वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ऐसे वक्त यूनियन बजट 2025 पेश करने जा रही हैं, जब इकोनॉमी की ग्रोथ सुस्त पड़ गई है। इस वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में जीडीपी ग्रोथ सिर्फ 5.4 फीसदी रही। सरकार इकोनॉमी में स्लोडाउन के संकेत से चिंतित है। अगर जल्द जीडीपी ग्रोथ नहीं बढ़ती है तो साल 2047 तक भारत को विकसित देश बनाने का टारगेट पूरा नहीं होगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ मीटिंग में इकोनॉमिस्ट्स ने सरकार को कंजम्प्शन बढ़ाने की सलाह दी थी। उनका मानना है कि कंजम्प्शन बढ़ने से इकोनॉमी की ग्रोथ बढ़ेगी। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी को इसके लिए बड़े ऐलान कर सकती हैं।
पूंजीगत खर्च 10-15 फीसदी बढ़ाना होगा
एक्सिस बैंक में चीफ इकोनॉमिस्ट नीलकंठ मिश्रा ने कहा कि इकोनॉमिक ग्रोथ बढ़ाने में प्राइवेट सेक्टर की बड़ी भूमिका हो सकती है। हालांकि, सरकार ने पिछले कुछ सालों में लगातार पूंजीगत खर्च बढ़ाया है। उम्मीद है कि पूंजीगत खर्च पर सरकार का फोकस आगे भी बना रहेगा। उन्होंने कहा कि सरकार को इकोनॉमी ग्रोथ बढ़ाने के लिए इनकम टैक्स घटाने से पहले कैपिटल एक्सपेंडिचर बढ़ाने पर फोकस करने की जरूरत है।
टैक्स फ्रेमवर्क में स्टैबिलिटी जरूरी है
उन्होंने कहा कि सरकार के पास अतिरिक्त 80,000 से एक लाख करोड़ रुपये तक खर्च करने की गुंजाइश है। अगर सरकार रेवेन्यू का बड़ा हिस्सा पूंजीगत खर्च के लिए इस्तेमाल करती है तो इसके पॉजिटिव असर दिखते हैं। उन्होंने कहा कि इनकम टैक्स में 5-15 बेसिस प्वाइंट्स की कमी का जीडीपी ग्रोथ पर ज्यादा असर नहीं पड़ेगा। सरकार को ऐसा टैक्स फ्रेमवर्क बनाने की जरूरत है, जिसमें स्टैबिलिटी हो। उन्होंने कहा कि वियतनाम जैसे देशों से जब इंडिया की तुलना होती है तो सबसे ज्यादा आलोचना इंडिया में टैक्स रेट्स में बदलाव की होती है। सरकार ने जुलाई में कैपिटल गेंस के नियमों में बदलाव किया था। फिर, उनमें फरवरी में बदलाव करना ठीक रहेगा?
पीएलआई स्कीम का दायरा बढ़ाना होगा
इंडस्ट्री के प्रतिनिधियों का मानना है कि इकोनॉमी ग्रोथ बढ़ाने के लिए सरकार को पीएलआई स्कीम का दायरा बढ़ाना चाहिए। अभी इस स्कीम के तहत 14 सेक्टर आते हैं। कुछ नए और उभरते हुए सेक्टर्स को इसके दायरे में लाने का ऐलान वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण को करना चाहिए। इससे देशी और विदेशी कंपनियां इंडिया में निवेश करने के लिए प्रोत्साहित होंगी। इससे रोजगार के मौके बढ़ाने में मदद मिलेगी। इकोनॉमिक ग्रोथ की रफ्तार बढ़ाने के लिए रोजगार के मौके बढ़ाना जरूरी है।
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ग्रामीण अर्थव्यवस्था में इनकम बढ़ाने की जरूरत
इकोनॉमिस्ट का कहना है कि जीडीपी में भले ही कृषि का योगदान घटा है। लेकिन, ग्रामीण इकोनॉमी की अनदेखी नहीं की जा सकती। इसलिए सरकार को ग्रामीण इलाकों में लोगों की इनकम बढ़ाने के उपाय बजट में करने होंगे। पिछले कुछ समय से ग्रामीण इलाकों में मांग बढ़ रही है। अगर सरकार यूनियन बजट में ग्रामीण इलाकों में इंफ्रास्ट्रक्चर को बेहतर बनाने के लिए बड़े ऐलान करती है तो इससे ग्रामीण इलाकों में इनकम बढ़ सकती है। इसका पॉजिटिव असर इकोनॉमी की ग्रोथ पर भी पड़ेगा।