Budget 2026 Expectations : बढ़ती लागत से किसान आहत, जानिए क्या हैं एग्री सेक्टर की बजट से उम्मीदें
Budget 2026 Expectations: एग्री एक्सपर्ट्स का कहना है कि सिर्फ पेट भरना नहीं,पोषण भी जरूरी है। पोषण सुरक्षा के लिए साफ बेंचमार्क होना चाहिए। बजट में प्रोटीन,दाल और पोषक तत्व पर फोकस होना चाहिए
Budget 2026 : चावल सेक्टर की बजट से यह मांग है कि MSP पर सीधी खरीद धीरे-धीरे कम की जाए। बाजार भाव, MSP का अंतर भावांतर से हो। पैसा सीधे किसान के खाते में पहुंचे
Budget 2026 Expectations : 1 फरवरी को वित्त मंत्री निर्मला सीतारामन बजट पेश करेंगी। ऐसे में देश के एग्री सेक्टर की भी नजरें बजट पर लगी हुई हैं। एग्री सेक्टर की बजट से उम्मीदों पर नजर डालें तो देश में एग्री इंफ्रा को बढ़ावा देने की जरूरत है। बेहतर स्टोरेज और लॉजिस्टिक इंफ्रा का विकास जरूरी है। APMC को मॉर्डन इंफ्रास्ट्रक्चर देने की मांग की जा रही है। APMC ग्लोबल स्टैंडर्ड के हिसाब से होने चाहिए। खेती को आधुनिक तकनीक से जोड़ने की जरूरत है। एग्री में डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट को बढ़ावा देने की मांग हो रही है। बैन एग्रीकल्चर वायदा से बैन हटाने की मांग भी हो रही है। एग्रीकल्चर पर स्थाई पॉलिकी बनाने की मांग हो रही है। सरकार से क्रॉप के पैटर्न पर गहन शोध को प्रोत्साहित करने की उम्मीद है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि किसानों की आय बढ़ाने पर ज्यादा फोकस होना चाहिए। MSP और फसल खरीद में सुधार की भी जरूरत है। इस बजट में खेती की लागत कम करने पर जोर होना चाहिए।
पोषण सुरक्षा का बेंचमार्क
एग्री एक्सपर्ट्स का कहना है कि सिर्फ पेट भरना नहीं,पोषण भी जरूरी है। पोषण सुरक्षा के लिए साफ बेंचमार्क होना चाहिए। बजट में प्रोटीन,दाल और पोषक तत्व पर फोकस होना चाहिए।
खरीद प्रक्रिया बने आसान
एग्री सेक्टर की माग है कि खरीद और स्टोरेज की लागत धीरे-धीरे घटाई जाए। फूड सिस्टम को मार्केट से जोड़ा जाए। किसान सीधे बाजार से बेहतर दाम मिले। एग्री-टेक और एग्री-डेटा पर फोकस होना चाहिए। एग्री-टेक सिर्फ ऐप तक सीमित न रहे। डेटा को किसानों के लिए काम का बनाया जाए। मौसम,फसल, कीमतों की जानकारी रियल-टाइम मिलनी चाहिए।
फूड सिक्योरिटी से न्यूट्रिशन सिक्योरिटी
एग्री नीति सिर्फ अनाज डिस्ट्रीब्यूशन तक सीमित न रहे। इसमें संतुलित और पोषण-भरे भोजन पर फोकस होना चाहिए। फूड सिक्योरिटी को न्यूट्रिशन सिक्योरिटी में बदला जाना चाहिए।
एग्री सेक्टर की बजट में ऑर्गेनिक खेती को बढ़ावा देने की मांग है। ऑर्गेनिक खाद, कीटनाशकों पर सब्सिडी मिलनी चाहिए। देश-विदेश में बढ़ती ऑर्गेनिक डिमांड का फायदा उठाने की कोशिश होना चाहिए। ऑर्गेनिक खेती से खेत के मिट्टी की सेहत भी बेहतर होगी।
विदेशी बाजारों के लिए खेती
इस बजट में एक्सपोर्ट डिमांड वाली फसलों पर फोकस बढ़ना चाहिए। इंटरनेशनल क्वालिटी स्टैंडर्ड अपनाने में मदद मिलनी चाहिए। किसानों को ग्लोबल मार्केट से जोड़ा जाना चाहिए।
खेत से सीधे ग्राहक तक का सिस्टम विकसित होना चाहिए। कोल्ड स्टोरेज और सप्लाई चेन मजबूत की जानी चाहिए। एक्सपर्ट्स की ट्रांसपोर्ट और लॉजिस्टिक्स इंफ्रा में सुधार की मांग है। इसकी कोशिश होनी चाहिए कि पोस्ट-हार्वेस्ट नुकसान कम हो और किसान को बेहतर दाम मिले।
एग्री-लॉजिस्टिक्स में निवेश
