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Budget 2026: राजकोषीय घाटे के बजाय डेट-टू-GDP रेशियो को मैनेज करने पर रह सकता है जोर

Budget 2026: उम्मीद है कि डेट-टू-GDP पर बेस्ड फिस्कल कंसोलिडेशन स्ट्रैटेजी, बफर को फिर से बनाने में मदद करेगी। संशोधित FRBM एक्ट के तहत, वित्त वर्ष 2025-26 के लिए राजकोषीय घाटे का लक्ष्य GDP के 4.5 प्रतिशत से नीचे रखा गया था

Edited By: Ritika Singhअपडेटेड Jan 30, 2026 पर 4:04 PM
Budget 2026: राजकोषीय घाटे के बजाय डेट-टू-GDP रेशियो को मैनेज करने पर रह सकता है जोर
भारत जैसी बढ़ती और विकासशील अर्थव्यवस्था के लिए 3-4 प्रतिशत का राजकोषीय घाटा सहज और उचित माना जाता है।

बजट 2026 में राजकोषीय घाटे के किसी खास आंकड़े को टारगेट करने के बजाय डेट-टू-GDP रेशियो को कम करने पर जोर दिया जाएगा। यह रेशियो इस समय लगभग 56 प्रतिशत है। ऐसा इसलिए है क्योंकि देश FRBM कानून में तय किए गए राजकोषीय अनुशासन या राजकोषीय मजबूती के मार्ग के लगभग अंत तक पहुंच गया है। भारत जैसी बढ़ती और विकासशील अर्थव्यवस्था के लिए 3-4 प्रतिशत का राजकोषीय घाटा सहज और उचित माना जाता है।

संशोधित फिस्कल रिस्पॉन्सिबिलिटी एंड बजट मैनेजमेंट (FRBM) एक्ट के तहत, वित्त वर्ष 2025-26 के लिए राजकोषीय घाटे का लक्ष्य GDP के 4.5 प्रतिशत से नीचे रखा गया था। इसलिए, केंद्र सरकार ने डेट-टू-GDP रेशियो को एक नया मानक घोषित किया है। बजट 2026 रविवार, 1 फरवरी को पेश होगा।

पिछले बजट में घोषित हुआ था 6 साल का रोडमैप

1 फरवरी, 2025 को जारी FRBM स्टेटमेंट में अगले 6 साल का रोडमैप घोषित किया गया था। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने जुलाई, 2024 के अपने बजट भाषण में कहा था, ‘‘मेरे द्वारा 2021 में घोषित फिस्कल कंसोलिडेशन के मार्ग ने हमारी अर्थव्यवस्था की बहुत अच्छी सेवा की है, और हमारा लक्ष्य अगले साल घाटे को 4.5 प्रतिशत से नीचे लाना है। सरकार इस पथ पर बने रहने के लिए प्रतिबद्ध है।’’ उन्होंने कहा था कि वित्त वर्ष 2026-27 के बाद से हमारी कोशिश हर साल राजकोषीय घाटे को इस तरह रखने की होगी कि केंद्र सरकार का कर्ज, GDP के प्रतिशत के रूप में घटता रहे।

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