New Medical Colleges in India: अपने देश में मेडिकल के क्षेत्र में करियर बनाने की इच्छा रखने वाले सभी युवाओं के लिए सरकार ये खुश करने वाली खबर है। केंद्र सरकार ने राज्य सभा में बताया है कि शैक्षिक वर्ष 2025-26 में देश में कम से कम 43 नए मेडिकल कॉलेज बनाने को मंजूरी दी गई है। साथ ही, नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) के आंकड़ों के मुताबिक पूरे भारत में 11,682 एमबीबीएस सीटें और 8,967 पोस्टग्रेजुएट (PG) सीटें भी बढ़ी हैं। ये जानकारी स्वास्थ्य राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने राज्यसभा में एक लिखित जवाब में दी।
अनुप्रिया पटेल ने 10 मार्च, मंगलवार को राज्य सभा को बताया कि शैक्षिक वर्ष 2025-26 के लिए देश भर में कुल 43 नए मेडिकल कॉलेज बनाए गए हैं। पटेल ने कहा कि एनएमसी के मुताबिक, सरकार ने उसी एकेडमिक ईयर के लिए एम्स, इंस्टिट्यूट ऑफ नेशनल इंपॉर्टेंस में साढ़े ग्यारह हजार से अधिक सीटें मंजूर की हैं। इन आंकड़ों में देश के सरकारी मेडिकल कॉलेज, निजी मेडिकल कॉलेज, एम्स और राष्ट्रीय महत्व के संस्थानों में उपलब्ध सीटों की जानकारी शामिल है।
बता दें, एनएमसी हर साल नए मेडिकल कॉलेज बनाने और स्नातक (UG) और स्नातकोत्तर सीटें बढ़ाने के लिए देश भर के मेडिकल कॉलेजों और इंस्टिट्यूट से ऑनलाइन एप्लीकेशन मंगाता है। अनुप्रिया पटेल ने बताया कि सरकार लगातार देश में डॉक्टरों की संख्या बढ़ाने के लिए मेडिकल शिक्षा के दायरे में विस्तार करने पर काम कर रही है। नए कॉलेजों के शुरू होने से न केवल मेडिकल पढ़ाई के अवसर बढ़ेंगे, बल्कि कई राज्यों में स्वास्थ्य सेवाओं को भी मजबूती मिलेगी।
इसके अलावा, मेडिकल इंस्टीट्यूशन्स की स्थापना, असेसमेंट और रेटिंग रेगुलेशन, 2023, अंडरग्रेजुएट कोर्सेज के लिए मिनिमम स्टैंडर्ड रिक्वायरमेंट (UGMSR), 2023, पोस्टग्रेजुएट कोर्सेज के लिए न्यूनतम मानक आवश्यकता (PGMSR), 2023, और एनएमसी द्वारा दिए गए दूसरे संबंधित नियमों और निर्देशों के अनुसार जांच और आकलन की प्रक्रिया देखने के बाद परमिशन लेटर (LoP) या डिसअप्रूवल लेटर (LoD) जारी किया जाता है।
पटेल ने बताया कि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय "मौजूदा डिस्ट्रिक्ट/रेफरल हॉस्पिटल्स के साथ जुड़े नए मेडिकल कॉलेज बनाने" के लिए एक केंद्र पोषित स्कीम (CSS) को विनियमित करती है। इसमें कम सुविधा वाले इलाकों और आकांक्षी जिलों को प्राथमिकता दी जाती है, जहां कोई सरकारी या निजी मेडिकल कॉलेज मौजूद नहीं है। इसमें नॉर्थ ईस्टर्न और स्पेशल कैटेगरी के राज्यों के लिए केंद्र और राज्य सरकारों के बीच फंड शेयरिंग 90:10 के अनुपात में और दूसरों के लिए 60:40 के अनुपात में होती है।