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Union Budget 2026: प्राइवेट इनवेस्टमेंट बढ़ाने के उपाय शुरू करने के लिए बजट एक बड़ा मौका

जीडीपी ग्रोथ 7-8 फीसदी के बीच है, जो अच्छी कही जाएगी। लेकिन, प्राइवेट कैपिटल एक्सपेंडिचर अब भी कमजोर बनी हुई है। इसका असर ग्रोथ और रोजगार के नए मौके पैदा करने पर पड़ रहा है। इससे ग्रोथ के लिए सरकारी खर्च पर निर्भरता बढ़ी है

MoneyControl Newsअपडेटेड Dec 18, 2025 पर 9:17 PM
Union Budget 2026: प्राइवेट इनवेस्टमेंट बढ़ाने के उपाय शुरू करने के लिए बजट एक बड़ा मौका
संपत्ति के मामले में असमानता हमेशा से एक बड़ी समस्या रही है। लेकिन, 2014 से 2014 के बीच यह असमानता तेजी से बढ़ी है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने बीते एक दशक में प्राइवेट इनवेस्टमेंट को बढ़ावा देने के लिए कई रिफॉर्म्स किए हैं। इनमें बैंकों की बैलेंसशीट की सफाई, कॉर्पोरेट टैक्स के रेट्स में कमी, सरकार के कैपिटल एक्सपेंडिचर में इजाफा और मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के लिए पीएलआई जैसी स्कीम शामिल हैं। सालाना 12 लाख तक की इनकम को टैक्स-फ्री किया है और डिमांड बढ़ाने के लिए जीएसटी के रेट्स में कमी की है।

प्राइवेट कैपिटल एक्सपेंडिचर नहीं बढ़ रहा

जीडीपी ग्रोथ 7-8 फीसदी के बीच है, जो अच्छी कही जाएगी। लेकिन, प्राइवेट कैपिटल एक्सपेंडिचर अब भी कमजोर बनी हुई है। इसका असर ग्रोथ और रोजगार के नए मौके पैदा करने पर पड़ रहा है। इससे ग्रोथ के लिए सरकारी खर्च पर निर्भरता बढ़ी है। सवाल है कि आखिर प्राइवेट सेक्टर में कैपिटल एक्सपेंडिचर क्यों नहीं बढ़ रहा?

सरकार के उपायों का कुछ सेक्टर को फायदा

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