वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण के सामने इकोनॉमिक ग्रोथ बढ़ाने का भी चैलेंज है। इसके लिए वह यूनियन बजट 2025 मे बड़े उपायों का ऐलान कर सकती हैं। दिसंबर के आखिरी हफ्ते में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ हुई बैठक में इकोनॉमिस्ट्स ने सरकार को ग्रोथ बढ़ाने वाले उपाय करने की सलाह दी थी। उन्होंने यह भी कहा था कि कंजम्प्शन बढ़ाने के उपाय करने से इकोनॉमिक ग्रोथ की रफ्तार तेजी होगी। इकोनॉमिस्ट्स का कहना है कि सरकार कंजम्प्शन बढ़ाने के लिए इनकम टैक्स स्ट्रक्चर को आसान बना सकती है। साथ ही सरकार को इनकम टैक्स से जुड़े विवाद के मामलो में कमी लाने के भी उपाय करने होंगे।
विवाद के मामलों के निपटारे से बढ़ेगी सरकार की कमाई
कंसल्टेंसी फर्म EY ने कहा है कि वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण को इनकम टैक्स विवाद के मामलों में कमी लाने के भी उपाय करने होंगे। ईवाय इंडिया ने बजट से पहले जारी अपनी रिपोर्ट में कहा है कि फाइनेंशियल ईयर 2023-24 में इनकम टैक्स के विवाद के मामलों में 31 लाख करोड़ रुपये फंसे हुए हैं। अगर इनकम टैक्स से जुड़े इन विवादों का निपटारा होता है तो सरकार को अतिरिक्त रेवेन्यू हासिल हो सकता है। इससे ऐसे वक्त सरकार को काफी राहत मिलेगी, जब उसे पैसे की काफी जरूरत है। सरकार इकोनॉमी की ग्रोथ बढ़ाने के लिए पूंजीगत खर्च बढ़ाना चाहती है।
लोअर इनकम ग्रुप को टैक्स में मिलेगी राहत
ईवाय इंडिया के नेशनल टैक्स लीडर समीर गुप्ता ने कहा कि सरकार को डायरेक्ट टैक्स कोड लागू करने पर फोकस बढाना होगा। उन्होंने बताया, "डायरेक्ट टैक्स कोड के फुल रिव्यू में थोड़ा समय लगेगा। लेकिन, वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण इस बारे में यूनियन बजट 2025 में कुछ संकेत दे सकती हैं। वित्तमंत्री पर्सनल इनकम टैक्स में फिलहाल राहत दे सकती हैं। खासकर लोअर इनकम ग्रुप के लोगों को टैक्स में राहत मिलनी चाहिए। इससे एक तो बड़ी संख्या में लोगों को राहत मिलेगी। दूसरा इससे इकोनॉमी में डिमांड बढ़ाने में मदद मिलेगी।"
सालाना 15 लाख तक की इनकम पर नहीं देना होगा टैक्स
एसएमसी ग्लोबल सिक्योरिटीज के सीएमडी सुभाष चंद्र अग्रवाल ने कहा कि इकोनॉमी में डिमांड बढ़ाने के लिए वित्तमंत्री को मिडिल क्लास को इनकम टैक्स में राहत का ऐलान करना चाहिए। उन्होंने कहा, "2024 बजट के ट्रेंड को जारी रखते हुए सरकार सालाना 15 लाख रुपये तक की इनकम वाले लोगों पर टैक्स का बोझ घटाने का ऐलान यूनियन बजट 2025 में कर सकती हैं। इससे लोगों के हाथ में खर्च करने के लिए ज्यादा पैसे बचेंगे। इससे डिमांड बढ़ेगी और आखिरकार इकोनॉमिक ग्रोथ की रफ्तार बढ़ेगी।"
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जीडीपी ग्रोथ बढ़ाने के उपाय करने होंगे
अग्रवाल ने कहा कि इनफ्लेशन ने लोगों के खर्च करने की क्षमता घटा दी है। इसका असर एफएमसीजी सेक्टर की ग्रोथ पर दिखा है। अगर समय पर सरकार ने इकोनॉमी में डिमांड बढ़ाने के लिए कदम नहीं उठाए तो इससे मुश्किल बढ़ सकती है। सरकार ने साल 2047 तक इंडिया को विकसित देश बनाने का टारगेट रखा है। अगर इस टारगेट को हासिल करना है तो इकोनॉमी की ग्रोथ बढ़ानी होगी। इसके लिए जीडीपी की कम से कम 7-8 फीसदी की ग्रोथ जरूरी है। यूनियन बजट 2025 इसके लिए बड़ा मौका है। वित्तमंत्री इसके लिए 1 फरवरी को बड़े ऐलान कर सकती हैं।