Budget 2026: जहां वित्त मंत्री के नए जूतों से तय होता है देश का बजट! बड़ी अनोखी परंपरा
Canada Budget Shoes: जैसे भारत में बजट से पहले 'हलवा सेरेमनी' होती है, वैसे ही कनाडा में 'बजट शूज' की रस्म है। कनाडा में बजट का दिन केवल आंकड़ों और टैक्स की फाइलों तक सीमित नहीं होता, बल्कि इस दिन एक ऐसी अनोखी परंपरा निभाई जाती है, जिसकी चर्चा पूरी दुनिया में होती है। इसे 'Budget Shoes' परंपरा कहा जाता है
Budget 2026: जहां वित्त मंत्री के नए जूतों से तय होता है देश का बजट! बड़ी अनोखी परंपरा
1 फरवरी को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण देश का आम बजट पेश करेंगे। आम आदमी से लेकर बड़े-बड़े बिजनेसमैन की निगाहें इस बजट पर टिकी होती हैं, क्योंकि जब बजट पेश किया जाता है, तो चर्चा अक्सर GDP, टैक्स स्लैब और राजकोषीय घाटे पर होती है। हालांकि, कनाडा में बजट का दिन केवल आंकड़ों और टैक्स की फाइलों तक सीमित नहीं होता, बल्कि इस दिन एक ऐसी अनोखी परंपरा निभाई जाती है, जिसकी चर्चा पूरी दुनिया में होती है। इसे 'Budget Shoes' परंपरा कहा जाता है। जैसे भारत में बजट से पहले 'हलवा सेरेमनी' होती है, वैसे ही कनाडा में 'बजट शूज' की रस्म है।
कनाडा में बजट के दिन पूरी दुनिया की नजरें वहां के वित्त मंत्री के 'पैरों' पर टिकी होती हैं। यह सुनने में थोड़ा अजीब लग सकता है, लेकिन कनाडा में बजट पेश करने से पहले 'नए जूते' खरीदने और पहनने की एक दशक पुरानी और बेहद दिलचस्प परंपरा है।
क्या है 'बजट शूज' परंपरा?
कनाडा में यह एक अलिखित नियम बन चुका है कि बजट वाले दिन वित्त मंत्री संसद में नए जूते पहनकर ही दाखिल होंगे। बजट भाषण से ठीक एक या दो दिन पहले वित्त मंत्री किसी स्थानीय दुकान पर जाते हैं, मीडिया के कैमरों के सामने अपने लिए एक जोड़ी नए जूते चुनते हैं और उन्हें पहनकर फोटो खिंचवाते हैं।
कनाडा की राजनीति में इन जूतों को केवल फैशन नहीं, बल्कि सरकार की आर्थिक सोच का प्रतीक भी माना जाता है।
कैसे शुरू हुआ यह सिलसिला?
इस परंपरा की शुरुआत को लेकर इतिहासकार बंटे हुए हैं, लेकिन सबसे लोकप्रिय किस्सा 1954 का है। माना जाता है कि तत्कालीन वित्त मंत्री वॉल्टर हैरिस ने इस चलन को शुरू किया था। उस समय मीडिया ने उनके नए जूतों को लेकर काफी चर्चा की थी, जिसके बाद आने वाले वित्त मंत्रियों ने इसे एक 'गुड लक' के तौर पर अपना लिया।
हालांकि, 1966 में मिचेल शार्प ने इसे एक आधिकारिक परंपरा का रूप दे दिया। उन्हें बताया गया था कि बजट के दिन नए जूते पहनना एक पुरानी परंपरा है, जबकि लिखित में ऐसा कुछ था नहीं। लेकिन उन्होंने नए जूते पहने और तब से यह एक 'मिथक' से बदलकर 'पक्की परंपरा' बन गई। तब से लेकर आज तक, कनाडा का शायद ही कोई वित्त मंत्री रहा हो जिसने इस रस्म को न निभाया हो।
जूतों के पीछे छिपा होता है बजट का मिजाज!
