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Budget 2025: क्या सरकार प्रायरिटी सेक्टर लेंडिंग का दायरा बढ़ाने का ऐलान बजट में करेगी?

प्रायरिटी सेक्टर लेंडिंग के नियम RBI बनाता है। इसके तहत बैंकों को अपने लोन का कुछ हिस्सा कुछ खास क्षेत्रों को अनिवार्य रूप से उपलब्ध कराना पड़ता है। इनमें कृषि, एजुकेशन, हाउसिंग और स्मॉल इंडस्ट्रीज शामिल हैं। इन क्षेत्रों को लोन देने में आम तौर पर बैंकों की दिलचस्पी नहीं होती है

MoneyControl Newsअपडेटेड Dec 28, 2024 पर 7:24 PM
Budget 2025: क्या सरकार प्रायरिटी सेक्टर लेंडिंग का दायरा बढ़ाने का ऐलान बजट में करेगी?
सीआईआई का मानना है कि इकोनॉमी की ग्रोथ की रफ्तार तेज करने के लिए रिन्यूएबल एनर्जी, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स, जलवायु अनुकूल कृषि जैसे सेक्टर को पर्याप्त कर्ज उपलब्ध कराने के उपाय करने होंगे।

सरकार को इकोनॉमिक ग्रोथ बढ़ाने के लिए प्रायरिटी सेक्टर लेंडिंग (पीएसएल) पर फोकस बढ़ाना होगा। एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर इंडिया को 2047 तक विकसित देश बनाना है तो प्राथमिकता वाले क्षेत्रों को पर्याप्त कर्ज उपलब्ध कराना होगा। आरबीआई की स्टडी में कहा गया है कि प्राथमिकता वाले क्षेत्रों पर फोकस बढ़ाने से बैंकों के ओवरऑल एसेट क्वालिटी बढ़ाने में मदद मिलती है। यूनियन बजट 2025 प्रायरिटी सेक्टर लेंडिंग पर फोकस बढ़ाने का एक मौका है। वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी, 2025 को यूनियन बजट पेश करेंगी। सवाल है कि क्या इकोनॉमी की बदलती स्थितियों के मुताबिक पीएसएल का दायरा बढ़ाने की जरूरत है?

RBI बनाता है प्राइमरी सेक्टर लेंडिंग के नियम

प्रायरिटी सेक्टर लेंडिंग के नियम RBI बनाता है। इसके तहत बैंकों को अपने लोन का कुछ हिस्सा कुछ खास क्षेत्रों को अनिवार्य रूप से उपलब्ध कराना पड़ता है। इनमें कृषि, एजुकेशन, हाउसिंग और स्मॉल इंडस्ट्रीज शामिल हैं। इन क्षेत्रों को लोन देने में आम तौर पर बैंकों की दिलचस्पी नहीं होती है। बीते सालों में इसके अच्छे नतीजे देखने को मिले हैं। बैंकों के कुल लोन में पीएसएल की हिस्सेदारी 40 फीसदी से ऊपर रही है। पिछले कुछ सालों में जीडीपी में अलग-अलग सेक्टर की हिस्सेदारी में बदलाव आया है। 1990 के दशक में जीडीपी में एग्रीकल्चर की हिस्सेदारी 30 फीसदी से ज्यादा थी। अब यह सिर्फ 14 फीसदी रह गई है। इसके बावजूद एग्रीकल्चर की पीएसएल में हिस्सेदारी 18 फीसदी पर बनी हुई है।

CII ने सरकार को पीएसएल का दायरा बढ़ाने की सलाह दी

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