पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण भारत के 11.8 अरब डॉलर मूल्य के कृषि और खाद्य उत्पादों (एग्री एंड फूड प्रोडक्ट्स) के निर्यात पर संकट मंडरा रहा है। इस तनाव से समुद्री मार्ग बाधित हो रहे हैं। बीमा और लॉजिस्टिक्स की लागत बढ़ने से अनिश्चितता पैदा हो गई है। यह बात आर्थिक शोध संस्थान 'ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनीशिएटिव' (GTRI) ने कही है। इसके अनुसार, साल 2025 में भारत ने इस क्षेत्र को 11.8 अरब डॉलर मूल्य के अनाज, फल, सब्जियां, डेयरी उत्पाद और मसालों का निर्यात किया था। यह भारत के कुल कृषि निर्यात का 21.8 प्रतिशत है।
भौगोलिक निकटता और भारतीयों की बड़ी आबादी के कारण खाड़ी देश भारतीय खाद्य उत्पादों के लिए एक स्वाभाविक बाजार रहे हैं। न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, GTRI का कहना है, "हालांकि, क्षेत्र में जारी संघर्ष से समुद्री मार्ग बाधित हो रहे हैं, बीमा लागत बढ़ रही है और लॉजिस्टिक्स में अनिश्चितता पैदा हो रही है।"
लड़ाई का मौजूदा दौर 28 फरवरी 2026 को शुरू हुआ, जब ईरान पर US और इजरायल ने हमले कर दिए। इन हमलों में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई और इस्लामिक रिपब्लिक के दूसरे बड़े लोग मारे गए। इसके बाद ईरान ने भी जवाब देते हुए मिसाइल और ड्रोन से इजरायल पर हमले कर दिए। साथ ही मध्यपूर्व के कई देशों में भी अमेरिकी मिलिट्री बेस और इजरायल से जुड़े एसेट्स को निशाना बनाकर हमले किए।
2025 में पश्चिम एशिया को भेजे 7.48 अरब डॉलर के अनाज, फल, सब्जियां, मसाले
आंकड़ों के मुताबिक, भारत ने 2025 में पश्चिम एशिया को 7.48 अरब डॉलर के अनाज, फल, सब्जियां और मसाले भेजे, जो भारत के इस श्रेणी के कुल वैश्विक निर्यात का 29.2 प्रतिशत है। भारत से पश्चिम एशिया में जाने वाली प्रमुख चीजों में चावल, केला, प्याज व अन्य सब्जियां, दाल, नट्स, कॉफी, चाय और कई तरह के मसाले शामिल हैं। भारत ने 2025 में इस क्षेत्र को 4.43 अरब डॉलर का चावल निर्यात किया, जो उसके कुल वैश्विक चावल निर्यात का 36.7 प्रतिशत है। जारी संघर्ष से चावल के निर्यात पर सबसे बड़ा असर पड़ने की आशंका है। इससे पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के किसान सीधे प्रभावित हो सकते हैं।
इसके अलावा, पिछले साल भारत ने संयुक्त अरब अमीरात (UAE), सऊदी अरब और ईरान जैसे देशों को भारी मात्रा में केले (39.65 करोड़ डॉलर), प्याज-लहसुन, कॉफी, चाय और समुद्री व मांस उत्पादों का निर्यात किया। पिछले साल भारत ने इस इलाके में जो दूसरे बड़े प्रोडक्ट एक्सपोर्ट किए, उनमें जायफल, जावित्री और इलायची (29.55 करोड़ डॉलर), जीरा और धनिया जैसे मसाले (16.3 करोड़ डॉलर), अदरक और हल्दी (17.3 करोड़ डॉलर), कॉफी (24.07 करोड़ डॉलर), चाय (41.01 करोड़ डॉलर), प्रोसेस्ड फूड, चीनी और कोको से बनी चीजें (1.35 अरब डॉलर), और मछली, मीट, फ्रोजन और प्रोसेस्ड प्रोडक्ट (1.81 अरब डॉलर) शामिल हैं।
इसके अलावा भारत ने 2025 में पश्चिम एशिया को 28.11 करोड़ डॉलर के डेयरी प्रोडक्ट एक्सपोर्ट किए, जो भारत के कुल डेयरी एक्सपोर्ट का 28.9 प्रतिशत है। इसी तरह, देश ने 2025 में पश्चिम एशिया को 19.75 करोड़ डॉलर कीमत के एल्कोहलिक और नॉन-एल्कोहलिक बेवरेज भेजे। इन शिपमेंट का इस कैटेगरी में भारत के कुल एक्सपोर्ट में 43.3 प्रतिशत हिस्सा रहा।
10 साल में पश्चिम एशियाई मार्केट पर बहुत ज्यादा निर्भर हो गया कृषि निर्यात
पिछले एक दशक में भारत का कृषि निर्यात पश्चिम एशियाई मार्केट पर बहुत ज्यादा निर्भर हो गया है। खासकर चावल, केले, मसाले, मीट और डेयरी प्रोडक्ट जैसे प्रोडक्ट्स के लिए। अब जारी संघर्ष, शिपिंग रूट्स में व्यवधान और बढ़ती बीमा लागत निर्यातकों के लिए अनिश्चितता पैदा कर रही है। इसका सीधा असर देश के कई राज्यों के किसानों और फूड प्रोसेसिंग इंडस्ट्री पर पड़ सकता है।