वेदांता की लौह अयस्क (आयरन ओर) माइनिंग कंपनी सेसा गोवा ने सरकार से लो ग्रेड के लौह अयस्क के बेनिफीसिएशन के लिए प्रोत्साहन देने का आग्रह किया है। कंपनी ने जोर देकर कहा कि प्रोसेसिंग को आर्थिक रूप से व्यवहारिक बनाने और इस क्षेत्र का विस्तार करने के लिए टारगेटेड पॉलिसी सपोर्ट और इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश महत्वपूर्ण है। लौह अयस्क बेनिफीसिएशन वह प्रक्रिया है, जिसमें सिलिका, एल्युमिना और फास्फोरस जैसी अशुद्धियों को दूर करके लो ग्रेड वाले अयस्कों में लोहे की मात्रा को बढ़ाया जाता है। इससे वे स्टील उत्पादन के लिए उपयुक्त हो जाते हैं।
भारत में स्टील की मांग 2030 तक 30 करोड़ टन तक पहुंचने का अनुमान है। इसलिए बेनिफीसिएशन के जरिए लो-ग्रेड रिजर्व का इस्तेमाल घरेलू सप्लाई सुरक्षा को बढ़ावा दे सकता है, रोजगार पैदा कर सकता है और माइनिंग व एक्सपोर्ट बढ़ाकर सरकारी रेवेन्यू में अरबों रुपये की वृद्धि कर सकता है। कंपनी ने कहा कि वर्तमान में हायर ग्रेड वाला लौह अयस्क घरेलू जरूरतों को पूरा करता है, लेकिन लो ग्रेड वाले स्टॉकपाइल में काफी संभावना है। लेकिन इसके लिए जरूरी है कि ड्यूटी और रेगुलेटरी देरी जैसी पॉलिसी रुकावटों का समाधान किया जाए। बजट 2026 को 1 फरवरी को पेश किया जाना है।
देश के पास लो-ग्रेड के लौह अयस्क का विशाल भंडार
न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, सेसा गोवा के CEO नवीन जाजू ने एक बातचीत के दौरान कहा, ''भारत के पास लो-ग्रेड के लौह अयस्क का विशाल भंडार है। हालांकि बेनिफीसिएशन प्लांट्स और सहायक इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए अधिक लागत के चलते इसका इस्तेमाल कम बना हुआ है। लो ग्रेड अयस्क के बेनिफीसिएशन के लिए किसी प्रकार के लाभकारी ड्यूटी स्ट्रक्चर या इंसेंटिव स्ट्रक्चर को लाने की तत्काल बहुत जरूरत है।''
उन्होंने लो ग्रेड अयस्क पर एक्सपोर्ट ड्यूटी का विरोध करते हुए कहा कि भारत को एक्सपोर्ट ड्यूटी की बिल्कुल भी जरूरत नहीं है, क्योंकि हमारे पास प्रचुर मात्रा में मैटेरियल है। जाजू ने सेक्टर की ग्रोथ को बढ़ावा देने के लिए फ्री प्राइसिंग की वकालत की।