अर्थव्यवस्था को अधिक मजबूत और आत्मनिर्भर बनाने की जरूरत, बजट में लॉन्ग टर्म विजन पर हो फोकस: रघुराम राजन

Budget 2026: राजन ने कहा कि अब इस बात पर अधिक ध्यान देने का समय है कि भारत की आर्थिक वृद्धि को और बढ़ाने के लिए क्या किया जाए। भारत, स्वाभाविक रूप से किसी भी ग्लोबल सप्लाई चेन का हिस्सा नहीं है। आगे चलकर सप्लाई चेन्स में विविधता लाना महत्वपूर्ण होगा

अपडेटेड Jan 28, 2026 पर 1:15 PM
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वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी को केंद्रीय बजट 2026 पेश करेंगी।

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन ने सुझाव दिया है कि आगामी बजट को एक लॉन्ग टर्म विजन के साथ इंटीग्रेट किया जाना चाहिए। ऐसा इसलिए ताकि भारतीय अर्थव्यवस्था को अधिक मजबूत और आत्मनिर्भर बनाया जा सके। साथ ही ग्रोथ को गति दी जा सके क्योंकि दुनिया एक बेहद खतरनाक दौर से गुजर रही है। न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, राजन ने एक वीडियो इंटरव्यू में कहा कि पहले भारत में पंचवर्षीय योजनाएं थीं लेकिन तब भी देश का बजट अच्छी तरह से इंटीग्रेट नहीं था।

उन्होंने कहा, ‘‘मेरा मानना ​​है कि वित्त वर्ष 2026-27 का केंद्रीय बजट एक लॉन्ग टर्म विजन के साथ इंटीग्रेट होना चाहिए। हम एक अर्थव्यवस्था के रूप में अधिक मजबूत कैसे बनें, अधिक स्वतंत्र कैसे बनें और तेजी से ग्रोथ कैसे करें, ताकि अन्य सभी देश भारत के दोस्त बनना चाहें। इसके लिए काफी मेहनत की जरूरत है और मुझे उम्मीद है कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का अगला बजट हमें उस दिशा में ले जाएगा।’’

सीतारमण 1 फरवरी को केंद्रीय बजट 2026 पेश करेंगी। राजन ने कहा कि वैश्विक और भारतीय अर्थव्यवस्था दोनों के लिए यह बेहद खतरनाक समय है। हालांकि आर्टिफीशियल इंटेलीजेंस (AI) में भारी निवेश से हमें कई पॉजिटिव अवसर भी मिल रहे हैं। राजन वर्तमान में शिकागो बूथ में ‘कैथरीन डूसैक मिलर डिस्टिंग्यूशेड सर्विस में फाइनेंस प्रोफेसर हैं।


हमें निचोड़ सकने वाली एंटिटीज पर बेहद ज्यादा निर्भरता एक बड़ा खतरा

रिपोर्ट के मुताबिक, राजन का यह भी कहना है कि उन एंटिटीज पर अत्यधिक निर्भर होने से भी हमें बहुत खतरा है, जो हमें निचोड़ सकती हैं और हमें कमजोर बना सकती हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि हमारे पास कोई प्राकृतिक बाजार नहीं है, जो पास में हो, समृद्ध हो, जिसे हम अपने अलावा दूसरों को सप्लाई कर सकें।’’ उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि वह समझते हैं कि आगामी बजट में कुछ ऐसी टैरिफ दरों में कटौती हो सकती है, जो भारत को सप्लाई चेन में बेहतर ढंग से इंटीग्रेट होने से रोकती हैं। यह देखते हुए कि भारत सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था है, राजन ने कहा, "हमें बांग्लादेश, श्रीलंका, नेपाल सहित अपने पड़ोसियों से जितने हो सकें, उतनी तरह के रिश्ते बनाने होंगे।"

ग्रोथ बढ़ाने के लिए क्या करें, इस पर ज्यादा ध्यान देने का वक्त

अमेरिका के साथ व्यापारिक तनाव और बढ़ने पर घरेलू सुधारों और बाहरी नीतियों का कौन सा कॉम्बिनेशन भारत को स्थिति से निपटने में मदद करेगा? इस सवाल पर राजन ने कहा कि भारत के लिए सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि वह कुछ समय के लिए बाहरी दुनिया से खुद को अलग कर ले....आत्मनिरीक्षण करे कि ग्रोथ रेट बढ़ाने के लिए उसे क्या करने की जरूरत है।

नरेंद्र मोदी सरकार द्वारा हाल ही में किए गए सुधारों का उल्लेख करते हुए राजन ने कहा कि अब इस बात पर अधिक ध्यान देने का समय है कि भारत की आर्थिक वृद्धि को और बढ़ाने के लिए क्या किया जाए। राजन के मुताबिक, ‘‘हमने 1990 के दशक से लेकर 2000 के दशक की शुरुआत तक कई बड़े सुधार किए, फिर कुछ समय के लिए कोई खास सुधार नहीं हुए। मुझे लगता है कि अब उस प्रक्रिया को फिर से शुरू करने का समय आ गया है।’’

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सप्लाई चेन्स में विविधता लाना महत्वपूर्ण

राजन ने बताया कि भारत, स्वाभाविक रूप से किसी भी ग्लोबल सप्लाई चेन का हिस्सा नहीं है क्योंकि यह चीन को छोड़कर किसी भी प्रमुख अर्थव्यवस्था के निकट नहीं है। वहीं चीन के साथ इसका सीमा विवाद है। भारत के लिए आगे चलकर चीन के साथ-साथ यूरोप, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, पश्चिम एशिया और पूर्वी एशियाई देशों सहित अपनी सप्लाई चेन्स में विविधता लाना महत्वपूर्ण होगा।

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