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Union Budget 2025: बजट और वोट ऑन अकाउंट में क्या फर्क है?

इस बार केंद्र की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार 1 फरवरी, 2025 को फुल बजट पेश करेगी। फुल बजट में आम तौर पर सरकार की आय, खर्च, टैक्स के नियमों में बदलाव, अलग-अलग मंत्रालयों के बजट का आवंटन का प्रस्ताव शामिल होता है

MoneyControl Newsअपडेटेड Dec 20, 2024 पर 12:28 PM
Union Budget 2025: बजट और वोट ऑन अकाउंट में क्या फर्क है?
हर पांच साल पर लोकसभा चुनाव होते हैं। लोकसभा चुनाव वाले साल में केंद्र सरकार फुल बजट पेश करने से बचती है।

सरकार को हर नए वित्त वर्ष की अपनी इनकम और खर्च के अनुमान पर संसद की मंजूरी हासिल करनी पड़ती है। इसके लिए सरकार बजट पेश करती है। केंद्र सरकार के बजट को यूनियन बजट कहा जाता है। सरकार हर साल 1 फरवरी को यूनियन बजट पेश करती है। लेकिन, कुछ स्थितियों में सरकार यूनियन बजट की जगह अंतरिम बजट या वोट ऑन अकाउंट पेश करती है। सवाल है कि बजट और वोट ऑन अकाउंट में क्या फर्क है? आइए इसका जवाब जानने की कोशिश करते हैं।

वोट ऑन अकाउंट का मतलब क्या है?

हर पांच साल पर लोकसभा चुनाव होते हैं। लोकसभा चुनाव वाले साल में केंद्र सरकार फुल बजट (Full Budget) पेश करने से बचती है। इसकी वजह यह है कि लोकसभा चुनाव के नतीजों से पहले यह पता नहीं होता कि कौन सी पार्टी नई सरकार बनाएगी। इसलिए सरकार नई सरकार बनने तक के जरूरी खर्चों के लिए वोट ऑन अकाउंट (Vote on Account) पेश करती है। आम तौर पर यह दो या चार महीनों के खर्च के लिए होता है। इस पर सरकार संसद की मंजूरी हासिल करती है। वोट ऑन अकाउंट का प्रावधान संविधान के आर्टिकल 116 में है। इसमें कहा गया है कि जरूरत पड़ने पर सरकार अपने जरूरी खर्चों के लिए कंसॉलिडेटेड फंड का इस्तेमाल कर सकती है।

फुल बजट सरकार कब पेश करती है?

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