गुजरात के बड़े कॉरपोरेट्स ने भारत की ग्रोथ की रफ्तार बरकरार रखने और विकसित भारत के विजन को आगे बढ़ाने के लिए कुछ चीजें गिनाई हैं। मैन्युफैक्चरिंग, इंफ्रास्ट्रक्चर, हेल्थकेयर, एग्रीकल्चर और कंसल्टिंग से जुड़े इंडस्ट्री लीडर्स ने ज्यादा कैपिटल खर्च, पॉलिसी में निरंतरता, बिजनेस करने में आसानी और ऐसे सुधारों की जरूरत पर जोर दिया है जो स्केल और रिस्क कैपिटल को अनलॉक करें। गुजरात इंक. का मानना है कि बजट देश भर में निवे, जॉब क्रिएशन, इनोवेशन और लॉन्ग-टर्म, सस्टेनेबल इकोनॉमिक ग्रोथ को तेज करने में कैटेलिटिक रोल निभा सकता है। बजट 2026 को रविवार, 1 फरवरी को पेश किया जाएगा।
एक रिपोर्ट के मुताबिक, FICCI-गुजरात के चेयरमैन और असाही सोंगवोन कलर्स लिमिटेड के जॉइंट MD और CEO गोकुल जयकृष्ण का कहना है कि हम दम घोंटने वाले लाइसेंस राज से बहुत आगे निकल आए हैं। इंडियन इकोनॉमी का इंजन अब 7% पर तेजी से बढ़ रहा है। फिर भी 5 ट्रिलियन डॉलर पर समझौता करना मामूली लगता है। दिग्गज अर्थव्यवस्थाओं के साथ समानता के लिए तेजी से 10 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचने की जरूरत है। आगे कहा कि भारत की वास्तविक क्षमता को साकार करने के लिए क्षमता को पावरहाउस पैमाने में बदलना चाहिए। इंफ्रा कैपेक्स को बढ़ाया जाना चाहिए। इलेक्ट्रॉनिक्स, ड्रोन, ईवी के लिए पीएलआई योजनाओं को व्यापक बनाया जाना चाहिए। साथ ही लॉन्ग टर्म कैपिटल गेंस टैक्स में कटौती भी होनी चाहिए।
कृषि, पशुपालन और इंफ्रास्ट्रक्चर में ज्यादा सरकारी खर्च तय किए जाने की अपेक्षा
हेस्टर बायोसाइंसेज लिमिटेड के फाउंडर, MD और सीईओ राजीव गांधी का कहना है कि स्थिर अर्थव्यवस्थाओं में सालाना बजट में व्यापक बदलाव नहीं देखे जाते। बदलाव ज्यादातर चल रहे सुधारों को बेहतर बनाने और पॉलिसी की दिशा में निरंतरता बनाए रखने के मकसद से किए गए हैं। भारत के मामले में भी ऐसा ही है। आने वाले बजट में कृषि, पशुपालन और इंफ्रास्ट्रक्चर के निर्माण में ज्यादा सरकारी खर्च तय किए जाने की अपेक्षा है। प्राइमरी सेक्टर को मजबूत करने से कृषि और औद्योगिक विकास के लिए एक मजबूत नींव मिल सकती है, जिससे MSMEs को बढ़ावा मिलेगा। इससे रोजगार पैदा होगा, खर्च करने लायक इनकम बढ़ेगी, खपत बढ़ेगी और आखिर में घरेलू मांग मजबूत होगी। इससे लगातार आर्थिक विकास का एक साइकिल बनेगा।