Aviation Sector Budget Expectations: एविएशन सेक्टर के लिए बजट में हो सकते हैं बड़े ऐलान, यात्रियों की सुविधा पर होगा फोकस

Aviation Sector Budget Expectations: इंडिगो क्राइसिस के बाद किसी एक कंपनी की ज्यादा बाजार हिस्सेदारी के नुकसान सामने आए हैं। इसका सबसे खराब असर यात्रियों पर पड़ा है। एयरलाइंस कंपनियों पर उनका भरोसा बहाल करने के लिए सरकार यूनियन बजट में बड़े उपाय कर सकती है

अपडेटेड Jan 23, 2026 पर 3:05 PM
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वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने पिछले साल बजट में सिविल एविएशन मिनिस्ट्री के लिए 2,400.31 करोड़ रुपये का आवंटन किया था।

साल 2026 एविएशन सेक्टर के लिए काफी खराब रहा। पहले अहमदाबाद में बड़ा हादसा हुआ। फिर साल के अंत में इंडिगो क्राइसिस की वजह से यात्रियों को काफी दिक्कत का सामना करना पड़ा। एक्सपर्ट्स का कहना है कि यूनियन बजट में सरकार का फोकस एविएशन सेक्टर पर रहने की उम्मीद है। इस सेक्टर की ग्रोथ से जुड़ी बाधाएं दूर करने के लिए सरकार कुछ बड़े ऐलान कर सकती है।

पिछले बजट में 2400 करोड़ रुपये का आवंटन

वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने पिछले साल यूनियन बजट में सिविल एविएशन मिनिस्ट्री के लिए बजट आवंटन करीब 10 फीसदी कम कर दिया था। रीजनल कनेक्टिविटी स्कीम 'उड़ान' के लिए भी आवंटन घटाया गया था। वित्तमंत्री ने सिविल एविएशन मिनिस्ट्री के लिए 2,400.31 करोड़ रुपये का आवंटन किया था। यह एक साल पहले के 2,658.68 करोड़ रुपये (संशोधित बजट अनुमान) के आवंटन से कम है। हालांकि, वित्त मंत्री ने कहा था कि 120 डेस्टिनेशंस को कनेक्ट करने के लिए उड़ान स्कीम में बदलाव किया जाएगा।


एयरलाइंस कंपनियों की संख्या बढ़ाने पर फोकस

एक्सपर्ट्स का कहना है कि सरकार का फोकस देश में एयरलाइंस की संख्या बढ़ाने पर होना चाहिए। इसके लिए इस सेक्टर में नई कंपनियों को अट्रैक्ट करने के लिए सरकार एयरलाइंस इंडस्ट्री को अट्रैक्टिव बनाने के लिए बजट में बड़े ऐलान कर सकती है। कंपनियों को ऑपरेशन के शुरुआती सालों में टैक्स से छूट दी जा सकती है। एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) पर टैक्स घटाया जा सकता है। एयरलाइंस के ऑपरेशंस पर कुल खर्च में एटीएफ की 30-40 फीसदी हिस्सेदारी होती है। अगर सरकार एटीएफ पर टैक्स घटाती है तो इससे एयरलाइंस कंपनियों को बड़ी राहत मिलेगी।

एयरलाइंस इंडस्ट्री को निवेश के लिए अट्रैक्टिव बनाने के उपाय

इंडिगो क्राइसिस के बाद किसी एक कंपनी की ज्यादा बाजार हिस्सेदारी के नुकसान सामने आए हैं। इसका सबसे खराब असर यात्रियों पर पड़ा है। एयरलाइंस कंपनियों पर उनका भरोसा बहाल करने के लिए सरकार यूनियन बजट में बड़े उपाय कर सकती है। लोगों की बढ़ती इनकम के साथ हवाई यात्री की संख्या भी बढ़ रही है। सरकार ने एयरपोर्ट्स इंफ्रास्ट्रक्चर को बेहतर बनाने पर फोकस किया है। उसके दरवाजे प्राइवेट कंपनियों के लिए खोले गए हैं। इसका पॉजिटिव असर दिखा है। लेकिन, पिछले कुछ सालों में एयरलाइंस सेक्टर में किसी बड़ी कंपनी की एंट्री नहीं हुई है।

एयरलाइंस में प्रतियोगिता बढ़ने से यात्रियों को फायदा

एयरलाइंस इंडस्ट्री को अगर निवेश के लिए अट्रैक्टिव बनाया जाता है तो इससे देशी और विदेशी कंपनियों की दिलचस्पी इस सेक्टर में बढ़ सकती है। इससे एयरलाइंस सेक्टर में प्रतियोगिता बढ़ेगी, जिसका फायदा यात्रियों को मिलेगा। अब ज्यादा प्रतियोगिता नहीं होने से साल के दौरान कुछ खास मौकों पर एयरलाइंस के टिकट के दाम आसमान में पहुंच जाते हैं। इससे लोगों को काफी दिक्कत होती है।

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विमानों के इंजन हासिल करने में कंपनियों की मदद

कई एयरलाइंस कंपनियां अपनी पूरी फ्लीट कपैसिटी का इस्तेमाल नहीं कर पा रही है। इसकी वजह यह है कि अमेरिकी और यूरोपीय विमान कंपनियों की तरफ से उन्हें समय पर इंजन और दूसरे जरूरी कंपोनेंट नहीं मिल पा रहे हैं। सरकार इस समस्या को दूर करने के लिए अपने स्तर पर कोशिश कर सकती है।

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