फर्टिलाइजर एसोसिएशन ऑफ इंडिया (FAI) ने बजट 2026 में प्रमुख कच्चे माल पर कस्टम ड्यूटी को तर्कसंगत बनाने का सुझाव दिया है, यानि कि इंडस्ट्री ड्यूटी में कमी चाहती है। साथ ही डाउनस्ट्रीम प्रोजेक्ट्स के लिए प्रोत्साहन देने और यूरिया को पोषक तत्व-बेस्ड सब्सिडी फ्रेमवर्क के तहत लाने की भी मांग की है। डाउनस्ट्रीम प्रोजेक्ट्स में कच्चे माल को तैयार उत्पादों में बदलने के अंतिम चरण शामिल होते हैं। इनमें प्रोसेसिंग, रिफाइनिंग, डिस्ट्रीब्यूशन और अंतिम उपभोक्ताओं तक मार्केटिंग पर फोकस किया जाता है।
बजट 2026-27 संसद में 1 फरवरी को पेश किया जाएगा। इंडस्ट्री ने सरकार से भारत की उर्वरक सुरक्षा को मजबूत करने, पोषक तत्वों के संतुलित इस्तेमाल को बढ़ावा देने और घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को सपोर्ट देने के लिए टारगेटेड पॉलिसी और वित्तीय उपायों पर विचार करने की अपील की है।
एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर एंड डेवलपमेंट सेस से मांगी राहत
FAI ने अमोनिया, फॉस्फोरिक एसिड, सल्फ्यूरिक एसिड, रॉक फॉस्फेट और सल्फर जैसे इनपुट पर बेसिक कस्टम ड्यूटी में छूट या कमी की मांग की है। इसने एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर एंड डेवलपमेंट सेस से राहत और इनवर्टेड GST ड्यूटी स्ट्रक्चर्स से उपजे मुद्दों के समाधान की भी मांग की है। इन स्ट्रक्चर्स के कारण इनपुट टैक्स क्रेडिट का इस्तेमाल नहीं हो पा रहा है और वह जमा होता जा रहा है।
डायरेक्ट टैक्स के मोर्चे पर फर्टिलाइजर इंडस्ट्री ने रिसर्च एंड डेवलपमेंट और किसानों की शिक्षा के लिए वेटेड डिडक्शंस को फिर से लागू करने की सिफारिश की है। इसके अलावा डाउनस्ट्रीम फर्टिलाइजर प्रोजेक्ट्स के लिए इंसेंटिव, एनर्जी-एफिशिएंट उपकरणों के लिए एक्सीलरेटेड डेप्रिसिएशन, और अनुपालन और मुकदमेबाजी के बोझ को कम करने की भी डिमांड रखी है।
फर्टिलाइजर के संतुलित इस्तेमाल की जरूरत
FAI ने मिट्टी की सेहत की रक्षा के लिए फर्टिलाइजर्स के संतुलित इस्तेमाल को बढ़ावा देने की जरूरत पर जोर दिया है। एसोसिएशन का कहना है कि यूरिया और P&K फर्टिलाइजर की कीमतों के बीच असमानताओं के कारण N:P:K खपत अनुपात असंतुलित हो गया है। FAI चाहती है कि यूरिया को पोषक तत्व-बेस्ड सब्सिडी फ्रेमवर्क के तहत लाया जाए। साथ ही नए फर्टिलाइजर प्रोडक्ट्स, बायो-फर्टिलाइजर्स और इंटीग्रेटेड पोषक तत्व प्रबंधन को बढ़ावा दिया जाए। इससे कीमतों में असमानता को ठीक करने और खेती करने के टिकाऊ तरीकों को सपोर्ट करने में मदद मिलेगी।
उद्योग ने कहा है कि स्थायी पॉलिसी सपोर्ट जरूरी है, ताकि देश में ही फॉस्फेटिक और पोटाश उर्वरकों की नई क्षमता विकसित करने, बैकवर्ड इंटीग्रेशन प्रोजेक्ट्स, और रणनीतिक विदेशी सोर्सिंग में नए निवेश को बढ़ावा मिल सके। भू-राजनीतिक तनाव, सप्लाई चेन में रुकावट और प्रमुख उत्पादक देशों की ओर से निर्यात प्रतिबंधों के कारण रॉक फॉस्फेट, फॉस्फोरिक एसिड, अमोनिया, पोटाश और सल्फर जैसे प्रमुख फर्टिलाइजर इनपुट की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में अस्थिरता देखी गई है। इसने उत्पादन लागत और आयात पर निर्भरता बढ़ा दी है।
वैसे तो मोरक्को, सऊदी अरब और कतर के साथ आपूर्ति व्यवस्था सहित समय पर सरकारी हस्तक्षेप ने उपलब्धता सुनिश्चित करने में मदद की है। लेकिन वैश्विक बाजारों में लगातार अनिश्चितता ने निवेश भावना को प्रभावित किया है।