Budget 2026: FY27 के लिए GDP का 4.3% रखा जा सकता है वित्तीय घाटा लक्ष्य, डबल डिजिट में बढ़ सकता है कैपेक्स- ICRA

Budget 2026: बजट से पहले की अपनी उम्मीदों में ICRA ने कहा कि वित्त वर्ष 2027 का केंद्रीय बजट दिलचस्प होने वाला है। सरकार पूंजीगत खर्च को 14 प्रतिशत बढ़ाकर 13.1 लाख करोड़ रुपये कर देगी। सरकार का ध्यान सालाना राजकोषीय घाटे के लक्ष्यों से हटकर मध्यम अवधि के डेट कंसोलिडेशन पर जा रहा है

अपडेटेड Jan 17, 2026 पर 4:03 PM
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ICRA का अनुमान है कि मौजूदा वित्त वर्ष में नेट टैक्स रेवेन्यू में 1.3 लाख करोड़ रुपये की कमी आएगी।

रेटिंग एजेंसी ICRA ने अपनी प्री-बजट उम्मीदों में कहा है कि सरकार अगले वित्त वर्ष यानि कि 2026-27 के लिए राजकोषीय घाटे का लक्ष्य GDP का 4.3 प्रतिशत रख सकती है। साथ ही पूंजीगत खर्च डबल डिजिट में बढ़ सकता है। ICRA का अनुमान है कि मौजूदा वित्त वर्ष 2025-26 में नेट टैक्स रेवेन्यू में 1.3 लाख करोड़ रुपये की कमी आएगी। नॉन-टैक्स रिसीप्ट 2025-26 के बजट लक्ष्य से 80,000 करोड़ रुपये ज्यादा की रहेंगी। अगर आय में कमी की भरपाई खर्च में बचत से कर ली गई तो वित्त वर्ष 2026 में फिस्कल स्लिपेज की संभावना नहीं है।

बजट से पहले की अपनी उम्मीदों में ICRA ने कहा कि वित्त वर्ष 2027 का केंद्रीय बजट दिलचस्प होने वाला है। सरकार का ध्यान सालाना राजकोषीय घाटे के लक्ष्यों से हटकर मध्यम अवधि के डेट कंसोलिडेशन पर जा रहा है। साथ ही अगले 5 सालों के लिए 16वें वित्त आयोग की सिफारिशों को लागू किया जाएगा। ICRA का मानना ​​है कि नए वित्त वर्ष में सरकार का राजकोषीय घाटा GDP के 4.3 प्रतिशत पर सीमित रह सकता है। यह वित्त वर्ष 2026 लिए राजकोषीय घाटे को लेकर 4.4 प्रतिशत के बजट अनुमान से थोड़ा कम है।

पूंजीगत खर्च 14 प्रतिशत बढ़ने की उम्मीद


उम्मीद है कि भारत सरकार वित्त वर्ष 2027 के लिए पूंजीगत खर्च को 14 प्रतिशत बढ़ाकर 13.1 लाख करोड़ रुपये कर देगी। हालांकि वित्त वर्ष 2028 से वित्तीय दबाव बढ़ सकते हैं। इसकी वजह है कि 8वें केंद्रीय वेतन आयोग (CPC) की सिफारिशों के चलते केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों की सैलरी और पेंशन में बदलाव से अनिवार्य खर्च बढ़ जाएगा।

Budget 2026 Expectations Live

ICRA को उम्मीद है कि फिस्कल डेफिसिट-टू-GDP रेशियो में मामूली गिरावट के बावजूद सरकार के ग्रॉस डेटेड मार्केट उधार में 15-16 प्रतिशत की तेज वृद्धि होगी। आंकड़ा 16.9 लाख करोड़ रुपये तक जा सकता है। इसका मुख्य कारण सरकारी बॉन्ड्स के रिडेंप्शन में बढ़ोतरी होगी। हालांकि सरकारी बॉन्ड्स की स्विचिंग से इस बढ़ोतरी का असर कुछ हद तक कम किया जा सकता है।

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