Budget 2026 Expectations : बजट में मोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक मैन्युफैक्चरिंग को मिल सकता है बढ़ावा, IT मंत्रालय ने की ये मांग

Budget Expectations : सूत्रों के मुताबिक आईटी मंत्रालय की तरफ से कस्टम ड्यूटी और इन्वर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर हटाने की सिफारिश की गई है। मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग की मशीनरी पर ड्यूटी घटाने की भी मांग रखी गई है। मोबाइल फोन असेंबली प्रोडक्ट्स पर बेसिक ड्यूटी घटाने की मांग हो रही है। बेसिक ड्यूटी 15% से घटाकर 10% करने की मांग की गई है

अपडेटेड Jan 22, 2026 पर 2:04 PM
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Budget 2026 Expectations : बजट में मोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा मिल सकता है। IT मंत्रालय ने बजट में वित्त मंत्री से कई ऑपरेशनल रिफार्म की मांग की है। इस पार ज्यादा डिटेल जानकारी देते हुए सीएनबीसी-आवाज के असीम मनचंदा ने सूत्रों के हवाले मिली जानकारी के आधार पर बताया कि 1 फरवरी को आने वाले बजट में मोबाइल इलेक्ट्रॉनिक उत्पादन को बूस्ट मिल सकता है। IT मंत्रालय की कई ऑपरेशनल रिफॉर्म की मांग है।

सूत्रों के मुताबिक आईटी मंत्रालय की तरफ से कस्टम ड्यूटी और इन्वर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर हटाने की सिफारिश की गई है। मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग की मशीनरी पर ड्यूटी घटाने की भी मांग रखी गई है। मोबाइल फोन असेंबली प्रोडक्ट्स पर बेसिक ड्यूटी घटाने की मांग हो रही है। बेसिक ड्यूटी 15% से घटाकर 10% करने की मांग की गई है। आईटी मंत्रालय का कहना है कि माइक्रोफोन, रिसीवर, स्पीकर और PCB पर से ड्यूटी घटाई जानी चाहिए। ईयर फोन, इयरबड्स, स्मार्ट घड़ियों पर ड्यूटी घटकर 15% की जानी चाहिए।

सूत्रों के मुताबिक केंद्र सरकार मोबाइल फोन बनाने में इस्तेमाल होने वाली मशीनों और उनके पुर्ज़ों पर लगने वाली ड्यूटी को लेकर नए बजट में बदलाव पर विचार कर रही है। इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनियों ने सरकार से कहा है,कि मौजूदा ड्यूटी नियमों की वजह से देश में मैन्युफैक्चरिंग महंगी पड़ रही है। उद्योग चाहता है कि बजट में इस समस्या को दूर किया जाए, ताकि भारत में मोबाइल निर्माण को आगे बढ़ाया जा सके।


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बता दें कि हाल ही में चीन ने कई हाई-टेक मशीनों और जरूरी कलपुर्जों के निर्यात पर रोक लगा दी है। इन मशीनों का इस्तेमाल मोबाइल फोन बनाने में होता है। इसके चलते भारतीय कंपनियों को बाहर से मशीनें मिलना मुश्किल हो गया है।अब कंपनियां इन मशीनों को भारत में ही बनाने की कोशिश कर रही हैं, लेकिन समस्या यह है कि इन मशीनों के पुर्ज़ों पर 5 प्रतिशत से लेकर 25 प्रतिशत तक ड्यूटी लगती है। इससे भारत में मशीन बनाना ज्यादा महंगा हो रहा है।

बड़ा विरोधाभास यह है कि अगर पूरी मशीन विदेश से मंगाई जाए, तो उस पर कोई ड्यूटी नहीं लगती। लेकिन अगर वही मशीन भारत में बनाई जाए, तो उसके छोटे-छोटे पुर्ज़ों पर टैक्स देना पड़ता है। इसी को इंडस्ट्री “उलटा ड्यूटी ढांचा” ( inverted duty structure ) कह रहा है। कंपनियों का कहना है कि ऐसे नियमों में भारत में मैन्युफैक्चरिंग करने का नुकसान होता है।

 

 

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