Budget 2025: सीतारमण के इन उपायों से एनबीएफसी सेक्टर को लग सकते हैं पंख

एफआईडीसी ने सरकार से कॉर्पोरेट बॉन्ड मार्केट के विस्तार के लिए उपाय करने की गुजारिश की है। इससे फंड की जरूरत के लिए बैंकों पर एनबीएफसी की निर्भरता में कमी आएगी। सरकार प्राइमरी और सेकेंडरी मार्केट में लिक्विडिटी बढ़ाने के उपाय कर सकती है

अपडेटेड Jan 03, 2025 पर 5:17 PM
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अभी एनबीएफसी को पूंजी की जरूरत के लिए बैंकों पर निर्भर रहना पड़ता है।

एनबीएफसी सेक्टर को यूनियन बजट 2025 से काफी उम्मीदें हैं। फाइनेंस इंडस्ट्री डेवलपमेंट काउंसिल (एफआईडीसी) ने फाइनेंस मिनिस्ट्री को अपनी उम्मीदों के बारे में बताया। काउंसिल का मानना है कि एनबीएफसी के फंडिंग के स्रोत डायवर्सिफायड होने चाहिए। साथ ही लोन रिकवरी के लिए बेहतर टूल्स की जरूरत है। अगर एनबीएफसी से जुड़े टैक्स के नियमों का आसान बनाया जाता है तो यह सेक्टर तेज ग्रोथ दिखा सकता है।

समर्पित रिफाइनेंस सिस्टम की जरूरत

FIDC ने फाइनेंस मिनिस्ट्री से कहा है कि सरकार को इस सेक्टर के लिए एक समर्पित रिफाइनेंस सिस्टम बनाना चाहिए। सरकार इसके लिए नेशनल हाउसिंग बैंक का मॉडल अपना सकती है। इससे एनबीएफसी को कम इंटरेस्ट रेट और आसान शर्तों पर लोन हासिल करने में मदद मिलेगी। अभी एनबीएफसी को पूंजी की जरूरत के लिए बैंकों पर निर्भर रहना पड़ता है। बैंकों से हासिल लोन पर उन्हें इंटरेस्ट चुकाना पड़ता है। इससे एनबीएफसी के लिए लोन की कॉस्ट बढ़ जाती है।


ग्राहकों का दायरा बढ़ना चाहिए

अभी एनबीएफसी के ग्राहकों का दायरा सीमित है। ज्यादातर एनबीएफसी रिटेल ग्राहकों पर फोकस करती है। पर्याप्त फंड की सुविधा मिलने पर एनबीएफसी MSME, प्रायरिटी सेक्टर, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स और सोलर रूफटॉप के लिए भी लोन ऑफर करने पर फोकस बढ़ा सकती हैं। इससे एनबीएफसी का बिजनेस बढ़ेगा, जिससे उनकी कमाई भी बढ़ेगी। इकोनॉमी के अलग-अलग सेक्टर की लोन की जरूरत पूरी करने में भी एनबीएफसी की बड़ी भूमिका हो सकती है।

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बॉन्ड बाजार के विस्तार से फायदा

एफआईडीसी ने सरकार से कॉर्पोरेट बॉन्ड मार्केट के विस्तार के लिए उपाय करने की गुजारिश की है। इससे फंड की जरूरत के लिए बैंकों पर एनबीएफसी की निर्भरता में कमी आएगी। सरकार प्राइमरी और सेकेंडरी मार्केट में लिक्विडिटी बढ़ाने के उपाय कर सकती है। अभी प्राइमरी और सेकेंडरी बॉन्ड मार्केट में ज्यादातर एएए और एए प्लस बॉन्ड्स का ज्यादा बोलबाला है। सरकार को बॉन्ड की व्यापक रेंज उपलब्ध कराने की कोशिश करनी चाहिए।

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