अब बोल्ड होकर निवेश करे भारतीय उद्योग जगत, ग्रोथ के अगले चरण को बढ़ाने में दे योगदान: PM मोदी

मोदी ने कहा कि नीतियां केवल सक्षम वातावरण तैयार कर सकती हैं। बदलाव के अगले चरण के लिए निजी क्षेत्र की निर्णायक भागीदारी जरूरी है। सरकार का फोकस इंफ्रास्ट्रक्चर, आर्थिक स्थिरता, रेगुलेटरी रिफॉर्म्स और ट्रेड एक्सेस पर है

अपडेटेड Feb 15, 2026 पर 11:14 PM
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पिछले 10 सालों में सरकार ने भारत की ग्रोथ स्ट्रैटेजी को रिकॉर्ड पूंजीगत खर्च के इर्द-गिर्द केंद्रित किया है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि अब निजी क्षेत्र (प्राइवेट सेक्टर) के लिए आगे बढ़ने, बोल्ड होकर निवेश करने और ग्रोथ के अगले चरण को आगे बढ़ाने का समय आ गया है। न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, पीएम मोदी ने इंटरव्यू में कहा कि उनकी सरकार ने अपने कार्यकाल में पहले के प्रशासन द्वारा छोड़ी गई संरचनात्मक कमियों को दूर किया, साहसिक सुधार लागू किए और विकसित भारत की नींव रखी। यह भी कहा कि हाल ही में पेश किया गया वार्षिक बजट उस यात्रा का अगला स्तर है।

पीएम के मुताबिक, ‘‘वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में पूंजीगत खर्च 12.2 लाख करोड़ रुपये तक बढ़ाया गया है। यह 2013 की तुलना में 5 गुना अधिक है। यह कदम इंफ्रास्ट्रक्चर के निर्माण, लॉजिस्टिक्स के विस्तार और उभरते क्षेत्रों में निवेश को प्राथमिकता देने की सरकार की रणनीति को और मजबूत करता है।’’

पीएम मोदी ने कहा, ‘‘बजट में रेलवे, सड़क, डिजिटल और एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च पर विशेष ध्यान दिया गया है। साथ ही अनुपालन आसान बनाने और क्रेडिट फ्लो बढ़ाने के उपाय भी किए गए हैं। इन्हें नौकरियों और आर्थिक गति को बढ़ाने के केंद्रीय उपकरण के रूप में देखा गया है।"


बदलाव के अगले चरण के लिए निजी क्षेत्र की निर्णायक भागीदारी जरूरी

पीएम ने लिखित इंटरव्यू में कहा, "हालांकि मैं इस अवसर का इस्तेमाल निजी क्षेत्र से एक अनुरोध करने के लिए करना चाहता हूं। नीतियां केवल सक्षम वातावरण तैयार कर सकती हैं। बदलाव के अगले चरण के लिए निजी क्षेत्र की निर्णायक भागीदारी जरूरी है।" पीएम ने कहा, "भारतीय कंपनियों को अनुसंधान एवं विकास (रिसर्च एंड डेवलपमेंट) में और ज्यादा एक्टिव तरीके से निवेश करना चाहिए, नई टेक्नोलोजिज को अपनाना चाहिए, सप्लाई चेन की क्षमता को और मजबूत करना चाहिए। साथ ही प्रोटेक्टेड मार्जिंस के बजाय क्वालिटी और प्रोडक्टिविटी पर प्रतिस्पर्धा करनी चाहिए।" प्रधानमंत्री ने कहा कि प्रोत्साहन और टैरिफ लाभ, ग्रोथ को प्रोत्साहित कर सकते हैं। लेकिन टिकाऊ कॉम्पिटीटिवनेस इनोवेशन, एफिशिएंसी और स्केल पर बेस्ड होनी चाहिए।

अभी तक निजी क्षेत्र ने उम्मीद के मुताबिक नहीं दिखाया जोश

पिछले 10 सालों में सरकार ने भारत की ग्रोथ स्ट्रैटेजी को रिकॉर्ड पूंजीगत खर्च के इर्द-गिर्द केंद्रित किया है। इस दौरान सड़कों, रेलमार्गों, बंदरगाहों, हवाई अड्डों, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और एनर्जी नेटवर्क पर खर्च में तेजी से बढ़ोतरी की गई। ऐसा इसलिए ताकि निजी निवेश को आकर्षित किया जा सके और मध्यम अवधि की प्रोडक्टिविटी बढ़ाई जा सके। लेकिन अभी तक निजी क्षेत्र ने उम्मीद के मुताबिक उत्साह और जोश नहीं दिखाया है। पीएम मोदी ने भारत के प्राइवेट कॉरपोरेट सेक्टर से आगे आने और साहसिक निवेश व इनोवेशन-बेस्ड ग्रोथ के जरिए रिफॉर्म को लेकर सरकार के प्रयासों के साथ तालमेल बिठाने का आह्वान किया।

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उच्च उत्पादकता के लाभों को बांटना जरूरी

पीएम ने यह भी कहा कि उच्च उत्पादकता के लाभों को व्यापक रूप से साझा करना जरूरी है, ताकि ग्रोथ स्थायी और सामाजिक रूप से मान्य हो। उन्होंने कहा, ‘‘जैसे-जैसे उत्पादकता बढ़ती है, उसके फायदों को कर्मचारियों, शेयरहोल्डर्स और मालिक-मैनेजर्स के बीच उचित रूप से​ बांटा जाना चाहिए। लगातार और टिकाऊ ग्रोथ के लिए सामाजिक वैधता जरूरी है। बढ़ते रियल वेजेस, स्किल्स का अपग्रेडेशन और स्थिर रोजगार घरेलू मांग और सामाजिक एकजुटता को मजबूत करते हैं। ये अंततः लॉन्ग टर्म निवेश को सपोर्ट करते हैं।’’

प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार का फोकस इंफ्रास्ट्रक्चर, आर्थिक स्थिरता, रेगुलेटरी रिफॉर्म्स और ट्रेड एक्सेस पर है। पीएम मोदी के मुताबिक, 2047 तक विकसित भारत की अगली छलांग इस बात पर निर्भर करेगी कि भारतीय उद्योग, इनोवेशन में कितना साहसिक निवेश करता है, लॉन्ग टर्म क्षमता कैसे विकसित करता है। साथ ही खुद को वैश्विक रूप से प्रतिस्पर्धी, टेक्नोलॉजी के मोर्चे पर सक्षम और सामाजिक रूप से जिम्मेदार ग्रोथ इंजन के रूप में कैसे स्थापित करता है।

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