Indian Economy Q3 Growth: दिसंबर तिमाही में नई जीडीपी सीरीज में 7.8% रही इकोनॉमी की ग्रोथ

Indian Economy Q3 Growth: मिनिस्ट्री ऑफ स्टैटिस्टिक्स ने 27 फरवरी को जीडीपी के डेटा जारी किए। पहले सरकार ने वित्त वर्ष 2025-26 की जीडीपी ग्रोथ 7.4 फीसदी रहने का अनुमान लगाया था। इसके लिए 2011-12 बेस ईयर का इस्तेमाल किया गया था। सरकार ने पिछले सालों की ग्रोथ के अनुमान के डेटा को भी संशोधित किया है

अपडेटेड Feb 27, 2026 पर 6:00 PM
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दिसंबर तिमाही के डीडीपी ग्रोथ के डेटा से इस वित्त वर्ष में ग्रोथ की रफ्तार अच्छी रहने के संकेत मिले हैं।

Indian Economy Q3 Growth: दिसंबर तिमाही में इंडियन इकोनॉमी की ग्रोथ हाल में जारी नई जीडीपी सीरीज में 7.8 फीसदी रही। सरकार ने इस वित्त वर्ष (2025-26) के लिए जीडीपी ग्रोथ के अपने अनुमान में संशोधन किया है। संशोधित अनुमान के हिसाब से इस वित्त वर्ष में रियल जीडीपी ग्रोथ 7.6 फीसदी और नॉमिनल जीडीपी ग्रोथ 8.6 फीसदी रह सकती है। ये दोनों अनुमान बेस ईयर 2011-12 के आधार पर व्यक्त अनुमान से ज्यादा हैं।

पहले FY26 में ग्रोथ का अनुमान 7.4 फीसदी था

मिनिस्ट्री ऑफ स्टैटिस्टिक्स ने 27 फरवरी को जीडीपी के डेटा जारी किए। पहले सरकार ने वित्त वर्ष 2025-26 की जीडीपी ग्रोथ 7.4 फीसदी रहने का अनुमान लगाया था। इसके लिए 2011-12 बेस ईयर का इस्तेमाल किया गया था। सरकार ने पिछले सालों की ग्रोथ के अनुमान के डेटा को भी संशोधित किया है। FY25 की ग्रोथ को 6.5 से संशोधित कर 7.1 कर दिया गया है। FY24 की ग्रोथ को संशोधित कर 7.2 फीसदी कर दिया गया है। पुरानी सीरीज में ग्रोथ 9.2 फीसदी थी।


FY26 में जीडीपी ग्रोथ स्ट्रॉन्ग रहने की उम्मीद

दिसंबर तिमाही के डीडीपी ग्रोथ के डेटा से इस वित्त वर्ष में ग्रोथ की रफ्तार अच्छी रहने के संकेत मिले हैं। भारत की अर्थव्यवस्था की ग्रोथ इस वित्त वर्ष की पहली तिमाही में 6.7 फीसदी थी, जबकि दूसरी तिमाही में यह 8.4 फीसदी थी। इस वित्त वर्ष की पहली छमाही की ग्रोथ को भी संशोधित किया गया है। पहली तिमाही की ग्रोथ के अनुमान को संशोधित कर 6.7 फीसदी और दूसरी तिमाही की ग्रोथ के अनुमान को संशोधित कर 8.4 फीसदी किया गया है। पहले यह अनुमान क्रमश: 7.8 फीसदी और 8.2 फीसदी थे।

नई सीरीजी में इम्प्रूव्ड एस्टिमेशन तकनीक का इस्तेमाल

संशोधित जीडीपी फ्रेमवर्क में कंपनियों के व्यापक डेटाबेस का इस्तेमाल किया गया है। इससे कवर्ड बिजनेस यूनिट्स का दायरा काफी बढ़ा है। अधिकारियों ने बताया कि इस मेथडलॉजी में इम्प्रूव्ड एस्टिमेशन तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। इसमें डबल डिफ्लेशन और रिफाइंड एक्स्ट्रापोलेशन मेथड्स शामिल हैं। इससे सेक्टर्स में आर्थिक गतिविधियों की सही तस्वीर का पता चलेगा।

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नई सीरीज के इस्तेमाल से बदलेगा फिस्कल मैथ

ICRA की चीफ इकोनॉमिस्ट अदिती नायर ने जीडीपी डेटा आने के बाद कहा कि नई 2022-23 जीडीपी बेस सीरीज के इस्तेमाल से देश के फिस्कल मैथ्स में बड़ा बदलाव आएगा। उन्होंने कहा कि ध्यान देने वाली बात है कि इंडियन इकोनॉमी का साइज 2011-12 बेस के मुकाबले थोड़ा छोटा है। FY24 और FY25 की नॉमिनल जीडीपी प्रत्येक साल में पुरानी सीरीज के अनुमान से 3.8 फीसदी कम है।

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