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Budget 2026: लाइसेंस फीस में भारी कमी चाहती है टेलिकॉम इंडस्ट्री, GST में राहत की भी मांग

Budget 2026: COAI ने लाइसेंस फीस, स्पेक्ट्रम यूसेज चार्जेस और ऑक्शन वाले स्पेक्ट्रम पेमेंट को GST से छूट देने का प्रस्ताव दिया है। देश में ब्रॉडबैंड सब्सक्राइबर्स की संख्या 6 करोड़ से बढ़कर 100 करोड़ हो गई है। ऑपरेटर्स AGR का 5% डिजिटल भारत निधि में भी देते हैं

Edited By: Ritika Singhअपडेटेड Jan 29, 2026 पर 4:27 PM
Budget 2026: लाइसेंस फीस में भारी कमी चाहती है टेलिकॉम इंडस्ट्री, GST में राहत की भी मांग
COAI ने स्पेक्ट्रम की कीमत तय करने और असाइनमेंट फ्रेमवर्क में बड़े पैमाने पर बदलाव की भी मांग की है।

भारत के टॉप टेलीकॉम ऑपरेटर्स ने आने वाले यूनियन बजट 2026-27 में बड़ी फिस्कल राहत मांगी है। उनका कहना है कि उन पर रेगुलेटरी लेवी और टैक्स का बोझ बेहद ज्यादा है। ये 5G एक्सपेंशन और भविष्य के नेटवर्क अपग्रेड के लिए फंडिंग की उनकी क्षमता को रोक रहे हैं। सेल्युलर ऑपरेटर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (COAI) का कहना है कि लाइसेंस फीस में भारी कमी की जानी चाहिए। अभी यह एडजस्टेड ग्रॉस रेवेन्यू (AGR) का 3% है। इसे घटाकर 0.5%–1% किया जाना चाहिए। इससे एडमिनिस्ट्रेटिव कॉस्ट काफी हद तक कवर हो जाएगी। ऑपरेटर्स AGR का 5% डिजिटल भारत निधि में भी देते हैं।

COAI के डायरेक्टर जनरल एस.पी. कोचर ने कहा कि सुझाए गए उपाय सरकार के लिए रेवेन्यू न्यूट्रल होंगे, यानि कि सरकार की कमाई प्रभावित नहीं होगी। लेकिन टेलीकॉम कंपनियों पर कैश-फ्लो का दबाव काफी कम होगा। अगर कानूनी पेमेंट्स में कमी की जाती है तो कंपनियों के पास नेटवर्क को मजबूत करने, 5G रोलआउट में तेजी लाने और विकसित भारत विजन के साथ जुड़ी नेक्स्ट जनरेशन टेक्नोलॉजी में निवेश के लिए पूंजी रहेगी।

डिजिटल भारत निधि में एक्स्ट्रा कॉन्ट्रीब्यूशन को पॉज करने की अपील

इंडस्ट्री बॉडी ने सरकार से डिजिटल भारत निधि में एक्स्ट्रा कॉन्ट्रीब्यूशन को तब तक रोकने की अपील की है, जब तक कि डिपार्टमेंट ऑफ टेलीकम्युनिकेशन्स इस्तेमाल न हुए मौजूदा फंड का पूरा इस्तेमाल नहीं कर लेता। उनका तर्क है कि लगातार कलेक्शन से ऑपरेटर्स के फाइनेंस पर दबाव पड़ रहा है, जबकि सेक्टर को उस हिसाब से फायदा नहीं हो रहा है।

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