भारत का व्यापार घाटा (Trade Deficit) नवंबर में कम होकर 24.53 अरब अमेरिकी डॉलर रहा। इस दौरान देश का निर्यात 19.37 प्रतिशत बढ़कर 38.13 अरब अमेरिकी डॉलर हो गया। आयात 1.88 प्रतिशत घटकर 62.66 अरब अमेरिकी डॉलर रह गया। सोमवार को जारी सरकारी आंकड़ों में यह जानकारी मिली। अक्टूबर महीने में व्यापार घाटा बढ़कर 41.68 अरब डॉलर रहा था। अक्टूबर में निर्यात 11.8 प्रतिशत घटकर 34.38 अरब डॉलर रहा था। वहीं आयात 16.63 प्रतिशत बढ़कर 76.06 अरब डॉलर हो गया था।
व्यापार घाटा, निर्यात (Export) और आयात (Import) के बीच का अंतर होता है। अगर आयात, निर्यात से ज्यादा होता है तो ट्रेड डेफिसिट की स्थिति बनती है। वहीं निर्यात के आयात से ज्यादा होने पर ट्रेड सरप्लस की स्थिति बनती है।
नवंबर में पिछले 10 साल का सबसे अधिक निर्यात
वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल का कहना है कि नवंबर में हुए निर्यात ने इस साल अक्टूबर में निर्यात में हुए नुकसान की भरपाई कर दी। नवंबर में 38.13 अरब अमेरिकी डॉलर का निर्यात पिछले 10 साल में सबसे अधिक आंकड़ा है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, अप्रैल से नवंबर 2025 के दौरान देश का कुल निर्यात 2.62 प्रतिशत बढ़कर 292.07 अरब अमेरिकी डॉलर हो गया। इन 8 महीनों में आयात 5.59 प्रतिशत बढ़कर 515.21 अरब अमेरिकी डॉलर रहा।
वनस्पति तेल का आयात 28 प्रतिशत गिरा
इस बीच यह भी खबर है कि देश में वनस्पति तेल का आयात नवंबर में सालाना आधार पर 28 प्रतिशत की तेज गिरावट के साथ 11.83 लाख टन रह गया। नवंबर 2024 में यह आंकड़ा 16.50 लाख टन था। गिरावट मुख्य रूप से रिफाइंड पामोलीन के आयात में भारी कमी आने से आई है। तेल और तिलहन उद्योगों के संगठन 'सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स ऑफ इंडिया' (एसईए) ने यह जानकारी दी है। देश में नया तेल सत्र नवंबर 2025-अक्टूबर 2026 तक रहेगा। गैर-खाद्य तेलों का आयात नवंबर में घटकर 32,877 टन रह गया।
पाम तेल का कुल आयात भी नवंबर 2025 में 25 प्रतिशत घटकर 6.32 लाख टन रह गया। एक साल पहले यह 8.42 लाख टन था। कच्चे पाम तेल का आयात बढ़कर 6.26 लाख टन हो गया, जो एक साल पहले 5.47 लाख टन था। कच्चे सूरजमुखी तेल का आयात भी घटकर 1.42 लाख टन रह गया, जो एक साल पहले 3.40 लाख टन था। कच्चे सोयाबीन तेल का आयात नवंबर 2025 में 4.07 लाख टन से घटकर 3.70 लाख टन हो गया।