Budget Highlights 2026: बजट में ऐलान हुआ कि मानव संसाधन सेवाओं की सप्लाई को अब TDS के तहत ठेकेदारों को किए जाने वाले भुगतानों में स्पष्ट रूप से शामिल किया जाएगा। इन सेवाओं पर TDS की दर अब केवल 1% या 2% रहेगी
वित्त वर्ष 2026-27 के लिए बजट 1 फरवरी को संसद में पेश हो गया। वित्त मंत्री ने अपने बजट भाषण में विकसित भारत की दिशा में कई ऐलान किए। उन्होंने कहा कि हमारी पहली जरूरत बुनियादी सुधारों की रफ्तार बनाए रखने की है। ऐसे सुधार जो लगातार जारी रहें और बदलते वक्त के हिसाब से काम करें। बजट ऐलान के तहत सार्वजनिक पूंजीगत खर्च को वर्ष 2026–27 के लिए बढ़ाकर ₹12.2 लाख करोड़ किया गया है।
वित्त वर्ष 2026-27 के लिए बजट 1 फरवरी को संसद में पेश हो गया। वित्त मंत्री ने अपने बजट भाषण में विकसित भारत की दिशा में कई ऐलान किए। उन्होंने कहा कि हमारी पहली जरूरत बुनियादी सुधारों की रफ्तार बनाए रखने की है। ऐसे सुधार जो लगातार जारी रहें और बदलते वक्त के हिसाब से काम करें। बजट ऐलान के तहत सार्वजनिक पूंजीगत खर्च को वर्ष 2026–27 के लिए बढ़ाकर ₹12.2 लाख करोड़ किया गया है।
वित्त मंत्री ने बजट 2026 में राजकोषीय घाटे का लक्ष्य वित्त वर्ष 2026-27 के लिए 4.3% तय किया है। मौजूदा वित्त वर्ष 2025-26 के लिए राजकोषीय घाटा 4.4% रहने का अनुमान है। वित्त वर्ष 2026-27 में डेट-टू-GDP रेशियो, GDP का 55.6% रहने का अनुमान है। वित्त मंत्री ने कहा कि भारत एक बढ़ती हुई अर्थव्यवस्था के रूप में, अपनी विस्तारवादी व्यापारिक और पूंजीगत जरूरतों के साथ, विकसित भारत की दिशा में कदम उठाना जारी रखेगा। साथ ही महत्वाकांक्षा और अनुशासन के बीच संतुलन भी बनाए रखेगा।
वित्त मंत्री ने कहा कि आत्मनिर्भर भारत को अपना लक्ष्य मानते हुए, हमने घरेलू मैन्युफैक्चरिंग क्षमता, ऊर्जा सुरक्षा का निर्माण किया है और महत्वपूर्ण उत्पादों के लिए आयात पर निर्भरता को कम किया है। साथ ही हमने रोजगार सृजन, कृषि उत्पादकता, परिवारों की खरीद शक्ति और लोगों के लिए सर्वव्यापी सेवाओं में सुधार जैसे कदम उठाए हैं। यह सुनिश्चित करने के लिए कि सरकार के हर काम का फायदा नागरिकों को मिले।
उन्होंने कहा कि हमारी सरकार का संकल्प गरीबों, अल्पसुविधा प्राप्त और वंचितों पर फोकस करना है। हमारा लक्ष्य आकांक्षाओं को उपलब्धियों में बदलना और क्षमताओं को प्रदर्शन में बदलना है। हमारी कोशिश यह सुनिश्चित करना है कि विकास का लाभ प्रत्येक किसान, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, घुमंतुओं, युवाओं, गरीबों और महिलाओं तक पहुंचे।