दिल्ली का विधानसभा चुनाव ‘सॉफ्ट हिंदुत्व’ की राह पकड़ चुका है, क्योंकि सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी (AAP) और विपक्षी भारतीय जनता पार्टी (BJP) के बीच पुजारियों और इस तरह के लोगों का सबसे बड़ा हितैषी बनने की होड़ लगी हुई है। पांच फरवरी को होने वाले चुनाव में यह देखने को मिल रहा है कि आम आदमी पार्टी ‘धर्म’ का दामन थामकर ‘चुनावी मझधार’ पार करना चाहती है। ‘आप’ ऐसा करके BJP को उसी के अंदाज में पराजित करना चाहती है।