एग्री एक्सपर्ट्स की मांग है कि खेतों के पास कोल्ड स्टोरेज बनाने की व्यवस्था होनी चाहिए। माल लाने-ले जाने के लिए रेफ्रिजरेटेड ट्रांसपोर्ट बढ़ाने के प्रावधान किए जाने चाहिए। आधुनिक वेयरहाउसिंग सिस्टम को बढ़ावा मिलना चाहिए।
फूड प्रोसेसिंग क्लस्टर्स
फूड प्रोसेसिंग वाली MSMEs को सपोर्ट मिले। क्लस्टर आधारित विकास मॉडल किया जाए। ऐसी कोशिश की जानी चाहिए जिससे वैल्यू एडिशन से किसानों की कमाई बढ़े।
सस्टेनेबल एग्रीकल्चर
इस बजट में फसल डायवर्सिफिकेशन को बढ़ावा मिलना चाहिए। पानी और मिट्टी बचाने वाली खेती को बढ़ावा दिया जाना चाहिए। ऐसे प्रयास होने चाहिए जिससे पर्यावरण को नुकसान कम हो और खेती टिकाऊ बने।
दाल सेक्टर की बजट से उम्मीदें
IPGA के चेयरमैन बिमल कोठारी का कहना है कि सेक्टर के लिए सरकार की नीति साफ होनी चाहिए। प्राइवेट सेक्टर को कोल्ड स्टोरेज लगाने के लिए बढ़ावा मिले। स्टोरेज बढ़ेगा तो कटाई के बाद होने वाला नुकसान कम होगा। इंफ्रास्ट्रक्चर पर सब्सिडी, सस्ता लोन और टैक्स में राहत मिले। दालों की प्रोसेसिंग को बढ़ावा दिया जाए। दाल मिलों के आधुनिकीकरण को बढ़ावा मिले। प्लांट-बेस्ड प्रोटीन जैसे नए प्रोडक्ट्स को सपोर्ट मिले। नई टेक्नोलॉजी, एग्री-टेक को अपनाने में मदद दी जाए।
AFTA के जनरन सेक्रेटरी सुनील बलदेवा का कहना है कि दाल सेक्टर के लिए कस्टम ड्यूटी MSP से लिंक होनी चाहिए। खेत पर लोन मिलने में आसानी होनी चाहिए। उनकी प्राइस स्टेबलाइजेशन फंड को बढ़ाने की भी मांग है।
चावल सेक्टर की बजट से उम्मीदें
BMEA (पंजाब) के रंजीत सिंह का कहना है कि बार-बार के बैन,टैरिफ और अंतरराष्ट्रीय संकट से चावल सेक्टर को नुकसान होता है। पेमेंट अटकने से बैंक अकाउंट NPA बन जाते हैं। इसके लिए एक्सपोर्ट रिस्क एंड लॉस प्रोटेक्शन फंड बनाने की जरूरत है। APEDA और ECGC के जरिए सरकार को बीमा सुरक्षा मुहैया करनी चाहिए। युद्ध, दंगे, इंटरनेट बंद, शिपमेंट रुकना और पेमेंट लेट होना कवर होना चाहिए। बीमा होने से एक्सपोर्टर्स को भरोसा बढ़ेगा।
चावल कारोबारियों के लिए इंटरनेशनल एक्सपो, ट्रेड फेयर्स में भाग लेने महंगा है। इसको देखते हुए डायरेक्ट एक्सपोर्ट प्रमोशन सपोर्ट स्कीम लाने की जरूरत है। रजिस्ट्रेशन फीस और बूथ चार्ज पर 50% की सब्सिडी मिलनी चाहिए। MSME एक्सपोर्टर्स को भी सब्सिडी मिलनी चाहिए। इससे नई मार्केट्स एक्सप्लोर करने में मदद मिलेगी।
रंजीत सिंह का कहना है कि यूनिट्स अंतरराष्ट्रीय मानकों तक अपग्रेड करने में मदद मिलनी चाहिए। पहले सरकार की मशीनरी अपग्रेडेशन स्कीम थी। लेकिन फंड न होने की वजह से ये 2 साल से रुकी हुई है। अंतरराष्ट्रीय मार्केट में अब मांग ज्यादा बढ़ गई है। हाई क्वालिटी की फूड प्रोसेसिंग औरपैकेजिंग की मांग है। हाई क्वालिटी स्टोरेज और लॉजिस्टिक्स की भी मांग है। कई MSME यूनिट्स का इंफ्रास्ट्रक्चर पुराना है। पुराने इंफ्रा के कारण यूनिट्स ऑर्डर खो रहे हैं। सरकार अपग्रेडेशन स्कीम को दाबारा शुरू करे। बजट में 10,000 करोड़ रुपए का फंड आवंटन होना चाहिए।
चावल सेक्टर की बजट से यह भी मांग है कि MSP पर सीधी खरीद धीरे-धीरे कम की जाए। बाजार भाव, MSP का अंतर भावांतर से हो। पैसा सीधे किसान के खाते में पहुंचे। सरकार पर स्टोरेज और खरीद का बोझ कम होगा। हाई-वैल्यू एग्री प्रोड्यूस पर जोर होना चाहिए। फल, सब्ज़ी, मसाले जैसी हाई-वैल्यू फसलों को बढ़ावा मिलना चाहिए। बीज, खाद और सिंचाई पर टारगेटेड सब्सिडी मिलना चाहिए। इससे किसान की आमदनी बढ़ाने पर सीधा असर होगा और एक ही फसल पर किसानों की निर्भरता कम होगी।