आमतौर पर दुनिया भर में बजट का मतलब होता है- महंगाई, टैक्स और नीरस आंकड़े। लेकिन हिंद महासागर के बीच बसे एक खूबसूरत द्वीप देश 'मॉरीशस' में कहानी कुछ अलग है। यहां जब देश का वित्त मंत्री बजट पेश करने निकलता है, तो उसके हाथ में सिर्फ फाइलों का ब्रीफकेस नहीं होता, बल्कि दिल में 'गंगा मैया' के प्रति अगाध श्रद्धा होती है।
मॉरीशस में बजट पेश करने से पहले एक ऐसी परंपरा निभाई जाती है, जो भारत से हजारों मील दूर होने के बावजूद आपको बनारस या हरिद्वार की याद दिला देगी। वहां के वित्त मंत्री संसद जाने से पहले 'गंगा तालाब' (ग्रैंड बेसिन) जाते हैं। यह एक प्राकृतिक झील है, जिसे मॉरीशस के लोग दुनिया की सबसे पवित्र झीलों में से एक मानते हैं।
परंपरा के अनुसार, वित्त मंत्री यहां के मंदिर में माथा टेकते हैं, पवित्र जल का स्पर्श करते हैं और प्रार्थना करते हैं कि देश का आर्थिक भविष्य 'गंगा' की तरह ही निर्मल और समृद्ध बना रहे।
क्यों जुड़ी है यह भारतीय परंपरा?
आपके मन में सवाल होगा कि एक विदेशी धरती पर यह 'देसी' रिवाज कैसे? दरअसल, मॉरीशस की करीब 68% आबादी भारतीय मूल की है। 19वीं सदी में जब भारतीय मजदूर वहां पहुंचे, तो वे अपने साथ अपनी संस्कृति और 'गंगा' की यादें भी ले गए।
कहा जाता है कि 1970 के दशक में भारत से गंगाजल लाकर इस तालाब में मिलाया गया था, जिसके बाद से इसे 'गंगा तालाब' कहा जाने लगा। आज यह सिर्फ एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि मॉरीशस की राजनीति और अर्थव्यवस्था का एक अटूट हिस्सा बन चुका है।
आंकड़ों के खेल में 'आध्यात्म' का तड़का
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह परंपरा केवल धार्मिक नहीं, बल्कि एक बड़ा 'इमोशनल कार्ड' भी है। बजट के तनावपूर्ण माहौल में यह रिवाज जनता को भरोसा दिलाता है कि सरकार उनकी जड़ों और संस्कृति को भूले बिना विकास का रोडमैप तैयार कर रही है।
दुनिया के बाकी देशों में जैसे कनाडा में बजट से पहले नए जूते खरीदे जाते हैं या ब्रिटेन में व्हिस्की पी जाती है (ब्रिटेन), वहीं मॉरीशस का यह रिवाज भारत के 'हलवा सेरेमनी' से भी ज्यादा गहरा और आध्यात्मिक महसूस होता है। यह साबित करता है कि अर्थव्यवस्था भले ही पश्चिम के नियमों से चले, लेकिन संस्कार आज भी पूरब के ही काम आते हैं।