसदी टारगेट से कम है। हाल में बैंक ऑफ अमेरिका सिक्योरिटीज ने अपनी रिपोर्ट में लिखा था, "पिछले तीन सालों में सरकार ने ग्रोथ से समझौता किए बगैर फिस्कल कंसॉलिडेशन की कोशिश जारी रखी है। हालांकि, आगे ग्रोथ और फिस्कल कंसॉलिडेशन के बीच संतुलन बैठाने का असर इकोनॉमिक ग्रोथ पर दिख सकता है।"
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रोड, रेलवे और डिफेंस पर होगा फोकस
ब्रोकरेज फर्म यूबीएस ने कैपिटल एक्सपेंडिचर के बारे में कहा है कि कैपिटल एक्सपेंडिचर की ग्रोथ नॉमिनल जीडीपी की 12-14 फीसदी की ग्रोथ से थोड़ी ज्यादा रह सकती है। कैपिटल एक्सपेंडिचर के लिए सरकार का फोकस सड़क एवं हाईवेज, रेलवे और डिफेंस पर रहेगा। सरकार राज्यों को फ्री कैपेक्स लोन भी ऑफर कर सकती है। मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि सरकार को कंजम्प्शन बढ़ाने की जगह परिवारों की इनकम बढ़ाने पर फोकस करना चाहिए।