यूनियन बजट 2025 पेश होने से पहले सरकार के फिस्कल डेफिसिट को लेकर चर्चा बढ़ गई है। इकोनॉमिस्ट्स का कहना है कि 1 फरवरी, 2025 को वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण फिस्कल डेफिसिट के लिए 4.5 फीसदी का टारगेट कर सकती हैं। खासकर 1 जनवरी को इस साल अप्रैल-नवंबर के बीच फिस्कल डेफिसिट का डेटा आने के बाद इसकी संभावना और बढ़ गई है। सवाल है कि फिस्कल डेफिसिट का मसला इतना अहम क्यों है, पिछले सालों में फिस्कल डेफिसिट कितना रहा है, एफआरबीएम एक्ट का क्या मतलब है?
दो बार फिस्कल डेफिसिट काफी ज्यादा बढ़ गया था
फिस्कल डेफिसिट (Fiscal Deficit) लंबे समय से सरकार का सिरदर्द रहा है। सरकार की कोशिश इसे काबू में रखने की होती है। लेकिन, यह कई बार काबू से बाहर निकल जाता है। 2008 की फाइनेंशियल क्राइसिस और 2020 में कोविड की महामारी इसके दो बड़े उदाहरण हैं। दोनों ने फिस्कल डेफिसिट को काबू में रखने की सरकार की कोशिशों को तगड़ी चोट पहुंचाई थी। हालांकि, कोविड के बाद से सरकार ने इस पर अपना फोकस बढ़ाया है।
FRBM एक्ट की जरूरत और इसका मतलब
पिछले 20 साल के फिस्कल डेफिसिट के डेटा को देखने से पता चलता है कि ऐसा कई बार हुआ है कि फिस्कल डेफिसिट सरकार के तय लक्ष्य को पार कर गया है। सरकार ने 2004 में एक कानून बनाया था, जिसका मकसद फिस्कल डेफिसिट को धीरे-धीरे कर नियंत्रण में लाना था। इसे फिस्कल रिस्पॉन्सिबिलिटी एंड मैनेजमेंट (FRBM) एक्ट कहा जाता है। सरकार आज भी इस एक्ट के हिसाब से अपने फिस्कल डेफिसिट को नियंत्रण में रखने की कोशिश करती है।
पिछले 10 साल में कैसा रहा है सरकार का रिकॉर्ड?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने पिछले 10 साल में फिस्कल डेफिसिट को बढ़ने से रोकने में सफल रही है। 2020 में कोविड की महामारी अपवाद है, जब सरकार का फिस्कल डेफिसिट काफी बढ़ गया था। लेकिन, यूपीए की सरकार के 10 साल को देखा जाए तो स्थिति ज्यादा अच्छी दिखती है। अगर 2008 की फाइनेंशियल क्राइसिस को छोड़ दिया जाए तो ज्यादातर सालों में सरकार का फिस्कल डेफिसिट नियंत्रण में बना रहा।
लेकिन, यह ध्यान में रखना होगा कि यूपीए सरकार के दौरान ऐसे खर्चों का अनुपात ज्यादा था, जो सरकार की बैलेंसशीट से बाहर थे। सब्सिडी पर होने वाला खर्च काफी ज्यादा था। सरकार के खर्च करने का तरीका निराशाजनक था। केंद्र की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने सब्सिडी के बोझ को घटाने के लिए बड़े कदम उठाए हैं। बैलेंसशीट से बाहर के खर्चों पर रोक लगाई है। सरकार कोविड के बावजूद फिस्कल डेफिसिट को घटाने में सफल रही है। 2020-21 में फिस्कल डेफिसिट 9.1 फीसदी पर पहुंच गया था, जो 2023-24 में घटकर 5.9 फीसदी पर आ गया। इस वित्त वर्ष में इसके घटकर 4.9 फीसदी पर आ जाने का अनुमान है।
FY26 में कितना रह सकता है टारगेट?
वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी, 2025 को फिस्कल डेफिसिट का 4.5 फीसदी का टारगेट तय कर सकती है। लंबे समय से सरकार की कोशिश फाइनेंशियल ईयर 2025-26 तक फिस्कल डेफिसिट को 4.5 फीसदी तक लाने की रही है। इसका मतलब है कि अगले वित्त वर्ष में सरकार का कुल घाटा जीडीपी के 4.5 फीसदी से ज्यादा नहीं होगा। यह सरकार के लिए बड़ी उपलब्धी होगी।
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फिस्कल डेफिसिट कम रहने के क्या फायदें हैं?
सरकार का फिस्कल डेफिसिट कम होना इकोनॉमी के लिए पॉजिटिव है। फिस्कल डेफिसिट कम रहने का मतलब है कि सरकार को कम कर्ज लेना पड़ेगा। कर्ज कम रहेगा तो सरकार को इंटरेस्ट पर कम खर्च करना पड़ेगा। इससे सरकार के हाथ में ज्यादा पैसे बचेंगे, जिसका इस्तेमाल वह पब्लिक वेल्फेयर और पूंजीगत खर्च के लिए कर सकेगी।