दुनिया भर की संसदों में अनुशासन, मर्यादा और सख्त नियमों की उम्मीद की जाती है। भारत से लेकर अमेरिका तक, किसी भी सदन के भीतर खाने या पीने पर सख्त मनाही होती है। लेकिन दुनिया के सबसे पुराने लोकतंत्र, ब्रिटेन (United Kingdom) में एक ऐसी परंपरा है, जो आधुनिक युग में किसी को भी हैरान कर सकती है। यहां साल में एक दिन ऐसा आता है, जब देश का वित्त मंत्री (Chancellor of the Exchequer) संसद के भीतर सबके सामने शराब पी सकता है।
दरअसल ब्रिटिश संसद (Westminster) के नियम बहुत सख्त हैं। सदन की कार्यवाही के दौरान किसी भी सांसद को कुछ भी खाने या पीने की अनुमति नहीं होती। यहां तक कि सदन में केवल 'सादा पानी' ही लाया जा सकता है। लेकिन, 'बजट डे' (Budget Day) के दिन एक ऐतिहासिक अपवाद दिया जाता है।
जब चांसलर अपना बजट भाषण शुरू करते हैं, तो वे अपनी मेज पर पानी के अलावा अपनी पसंद का कोई भी पेय पदार्थ रख सकते हैं, जिसमें अल्कोहल (Alcohol) भी शामिल है। यह ब्रिटेन के संसदीय नियमों के 'कस्टम्स एंड प्रैक्टिस' का हिस्सा है।
इतिहास और कारण: गले को तर रखने की मजबूरी
इस परंपरा की शुरुआत कोई मौज-मस्ती के लिए नहीं, बल्कि एक मजबूरी के कारण हुई थी। 18वीं और 19वीं शताब्दी में बजट भाषण आज की तरह 45 मिनट या 1 घंटे के नहीं होते थे।
साल 1853 में विलियम ग्लैडस्टोन (William Gladstone) ने एक ऐसा बजट भाषण दिया, जो 4 घंटे और 45 मिनट तक चला था। उस समय सदन में कोई लाउडस्पीकर या माइक नहीं होते थे।
वित्त मंत्री को खचाखच भरे सदन में चिल्लाकर अपनी बात रखनी पड़ती थी। इतने घंटों तक लगातार बोलने से गला पूरी तरह सूख जाता था और आवाज़ बैठने लगती थी।
उस समय यह माना जाता था कि शराब (जैसे व्हिस्की या ब्रैंडी) गले को साफ रखने और आवाज को बुलंद बनाए रखने में मदद करती है। इसी कारण सांसदों ने सहमति दी कि वित्त मंत्री भाषण के दौरान अपनी पसंद का "रिफ्रेशमेंट" ले सकता है।
ब्रिटेन के इतिहास में कई चांसलर्स ने इस परंपरा का बखूबी आनंद लिया है। उनके पसंदीदा पेय उनकी शख्सियत का हिस्सा बन गए:
आधुनिक युग: बदलता हुआ मिजाज
जैसे-जैसे समय बदला और समाज में स्वास्थ्य और सार्वजनिक आचरण के प्रति जागरूकता बढ़ी, यह परंपरा धीरे-धीरे कम होने लगी। 1997 के बाद से कई चांसलर्स ने इस परंपरा से दूरी बना ली।
उदाहरण के लिए, गॉर्डन ब्राउन केवल मिनरल वाटर पीते थे। एलिस्टर डार्लिंग और जॉर्ज ऑसबॉर्न ने भी पानी को ही प्राथमिकता दी। ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री और तत्कालीन चांसलर ऋषि सुनक ने भी अपने बजट भाषणों के दौरान कभी शराब का सेवन नहीं किया; उन्होंने केवल पानी का इस्तेमाल किया।
इसके पीछे दो मुख्य कारण हैं:
ब्रिटेन की संसद को 'The Mother of Parliaments' कहा जाता है। यहां की परंपराएं जैसे- लाल ब्रीफकेस, सोने की छड़ी (Mace), और बजट के दौरान शराब की अनुमति, यह दर्शाती हैं कि यह देश अपने इतिहास को लेकर कितना भावुक है।
हालांकि आज के वित्त मंत्री शायद ही सदन में जाम टकराते नजर आएं, लेकिन यह 'कानूनी छूट' आज भी किताब में दर्ज है। यह परंपरा हमें याद दिलाती है कि एक समय में देश चलाना और उसे जनता तक पहुंचाना कितना कठिन और थका देने वाला शारीरिक काम हुआ करता था।