कनाडा में वित्त मंत्री किस तरह के जूते चुनते हैं, उससे बजट के मिजाज का अंदाजा लगाया जाता है।
चमचमाते फॉर्मल जूते: अगर जूते महंगे और लेदर के हैं, तो माना जाता है कि बजट व्यापार जगत और कॉर्पोरेट के अनुकूल होगा।
सस्ते या टिकाऊ जूते: अगर वित्त मंत्री ने साधारण, सस्ते या सेल से जूते चुने हैं, तो संदेश जाता है कि सरकार 'खर्चों में कटौती' करने वाली है और बजट 'किफायती और बचत' वाला होने वाला है।
बच्चों के जूते या स्नीकर्स: कई बार वित्त मंत्रियों ने बच्चों के जूतों के साथ फोटो खिंचवाकर यह संकेत दिया है कि बजट परिवारों और अगली पीढ़ी पर केंद्रित है।
वर्क बूट: कई बार मंत्रियों ने पुराने 'वर्क बूट्स' पहनकर यह संदेश दिया है कि सरकार बुनियादी ढांचे और मजदूरों पर ध्यान दे रही है।
लोकल ब्रांड या मेड इन कनाडा जूते: क्रिस्टिया फ्रीलैंड और उनसे पहले मंत्रियों ने अक्सर कनाडाई ब्रांड्स के जूते पहनकर स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने का संदेश दिया है।
कुछ यादगार किस्से
जॉन क्रॉस्बी: पूर्व वित्त मंत्री जॉन क्रॉस्बी ने 1979 में जूते नहीं, बल्कि पारंपरिक मुकलुक (सील की खाल से बने जूते) पहने थे, जिसने उस समय काफी सुर्खियां बटोरी थीं।
जिम फ्लैहर्टी: पूर्व वित्त मंत्री जिम फ्लैहर्टी इस परंपरा के सबसे बड़े मुरीद थे। साल 2011 में उन्होंने अपने पुराने जूतों में ही 'नए सोल' डलवाए थे, जो इस बात का संकेत था कि सरकार पुराने बजट की नीतियों को ही आगे बढ़ाएगी, लेकिन मजबूती के साथ।
जो ओलिवर: पूर्व वित्त मंत्री ने 2015 में 'न्यू बैलेंस' (New Balance) के रनिंग शूज पहने थे, ताकि वे लोगों तक अपने ये मैसेज पहुंचा सकें कि इस बार के बजट को 'बैलेंस' किया गया है।
क्रिस्टिया फ्रीलैंड: कनाडा की पूर्व उप-प्रधानमंत्री और पूर्व वित्त मंत्री क्रिस्टिया फ्रीलैंड ने 2021 में जब अपना बजट पेश किया, तो उन्होंने स्थानीय कनाडाई ब्रांड के काले रंग के पंप्स चुने थे, ताकि 'लोकल बिजनेस' को बढ़ावा देने का संदेश दिया जा सके।
विवाद और आलोचना
जहां लोग इस परंपरा को मनोरंजन के तौर पर देखते हैं, वहीं कुछ आलोचक इसे 'दिखावा' भी मानते हैं। उनका तर्क है कि जब देश महंगाई या आर्थिक तंगी से जूझ रहा हो, तब वित्त मंत्री का नए जूतों का प्रदर्शन करना आम जनता का मजाक उड़ाने जैसा है। इसके जवाब में हाल के सालों में मंत्रियों ने बहुत साधारण और कम कीमत वाले जूते चुनना शुरू कर दिया है।
आज के डिजिटल युग में, यह परंपरा एक बड़े 'फोटो-ऑप' में बदल गई है। आलोचक भले ही इसे एक 'स्टंट' कहें, लेकिन कनाडाई नागरिकों और मीडिया के लिए यह बजट के गंभीर माहौल को थोड़ा हल्का और रोचक बनाने का एक तरीका भी है।