सरकार कई छोटे अपराधों में सजा के प्रावधान को खत्म करना चाहती है। इसके लिए 33 मंत्रालयों और करीब 100 केंद्रीय अधिनियम से जुड़े करीब 350 अतिरिक्त प्रावधानों की पहचान की गई है। यह पहले से चल रही जनविश्वास पहल का विस्तार है।
सरकार कई छोटे अपराधों में सजा के प्रावधान को खत्म करना चाहती है। इसके लिए 33 मंत्रालयों और करीब 100 केंद्रीय अधिनियम से जुड़े करीब 350 अतिरिक्त प्रावधानों की पहचान की गई है। यह पहले से चल रही जनविश्वास पहल का विस्तार है।
सरकार के इस कदम से बिजनेस और कंप्लायंस से जुड़े उल्लंघन के मामलों में आपराधिक लायबिलिटी में कमी लाने पर सरकार के नए फोकस के बारे में पता चलता है। इसके तहत खासकर प्रक्रिया से जुड़े लैप्सेज और टेक्निकल डिफॉल्ट्स के मामले आएंगे।
सरकार के सीनियर अधिकारियों ने बताया कि जिन नए प्रावधानों की पहचान की गई है, उन्हें या तो विस्तारित जन विश्वास II बिल में शामिल किया जाएगा या नया कानूनी पैकेज पेश होगा। एक सीनियर सरकारी अधिकारी ने मनीकंट्रोल को बताया, "डीक्रिमिनलाइजेशन प्राथमिकता वाले रिफॉर्म्स में शामिल है।"
उन्होंने कहा कि 33 मंत्रालयों से जुड़े करीब 350 प्रावधानों की पहचान की गई है, जो जिन विश्वास II में शामिल प्रावधानों के अतिरिक्त हैं। इस कवायद में करीब 100 केंद्रीय अधिनियम के शामिल होने की संभावना है। हालांकि, हर कानून में सिर्फ सीमित और खास कानूनी प्रावधानों में संसोधन का प्रस्ताव है।
सरकार का फोकस लाइसेंस, रिन्यूअल्स और इंफॉर्मेशन फाइलिंग्स जैसे प्रोसिजरल और कंप्लांयस से संबंधित जरूरतों पर है। अभी इनमें छोटे और टेक्निकल डिफॉल्ट पर भी आपराधिक प्रावधान लागू होते हैं। सरकार की इस नई पहल में अतिरिक्त करीब 350 प्रावधान शामिल होंगे, जो पहले शुरू की गई ऐसी कवायद के मुकाबले ज्यादा हैं।
उम्मीद है कि सरकार के इस कदम में कई तरह के सेक्टर्स शामिल होंगे। जिन सेक्टर्स से जुड़े प्रावधानों में बदलाव का प्रस्ताव है, उनमें टेक्सटाइल्स, स्टील और हेवी इंडस्ट्रीज शामिल हैं। कंपनीज एक्ट और माइनंस एक्ट के प्रावधान भी इस कवायद में शामिल हैं। सूत्र ने बताया, "ये टैक्स से जुड़े प्रावधान नहीं हैं। इनमें ज्यादातर नॉन-फाइनेंशियल प्रावधान हैं, जो कंप्लायंस से जुड़े हैं।"
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सरकार के सूत्रों ने बताया कि सिर्फ उन प्रावधानों में बदलाव का प्रस्ताव है, जिनको लेकर संबंधित मंत्रालयों के बीच सहमति है। इन प्रावधानों में सिविल पेनाल्टीज और एडमिनिस्ट्रेटिव एक्शन के जरिए रेगुलेटरी कंट्रोल बना रहेगा। जन विश्वास (अमेंडमेंट ऑफ प्रोविजंस) बिल, 2025 18 अगस्त, 2025 को लोकसभा में पेश हुआ था। इसे व्यापक विचार के लिए प्रवर समिति को भेजा गया था।
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