Budget 2026: केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शनिवार 10 जनवरी को नई दिल्ली में राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के वित्त मंत्रियों के साथ एक प्री-बजट परामर्श बैठक की। यह बैठक वित्त वर्ष 2026–27 के लिए 1 फरवरी को पेश होने वाले आम बजट से पहले आयोजित की गई, ताकि राज्यों की प्राथमिकताओं और सुझावों को बजट प्रक्रिया में शामिल किया जा सके।
बैठक में केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी के अलावा मणिपुर के राज्यपाल, दिल्ली, गोवा, हरियाणा, जम्मू-कश्मीर, मेघालय और सिक्किम के मुख्यमंत्रियों ने हिस्सा लिया। वहीं अरुणाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश, ओडिशा, राजस्थान और तेलंगाना के उपमुख्यमंत्रियों सहित राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के वित्त मंत्री तथा अन्य प्रतिनिधि भी मौजूद रहे।
केंद्र सरकार की ओर से वित्त मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी भी बैठक में शामिल हुए। इनमें आर्थिक कार्य विभाग, व्यय विभाग और राजस्व विभाग के सचिवों के साथ-साथ केंद्र और राज्य/केंद्रशासित प्रदेश सरकारों के अन्य अधिकारी उपस्थित थे।
परामर्श के दौरान राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों ने बजट 2026–27 के लिए अपने सुझाव रखे। कई राज्यों ने विशेष रूप से राज्यों के लिए पूंजी निवेश हेतु विशेष सहायता योजना (SASCI) को जारी रखने और इसके लिए अधिक आवंटन की जरूरत पर जोर दिया। राज्यों का कहना था कि यह योजना परिसंपत्ति निर्माण को गति देने और राज्यों व विधानमंडल वाले केंद्रशासित प्रदेशों में पूंजीगत निवेश को समर्थन देने में अहम भूमिका निभा रही है।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2020–21 से अब तक केंद्र सरकार इस योजना के तहत राज्यों को 50 वर्षों की ब्याज-मुक्त ऋण सुविधा के रूप में ₹4.25 लाख करोड़ से अधिक की राशि जारी कर चुकी है। राज्यों ने इसे बुनियादी ढांचे के विकास और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए प्रभावी बताया।
प्री-बजट परामर्श बैठकें सरकार की उस व्यापक परामर्श प्रक्रिया का हिस्सा हैं, जिसके तहत आम बजट से पहले सभी हितधारकों की राय और सुझाव जुटाए जाते हैं। इससे बजट को अधिक समावेशी और जमीनी जरूरतों के अनुरूप बनाने में मदद मिलती है।
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