Budget 2025: टैक्स बेनेफिट बढ़ाने से बैंक एफडी में बढ़ेगी इनवेस्टर्स की दिलचस्पी

सरकार अगर बैंक एफडी से मिलने वाले इंटरेस्ट पर टैक्स का फिक्स्ड रेट लागू करती है तो इससे ज्यादा टैक्स स्लैब में आने वाले लोगों को इंटरेस्ट पर ज्यादा टैक्स नहीं चुकाना होगा। इससे बैंक में पैसा रखने में उनकी दिलचस्पी बढ़ेगी। इससे बैंकों को डिपॉजिट अट्रैक्ट करने में भी मदद मिलेगी

अपडेटेड Jan 03, 2025 पर 6:48 PM
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पिछले कुछ सालों में लोगों की दिलचस्पी बैंक फिक्स्ड डिपॉजिट में घटी है। लोग बैंकों में पैसे रखने की जगह म्यूचुअल फंड्स की स्कीमों में निवेश कर रहे हैं।

वित्तंत्री निर्मला सीतारमण ने यूनियन बजट 2025 से पहले फाइनेंशियल सेक्टर के प्रतिनिधियों से बातचीत की है। फाइनेंशियल सेक्टर खासकर बैंकों के प्रतिनिधियों ने बैंक फिक्स्ड डिपॉजिट पर टैक्स बेनेफिट बढ़ान की मांग की। बैंकों ने डिपॉजिट की सुस्त ग्रोथ को लेकर अपनी चिंता से भी वित्तमंत्री को अवगत कराया। पिछले कुछ सालों में लोगों की दिलचस्पी बैंक फिक्स्ड डिपॉजिट में घटी है। लोग बैंकों में पैसे रखने की जगह म्यूचुअल फंड्स की स्कीमों में निवेश कर रहे हैं।

KYC के नियम आसान बनाने से NRI की बढ़ेगी बैंक डिपॉजिट में दिलचस्पी

बैंकिंग सेक्टर के प्रतिनिधियों ने वित्तमंत्री Nirmala Sitharaman से एनआरआई के लिए केवायसी के नियमों को आसान बनाने की गुजारिश की। एनआरआई अपना काफी पैसा इंडिया में बैंक अकाउंट्स में रखते हैं। केवायसी सहित दूसरे नियमों के आसान होने से बैंकों में पैसा रखने में उनकी दिलचस्पी बढ़ सकती है। बैंकिंग सेक्टर के एक्सपर्ट्स का कहना है कि अभी फिस्क्ड डिपॉजिट से हासिल इंटरेस्ट को रेगुलर इनकम माना जाता है। इससे इंटरेस्ट पर टैक्स चुकाना पड़ता है। अगर इनवेस्टर्स सबसे ज्यादा इनकम टैक्स स्लैब में आता है तो उसे इंटरेस्ट पर ज्यादा रेट से टैक्स चुकाना पड़ता है।


बैंक एफडी के इंटरेस्ट पर टैक्स के नियमों में बदलाव की जरूरत

सरकार अगर बैंक एफडी से मिलने वाले इंटरेस्ट पर टैक्स का फिक्स्ड रेट लागू करती है तो इससे ज्यादा टैक्स स्लैब में आने वाले लोगों को इंटरेस्ट पर ज्यादा टैक्स नहीं चुकाना होगा। इससे बैंक में पैसा रखने में उनकी दिलचस्पी बढ़ेगी। इससे बैंकों को डिपॉजिट अट्रैक्ट करने में भी मदद मिलेगी। बैंकिंग इंडस्ट्री के लिए डिपॉजिट की सुस्त ग्रोथ चिंता का विषय है। आरबीआई ने भी बैंकों को डिपॉजिट ग्रोथ बढ़ाने के लिए इनोवेटिव प्रोडक्ट्स लॉन्च करने की सलाह दी है।

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टैक्स-सेविंग्स एफडी का लॉक-इन पीरियड घटाने की सलाह

एक प्राइवेट बैंक के सीनियर एग्जिक्यूटिव ने कहा कि इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 80सी के तहत टैक्स-सेविंग्स बैंक एफडी भी आता है। लेकिन, इसमें लॉक-इन पीरियड 5 साल है। सरकार इस लॉक-इन पीरियड को घटाकर 3 साल कर सकती है। इससे भी बैंक एफडी में निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ेगी। म्यूचुअल फंड्स की टैक्स-सेविंग्स स्कीम में लॉक-इन पीरियड 3 साल है। इसलिए टैक्सपेयर्स टैक्स-सेविंग्स के लिए म्यूचुअल फंड की टैक्स-सेविंग्स स्कीम में निवेश करने में ज्यादा दिलचस्पी दिखाते हैं।

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