Budget Expectations: पिछले साल वित्त मंत्री ने टैक्सपेयर्स को इनकम टैक्स में दी थी बड़ी राहत, क्या बजट 2026 में भी है ऐसी उम्मीद?

Budget Expectations: बजट 2025 में इनकम टैक्स में बड़ी कटौती और नए स्लैब पेश किए गए थे। इससे मिडिल क्लास टैक्सपेयर्स को फायदा हुआ था। टैक्सपेयर्स को बजट 2026 में और राहत मिलने की उम्मीद है, हालांकि एक्सपर्ट्स का अनुमान है कि बहुत कम बदलाव होंगे। विदेशी निवेश प्रोत्साहन पर ध्यान दिया जा रहा है, जिससे भविष्य की टैक्स नीतियों पर असर पड़ सकता है

अपडेटेड Jan 17, 2026 पर 10:25 AM
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Budget 2026 : पिछले बजट के बाद, टैक्सपेयर्स अब इनकम टैक्स नियमों में और राहत के लिए बजट 2026 की तरफ देख रहे हैं। हालांकि, एक्सपर्ट्स को डायरेक्ट टैक्स पर किसी बड़े ऐलान की उम्मीद नहीं है

Budget Expectations : वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के बजट 2026 की घोषणा में अब कुछ ही दिन बचे हैं। ऐसे में पूरे भारत में टैक्सपेयर्स को उम्मीद है कि उन्हें इनकम टैक्स में और राहत मिलेगी, क्योंकि पिछले साल केंद्र सरकार ने खपत बढ़ाने के लिए टैक्स दरों में भारी कटौती की घोषणा की थी। बजट 2025 में, सीतारमण ने कई घोषणाएं कीं जो टैक्सपेयर्स और सैलरी पाने वाले लोगों के लिए वरदान साबित हुईं। इनकम टैक्स दरों में कटौती से लेकर नए टैक्स स्लैब तक, बजट 2025 ने मध्यम वर्ग की कई मांगों को पूरा किया था।

पिछले बजट में वित्त मंत्री ने 12 लाख रुपए तक की आय पर इनकम टैक्स से छूट दी थी। यह मिडिल क्लास के लिए एक बड़ी राहत थी। सैलरी पाने वाले लोगों के लिए, 75,000 रुपए के स्टैंडर्ड डिडक्शन को शामिल करने के बाद इसकी इफेक्टिव लिमिट बढ़कर 12.75 लाख हो गई। इसके चलते 12.75 लाख तक की इनकम टैक्स-फ्री हो गई।

नए टैक्स सिस्टम के तहत वित्त मंत्री ने नए स्लैब रेट्स का भी एलान किया था। जिसके तहत ज़ीरो से 4 लाख रुपए तक की आय पर कोई टैक्स नहीं देना होता है। वहीं, 4 लाख से 8 लाख रुपए तक की आय पर 5 फीसदी, 8 लाख से 12 लाख रुपए की आय पर 10 फीसदी, 12 लाख से 16 लाख रुपए की आय पर 15 फीसदी, 16 लाख से 20 लाख रुपए की आय पर 20 फीसदी, 20 लाख से 24 लाख रुपए की आय पर 25 फीसदी और 24 लाख और उससे ज़्यादा की आय पर 30 फीसदी टैक्स देय है।


पिछले बजट में वित्त मंत्री ने नया इनकम टैक्स बिल, 2025 भी अनाउंस किया था जिसे बाद में लोकसभा में पास कर दिया गया। नया इनकम टैक्स एक्ट, 2025, इस साल 1 अप्रैल से लागू होने वाला है। नए कानून में टैक्स दर में कोई बदलाव नहीं किया गया है। इसका मतलब है कि आपके टैक्स के राशि पर इसका सीधा असर नहीं होगा। इसका उद्देश्य केवल टैक्स कानून को सरल और समझने में आसान बनाना है। सरकार का कहना है कि नया कानून पुराने कानून के मुकाबले करीबन आधा होगा। इसमें अनावश्यक और पुराने प्रावधान हटा दिए गए हैं। इससे आम आदमी और बिजनेस दोनों के लिए टैक्स प्रक्रिया आसान हो जाएग। साथ ही नए कानून से टैक्स विवाद और लंबी कानूनी लड़ाई की संभावना भी कम होगी।

वित्त मंत्रीसीतारमण ने TDS (टैक्स डिडक्टेड एट सोर्स) के काम करने के तरीके में भी कई बदलाव किए थे। किराए पर TDS की लिमिट 2.4 लाख रुपए से बढ़ाकर 6 लाख रुपए कर दी गई थी। इससे छोटे मकान मालिकों के लिए कंप्लायंस का झंझट कम हो गया। सीनियर सिटिजन्स की ब्याज इनकम के लिए थ्रेशहोल्ड 50,000 रुपए से दोगुना करके 1 लाख रुपए कर दी गई थी।

पिछले बजट में वित्त मंत्री ने घोषणा की थी कि अपडेटेड ITR (ITR (U)) पहले के दो साल के बजाय, अब चार साल तक फाइल किए जा सकते हैं, जिससे टैक्सपेयर्स को अपने इनकम टैक्स रिटर्न को अपडेट करने के लिए ज़्यादा समय मिलेगा।

क्या बजट 2026 में इनकम टैक्स दरों में और कटौती की है उम्मीद?

पिछले बजट के बाद, टैक्सपेयर्स अब इनकम टैक्स नियमों में और राहत के लिए बजट 2026 की तरफ देख रहे हैं। हालांकि, एक्सपर्ट्स को डायरेक्ट टैक्स पर किसी बड़े ऐलान की उम्मीद नहीं है।

ग्रांट थॉर्नटन भारत में टैक्स पार्टनर ऋचा साहनी का कहना है कि पिछले साल स्लैब रेट में किए गए बदलावों और टैक्स कलेक्शन पर उसके असर को देखते हुए, सरकार के लिए इस साल कोई और बदलाव करना शायद मुमकिन न हो। हालांकि, अगर नए टैक्स सिस्टम में स्लैब रेट में सालाना बदलाव के लिए महंगाई और जीवन-यापन की लागत जैसे पैरामीटर पर विचार किया जाता है,तो इससे टैक्स देने वालों के एक बड़े हिस्से को फायदा हो सकता है और नए टैक्स सिस्टम को और लोकप्रिय बनाने में मदद मिल सकती है।

 

 

 

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