स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के आसपास बढ़ते भूराजनीतिक तनाव से भारत के नॉन-ऑयल एक्सपोर्ट्स के दसवें हिस्से से ज्यादा को खतरा हो सकता है। यह बात मनीकंट्रोल के एक एनालिसिस से सामने आई है। भारत के नॉन-ऑयल एक्सपोर्ट में जिन प्रमुख सेक्टर्स पर असर पड़ेगा, उनमें इंजीनियरिंग गुड्स, जेम्स और ज्वेलरी, फूड प्रोडक्ट्स, केमिकल और कंस्ट्रक्शन का सामान शामिल हैं। ये सभी समुद्री लॉजिस्टिक्स पर बहुत ज्यादा निर्भर हैं।
28 फरवरी 2026 को इजराइल और अमेरिका ने ईरान के खिलाफ खुली जंग का ऐलान करते हुए एयर स्ट्राइक की। कुछ ही घंटों में ईरान ने भी जवाब देते हुए मिसाइल और ड्रोन से इजराइल पर हमले कर दिए। इससे मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ने का डर पैदा हो गया है। इसके कारण पूरे पश्चिम एशिया में समुद्री मार्ग से ट्रेड में रुकावट आ सकती है।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी के बीच स्थित एक अत्यंत संकरा और रणनीतिक समुद्री मार्ग है। यह ईरान और ओमान/यूएई के बीच स्थित है। दुनिया के कच्चे तेल का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से होकर गुजरता है। अगर यहां तनाव या संघर्ष बढ़ता है, तो वैश्विक तेल आपूर्ति और कीमतों पर असर पड़ सकता है।
भारत के लिए रिस्क केवल एनर्जी सिक्योरिटी तक सीमित नहीं
भारत के लिए रिस्क केवल एनर्जी सिक्योरिटी तक सीमित नहीं है। भारत के 3 बड़े क्रूड सप्लायर होर्मुज पैसेज से तेल भेजते हैं, वहीं नॉन-ऑयल ट्रेड का एक बड़ा हिस्सा भी इस इलाके से होकर गुजरता है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से आयात करता है। इसलिए इस मार्ग में किसी भी तरह की रुकावट भारत की अर्थव्यवस्था और व्यापार पर असर डाल सकती है।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से कितना शिपमेंट
भारत ने पिछले साल स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से जुड़े शिपिंग रूट पर निर्भर खाड़ी देशों को लगभग 47.6 अरब डॉलर का नॉन-ऑयल सामान एक्सपोर्ट किया। यह भारत के कुल नॉन-ऑयल एक्सपोर्ट का लगभग 13.2 प्रतिशत है। भारत के कुल नॉन-ऑयल एक्सपोर्ट के 360.2 अरब डॉलर होने का अनुमान है। इससे समझ सकते हैं कि अगर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से शिपिंग फ्लो में रुकावट आती है तो कितना बड़ा रिस्क हो सकता है।
भारत के रिस्क में सबसे बड़ा हिस्सा यूनाइटेड अरब अमीरात का है, जिसे भारत से नॉन-ऑयल एक्सपोर्ट 28.5 अरब डॉलर का है। इसके बाद सऊदी अरब है, जिसे नॉन-ऑयल एक्सपोर्ट 11.7 अरब डॉलर है। रणनीतिक रूप से दूसरे महत्वपूर्ण मार्केट्स में ईराक, कुवैत, कतर और ईरान शामिल हैं। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज रूट में कोई भी रुकावट, भले ही वह अस्थायी हो, माल ढुलाई की लागत बढ़ा सकती है, डिलीवरी में देरी कर सकती है और एशिया और यूरोप में ट्रेड फ्लो को बदल सकती है।